फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) काम नहीं लेकिन लूट कमाई की योजनाएं बनाने की बात हो तो नगर निगम अन्य सरकारी विभागों से पीछे कैसे रह सकता है। बारिश में शहरवासी हर साल जलभराव, सीवर ओवर फ्लो की समस्या से जूझते हैं वहीं नाली-नाला, सीवर लाइन की सफाई के नाम पर नगर निगम के खाऊ अधिकारी करोड़ों रुपयों की बंदरबांट कर जाते हैं। हरामखोरों से सीवर लाइन तो संभाली नहीं जा रही अब स्टॉर्म वाटर लाइन डालने का करोड़ों का प्रोजेक्ट बना रहे हैं।
नगर निगम के एक्सईएन नितिन कादियान के अनुसार एनआईटी विधानसभा क्षेत्र में डबुआ कॉलोनी के पास बरसात के समय अत्यधिक जलभराव की समस्या रहती है। इसके लिए एक करोड़ अस्सी लाख रुपये खर्च कर स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाई जाएगी। इसके तहत डबुआ कॉलोनी के फागना चौक से चंद कदम की दूरी पर स्थित जैन मंदिर तक 900 एमएम चौड़ी स्टॉर्म वाटर ड्रेन डाली जाएगी। जैन मंदिर से प्याली चौक पर मुख्य नाले तक 1200 एमएम व हार्डवेयर चौक तक 1600 एमएम चौड़ी स्टार्म वाटर लाइन डाली जाएगी।
सुनने में यह परियोजना अच्छी लगती है लेकिन यह केवल जनता की गाढ़ी कमाई की बरबादी और लूट की योजना से ज्यादा कुछ नहीं। नितिन कादियान जिस फागना चौक से जैन मंदिर की बात कर रहे हैं वहां तो पहले से ही लगभग चार फीट चौड़ा नाला मौजूद है, जो कीचड़ और गाद से पूरा भरा हुआ है, हर साल नाले की सफाई के नाम पर लाखों रुपये जारी होते हैं लेकिन आज तक शायद ही सफाई हुई हो। यही हाल जैन मंदिर से प्याली चौक तक का है। यहां तो नाले की चौड़ाई बारह से पंद्रह फीट है लेकिन ये भी कभी साफ नहीं किया जाता।
दो नंबर से डबुआ मंडी समिति जाने वाले मार्ग पर यह नाला बीच में पड़ता है, जरा सी बारिश होने पर यह नाला सड़कों पर बहने लगता है। यही नाला प्याली चौक पर आकर डबुआ चौक की ओर से आने वाले नाले से जुड़ता है। प्याली चौक से हार्डवेयर चौक की ओर जाने पर सड़क किनारे एक और नाला है जिसकी कभी सफाई नहीं होती, न ही कहीं कनेक्टिविटी है।
यदि फागना चौक से प्याली चौक तक नालों की सफाई करा दी जाए तो यह समस्या ही नहीं रहेगी। जानकारों के अनुसार केवल डेढ़ दो किलोमीटर स्टॉर्म वाटर ड्रेन बनाना पैसे की बर्बादी ही होगी। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम तब ही सफल होगा जब पूरे शहर का पानी इकट्ठा होकर शहर से बाहर निकालने की व्यवस्था हो। केवल फागना चौक से हार्डवेयर चौक तक जल निकासी करना समस्या का निदान नहीं है। हार्डवेयर चौक पर जो पानी इकट्ठा होगा वो कहां जाएगा यानी जलभराव की समस्या बनी ही रहेगी। नगर निगम के जानकारों के अनुसार शहर की सबसे बड़ी समस्या ड्रेनेज सिस्टम का पूर्ण नहीं होना है, यहां नाले-नालियां तो बनाई गई हैं लेकिन बहाव के लिए उनकी कनेक्टिविटी कहीं नहीं है। कनेक्टिविटी न होने के कारण पानी निकल ही नहीं पाता, बरसात में यही समस्या नासूर बन जाती है। सीवेज ओवर फ्लो कोढ़ में खाज साबित होती है। डबुआ में जलभराव की समस्या तो होनी ही थी, यहां का पानी जिन तालाबों में जाता था उन्हें तो भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों ने मिलीभगत कर पाट दिया और उन पर प्लॉट काट दिए। तालाब नहीं रहे तो सड़कों पर पानी भरेगा ही।
बरसाती पानी की निकासी के लिए स्टार्म वाटर ड्रेन सिस्टम बनाने के बजाय इसका प्रबंधन बिना धन खर्च किए हो सकता है। यदि पूरे शहर के बड़े छोटे पार्कों को सड़क से दो से तीन फीट नीचा बनाया जाए और बीच में एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा दिया जाए तो सड़कों पर खड़ा होने वाला पानी पार्क में जमा होगा जहां हार्वेस्टिंग के जरिए नीचे चला जाएगा, और भूजल स्तर में भी सुधार होगा। उदाहरणवश, करीब डेढ़ दशक पहले यह व्यवस्था सेक्टर 14 में सफल भी हुई थी लेकिन खराब सीवेज सिस्टम के कारण फ्लॉप हो गई थी।
हुआ ये था कि सीसी सड़कें बनाई गईं, इत्तेफाक से सड़क ऊंची होने के कारण एक मुख्य पार्क नीचा हो गया। बरसात में सारा पानी उस पार्क में इकट्ठा हो गया और सड़क साफ हो गई। सीपेज के जरिए ये पानी जमीन में चला भी जाता लेकिन ओवरफ्लो हो रहे जाम सीवरों का गंदा पानी भी पार्क में भर गया, जिससे गंदगी और बदबू फैलने लगी। परेशान होकर स्थानीय नागरिकों ने विरोध किया तो सीवर लाइन ठीक कराने के बजाय लाखों रुपये खर्च कर पार्क में मिट्टी भराना आसान समझा गया। यदि सीवर लाइन दुरुस्त कर दी जाती तो जलभराव की समस्या भी दूर हो जाती। वर्तमान में शहर में कहीं भी सीवेज व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। संदर्भवश, बताते चलें कि हूडा ने तमाम सेक्टरों में करोड़ों रुपये खर्च कर स्टॉर्म वाटर लाइनें डाली हुई हैं जो कभी चली ही नहीं, अब वही काम नगर निगम करने जा रहा है।
सुधी पाठकों को याद दिलाते चलें कि हर साल मानसून की तैयारियां अप्रैल माह से ही शुरू कर दी जाती हैं यानी नालों से सिल्ट निकालना, नालियों की सफाई, सीवेज प्रबंधन आदि ताकि बरसात होने पर जलभराव न हो सके। मई भी लगभग तीन चौथाई बीत गया है लेकिन नाला सफाई का काम नजर नहीं आ रहा, ये जरूर है कि नगर निगम के खाऊ अधिकारियों ने कागजों में नाला सफाई, सिल्ट प्रबंधन का काम मोटे खर्चे पर शुरू भी कर दिया होगा। यानी हर बार की तरह इस बार भी बरसाती पानी की निकासी के लिए करोड़ों रुपये लुटा दिए जाएंगे और आम जनता को बरसात के मौसम में फिर जलभराव से परेशान होना होगा।