फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते सप्ताह मीडिया में खबर छाई रही कि नगर निगम मुख्यालय परसर में स्थित होमगार्ड के डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट कार्यालय के क्लर्क जितेन्द्र व चपरासी विजेन्द्र को विशाल वर्मा नामक एक होमगार्ड से 2500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। रिश्वत का लेन-देन इस बात पर हो रहा था कि होमगार्ड वर्मा को दोबारा से ट्रैफिक पुलिस के साथ भी काम पर लगाया जाए। बेशक रिश्वत के इस लेन-देन का मामला पहली बार सामने आया है। लेकिन यह एक हकीकत है कि तमाम होमगार्डों की पहली पसंद ट्रैफिक पुलिस के साथ ही काम करने की होती है। इसके लिये वे का$फी समय से सम्बन्धित बाबू अथवा अधिकारी को चढ़ावा चढ़ाते आ रहे हैं। गौर तलब है कि बाबू एवं चपरासी की कोई औकात नहीं कि वे होमगार्ड को कोई तैनाती दे सकें तमाम तैनातियां डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट द्वारा ही की जाती हैं। इसलिए असली रिश्वतखोर तो डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट है, क्लर्क व चपरासी तो मात्र मोहरे हैं।
ट्रैफिक में तैनाती का कारण यह है कि यहां होमगार्ड की दिहाड़ी अच्छी खासी बन जाती है। सडक़ पर चलने वाले वाहनों से नकद वसूली, पुलिसकर्मी खुद न करके इन्हीं होमगार्डों के माध्यम से कराते हैं। इस काम का सारा जिम्मा इन्हीं होमगार्डों के सिर पर रहता है। ऐसा करके पुलिस वाले पकड़े जाने के जोखिम से बचे रहते हैं।
करीब डेढ़ माह पूर्व बदरपुर बार्डर पर एक मोटरसाइकिल सवार से रिश्वत लेने के आरोप में एक होमगार्ड के विरुद्ध शिकायत आई थी, जबकि होमगार्ड के पास किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं होता। वह जो कुछ भी करता है पुलिसकर्मी के आदेशानुसार ही करता है। जाहिर है पुलिस वाले अपनी नौकरी बचाये रखने के लिये इन होमगार्डों का इस्तेमाल करते हैं। यह तथ्य तमाम अधिकारियों को ज्ञात होने के बावजूद वे इस दिशा में कोई सार्थक उपाय नहीं खोज रहे हैं।