फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा कौशल रोजगार निगम के लिए किसी अभ्यर्थी को नौकरी देने के लिए सबसे बड़ी योग्यता उसका संघ समर्थक होना है। अभ्यर्थी चाहे गुंडा हो, दंगाई-बलवाई हो उसमें कोई भी बुराई हो बस संघ-भाजपा के लिए काम करने वाला हो, उनके कार्यक्रम में दरी बिछाने, कुर्सियां लगाने, भीड़ इकट्ठा करे, एचकेआरएन उसे नियमों को ताक पर रख कर नौकरी देगा। हाल ही में एचकेआरएन ने ऐसे ही संघ समर्थक हत्या के प्रयास के आरोपी नरेश रावत को एफएमडीए में जूनियर इंजीनियर के पद पर नौकरी दी है। एचकेआरएन पर आरोप है कि नरेश रावत को तैनाती देने में सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ाई गईं। किसी भी अभ्यर्थी का फाइनल सिलेक्शन होने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता है। हत्या का प्रयास, हथियारबंद होकर बलवा, दंगा करने जैसी गंभीर धाराओं में विचाराधीन केस वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार सरकारी नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। नरेश रावत पर हत्या का प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस अदालत में विचाराधीन है इसके बावजूद एचकेआरएन ने उस पर मेहरबानी की। नरेश रावत और उसके भाई अनूप ने दस बारह गुुंडों के साथ मिलकर 21 अक्तूबर 2019 को पड़ोसी अशोक बघेल पर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया था, हमलावर अशोक को अधमरा छोड़ कर भाग गए थे। हमलावरों के भाजपा से जुड़े होने के कारण सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस ने नरेश और अनुप रावत के खिलाफ मारपीट की धाराओं में केस दर्ज कर मामला सुलटाने का प्रयास किया था। पीडि़त धर्मेंद्र के अनुसार अदालत में केस जाने पर जज के आदेश पर कैंप पलवल थाना पुलिस को एफआईआर 683 दिनांक 21 अक्तूबर 2017 के केस में हत्या का प्रयास की धारा 307 भी जोडऩी पड़ी, उनके अनुसार केस सुनवाई के अंतिम चरण मेें है, जल्द ही फैसला सुनाया जा सकता है, दोषियों को सजा होगी।
सरकारी पद पर रहते हुए किसी राजनैतिक दल या उसके अनुषांगिक संगठन का पदाधिकारी रहना अनैतिक माना जाता है। नरेश एफएमडीए मेें इंजीनियर होने के साथ ही भाजपा में दो दो पदों की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। इतनी गड़बडिय़ों के बावजूद उसे नौकरी दिया जाना लगता है कि भाजपा में नेताओं की दरी बिछाने को ही नरेश की शैक्षिक योग्यता और इंजीनियरिंग कौशल मान कर नौकरी परोस दी गई।
एफएमडीए सूत्रों के अनुसार इंजीनियर होने के बावजूद नरेश रावत को काम नहीं आता है, उसे नौकरी करते चार महीने होने वाले हैं लेकिन निर्माण की आधारभूत जानकारियां भी उसे नहीं मालूम हैं, अधिकारी उसकी गलतियां दुरुस्त करने में लगे रहते हैं। वजह यह है कि अधिकारी उससे डरते हैं कि सीएम सैनी, खट्टर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का करीबी होनेे के कारण नरेश कहीं उनका नुकसान न करा दे, यही कारण है कि अधिकारी उससे काम लेने में भी हिचकिचातेे हैं। वेतन तो वो एफएमडीए से ले रहा है लेकिन भाजपा और संगठन का ही करने मे ही ज्यादा व्यवस्त रहता है।
राजनीति के जानकार नरेश की भर्ती को प्रशासन का भाजपाईकरण किए जाने के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार चुनाव में ऐसे कर्मचारी निष्पक्ष मतदान को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं, भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ये लोग बोगस वोटिंग, ईवीएम में गड़बड़ी , या मतदाता को सत्ता के इशारे पर सरकारी नौकरी पाने वाले नरेश रावत पहले नहीं हैं, हां उनका केस सामने आ गया, प्रदेश में ऐसे अनगिनत ‘नरेश’ होंगे जिन्हें, रोजगार के लिए भटक रहे प्रदेश के हजारों योग्यता रखने वाले युवाओं को दरकिनार कर, उनका हक मार कर सरकारी नौकरी की रेवड़ी बांटी गई होगी।
सारे तथ्य विपरीत होने के बावजूद झूठ बोलने में माहिर संघ प्रशिक्षित नरेश ने सभी आरोपों को झूठा बता दिया। उनका कहना है कि उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का कोई केस नहीं चल रहा है, वह इंजीनियरिंग डिग्री धारक हैं, आरटीआई लगाकर जानकारी ली जा सकती है।