पवन कुमार बंसल हरियाणा के एडीजीपी वाई. पूरण कुमार के दलित होने के कारण उन्हें पुलिस थाने के मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के आरोपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस खबर को पढऩे वाला हर व्यक्ति स्तब्ध था, जिसमें मैं स्वयं भी शामिल हूं। विदेशों से भी कई पाठकों ने मुझसे पूछा कि सच्चाई क्या है। मैंने हरियाणा पुलिस के कई अधिकारियों से बात करने की कोशिश की ताकि सच्चाई सामने आ सके, लेकिन इन आरोपों की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए कोई भी अधिकारी गुमनामी की शर्त पर भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। लेकिन अंतत: मुझे सफलता मिली।
मैंने वाई. पूरण कुमार और तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव के बीच हुई पत्राचार की प्रति प्राप्त कर ली। यह विवाद हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ की 7 अगस्त 2020 की खबर से उपजा। अंबाला रेंज के तत्कालीन आईजी वाई. पूरण कुमार ने अंबाला जिले के शाहजादपुर ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में नवनिर्मित शिव मंदिर में शिवलिंग की पूजा की थी। मनोज यादव ने इस खबर का हवाला देते हुए पूरण कुमार का ध्यान इस ओर खींचा। उन्होंने पंजाब पुलिस नियमावली 1934 के नियम 3.3(2) का उल्लेख किया। पत्र में कहा गया है, ”पुलिस परिसरों पर पूजा स्थल। पुलिस परिसरों पर कोई पूजा स्थल नहीं होना चाहिए।”
पुलिस नियमों का उल्लंघन वास्तव में यह जातिगत भेदभाव का मामला नहीं है। बल्कि यह पुलिस परिसर में पूजा स्थल बनाने के नियमों का उल्लंघन है। पंजाब पुलिस नियमावली 1934 के नियम 3.3(2) के अनुसार, “पूजा स्थल या अन्य भवन जो पूजा के लिए हों या अन्य भवन जो सरकार के भवन न हों, उन्हें पुलिस बल के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों द्वारा पुलिस लाइनों या अन्य पुलिस परिसरों में प्रांतीय सरकार की स्वीकृति के बिना नहीं बनाया जाएगा। प्रांतीय सरकार की स्वीकृति आईजी के माध्यम से प्राप्त की जाएगी। सभी ऐसे पूजा स्थलों (जिसमें प्रार्थना प्लेटफॉर्म शामिल हैं) की सूची, पुलिस परिसरों पर आयाम, सीमाओं का क्षेत्र और संक्षिप्त इतिहास प्रत्येक जिले में और डीआईजी के कार्यालय में रखा जाएगा। कोई इमारत या विस्तार या सरकारी भूमि पर अतिक्रमण प्रांतीय सरकार की स्वीकृति के बिना निर्मित नहीं होगा। इस संबंध में आपको सूचित करने का अनुरोध है कि प्रांतीय सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना पुलिस स्टेशन शाहजादपुर जिला अंबाला में पूजा स्थल स्थापित किया गया। पंजाब पुलिस नियम हरियाणा में लागू हैं।”
निष्कर्ष इस पत्र से स्पष्ट है कि मनोज यादव ने पूरण कुमार को नियम उल्लंघन की ओर ध्यान दिलाया था, न कि जातिगत भेदभाव किया था। अंबाला रेंज में बने इस शिव मंदिर का निर्माण बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है। इस प्रकार, दलित होने के कारण प्रवेश अस्वीकार करने का आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक प्रशासनिक अनियमितता का मामला है।