फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के गढ़ नगर निगम में इंजीनियरिंग की फर्जी डिग्री वालों की ऊंचे पदों पर तैनाती के असंभव कार्य को ही संभव नहीं बनाया गया, खट्टर सरकार में अधिकारियों की कृपा से नियम ताक पर रख ड्राफ्ट्समैन मनीष सेहरावत को सहायक इंजीनियर पद तक पहुंचा दिया गया। प्रक्रिया अपना कर सहायक इंजीनियर पद पाने वाली अंजूबाला ने जब वरिष्ठता का हक जताते हुए मनीष की पदोन्नति को गलत करार देकर शहरी स्थानीय निकाय विभाग मुख्यालय में शिकायत की तब कहीं जाकर अधिकारियों को गलती का अहसास हुआ और मनीष को पदावनत करने का आदेश जारी किया गया।
निगम सूत्रों के अनुसार मनीष सहरावत की भर्ती शहरी स्थानीय निकाय विभाग नियमावली 1998 के तहत ट्रेसर के पद पर सात जुलाई 2005 को हुई थी। 30 जनवरी 2014 को उसे ड्राफ़्ट्समैन पदोन्नत किया गया। जानकारों के अनुसार नियमानुसार किसी भी कनिष्ठ पद के अधिकारी को वरिष्ठ पद का करंट ड्यूटी चार्ज नहीं दिया जा सकता। बावजूद इसके ड्राफ़्ट्समैन रहते हुए उसे जूनियर इंजीनियर का करंट ड्यूटी चार्ज सौंपा गया।
इसी को आधार बना कर नवंबर 2019 में खट्टर सरकार ने उसे जूनियर इंजीनियर पदोन्नत कर दिया। नियमानुसार किसी ड्राफ़्ट्समैन को जूनियर इंजीनियर पद पर पदोन्नत नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पद जूनियर इंजीनियर की फीडर काडर में नहीं आता। गलत ढंग से जेई बने मनीष को नियमों को ताक पर रख्र 14 जून 2021 को असिस्टेंट इंजीनियर पदोन्नत कर दिया गया।
मुख्यालय की सुपरिंटेंडिंग कमेटी द्वारा कराई गई जांच और मनीष सेहरावत द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद मुख्यालय ने माना कि उनकी दोनों पदोन्नतियां गलत तथ्यों पर हुई हैं इसलिए उन्हें ड्राफ़्ट्समैन पद पर रिवर्ट करने की सिफारिश की गई। इस आधार पर आयुक्त एवं हरियाणा सरकार के सचिव विकास गुप्ता ने निगमायुक्त उनको रिवर्ट करने का आदेश जारी किया।
कार्रवाई तो उन हरामखोर अधिकारियों पर भी होनी चाहिए जिनके कार्यकाल में मनीष सेहरावत को जूनियर इंजीनियर और फिर असिस्टेंट इंजीनियर पदोन्नत करने की संस्तुति की गई। नियम कानून के जानकार इन अधिकारियों ने मोटा नजराना लेकर या नेता की सिफारिश पर ही नियमविरुद्ध पदोन्नति की फाइलों पर हस्ताक्षर किए होंगे, जांच में उन्हें भी तो घसीटा जाना चाहिए था।
समझने वाली बात यह भी है कि नगर निगम में मनीष सेहरावत जैसे बहुत से अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी है जो फर्जी डिग्री या सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। अंजूबाला ने शिकायत की तो मनीष का मामला खुल गया अन्यथा वह भी अधिकारियों की जेबें भर कर पदोन्नतियां पाता रहता। सरकार और मुख्यालय यदि सच में गंभीर है तो नगर निगम में तैनाती और पदोन्नति पाने वाले प्रत्येक कर्मचारी अधिकारी की जांच करे, सबकी सच्चाई सामने आ जाएगी।