फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर गांव में मेरा कार्यकर्ता कन्हैया नाली पर अवैध दीवार बना रहा है, उसको छेडऩा नहीं, अगर छेड़ा तो समझ लेना नगर निगम में नौकरी करना मुश्किल हो जाएगी। नगर निगम के संयुक्त आयुक्त करण सिंह भगोरिया को यह धमकी भाजपा के बड़भैया नेता टिपरचंद ने दी। टिपरचंद की पहचान सिर्फ इतनी है कि वह बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद के भाई हैं और उनके नाम पर वसूली, उद्घाटन आदि कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। मूलचंद यदि विधायक न हों तो टिपरचंद को गली का कुत्ता भी न पूछे। मुजेसर गांव निवासी कन्हैया पार्षद रवि भगत का खास चेला है और रवि भगत विधायक मूलचंद का। बीते दिनों कन्हैया ने नगर निगम की नाली पर अतिक्रमण कर पिलर खड़ा करना शुरू किया तो गांव वालों ने इसका विरोध किया और इसकी शिकायत संयुक्त आयुक्त करण सिंह भगोरिया से लेकर निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से की थी। अधिकारियों ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश तोडफ़ोड़ दस्ते को दिया। गांव वालों के अनुसार अधिकारी बताते कि तोडफ़ोड़ होने वाली है लेकिन कार्रवाई नहीं करने पर जब तोडफ़ोड़ शाखा के कर्मचारियों से पूछा गया तो वो लोग हाथ पैर जोडऩे लगे।
दबाव देने पर बताया कि साहब के पास टिपरचंद शर्मा और बाद में खुद विधायक मूलचंद का फोन आया था। इन लोगों ने अवैध निर्माण की तरफ आंख उठा कर देखने से भी मना करते हुए साहब को बुरी तरह धमकाया है। अब साहब लोग हमें धमका रहे हैं कि कार्रवाई नहीं करनी है अगर कोई सवाल करे तो कुछ बताना भी नहीं है। सुधी पाठकों को याद दिलाते चलें कि कन्हैया ने यह अवैध निर्माण इसी फरवरी में पार्षद रवि भगत के इशारे पर शुरू कराया था। मज़दूर मोर्चा ने 13 फरवरी के अंक में ‘पार्षद रवि भगत बोला, तुम अवैध निर्माण करो, निगम से कोई आया तो उसकी खैर नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस खबर का संज्ञान लेकर संयुक्त आयुक्त ने कार्रवाई का आदेश दिया था। पहले तो रवि कश्यप ही कार्रवाई न करने का दबाव बनाता रहा लेकिन मातहतों ने बड़े साहब के नाराज होने का रोना रोया तो भगत ने बड़े साहब को ही टिपरचंद और फिर मूलचंद से धमकी दिलवा दी।
सवाल यह है कि अधिकारी खास कर आला अधिकारी इन सड़क छाप सत्ताधारी नेताओं या पंचवर्षीय जनप्रतिनिधि के नियम कानून विरोधी आदेशों को आंख मूंद कर क्यों कुबूल कर रहे हैं। आईएएस हो या एचपीएस या कोई अन्य सरकारी कर्मचारी सभी जनता की सेवा के लिए हैं और जनता के धन पर ही पल रहे हैं, लेकिन बजाते नेता-मंत्री की हैं। गांव के सुखबीर आदि समाजसेवी अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए नगर निगम से लेकर आला अधिकारियों तक लगातार शिकायत करते रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, ये अफसर भी भ्रष्टाचारी नेता-मंत्रियों के साथ मिले हुए हैं और जनता को लूटने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो गांव वालों के लिए समस्या साबित हो रही सरकारी नाली पर बनी दीवार गिरवा देते।
नगर निगम के अधिकारियों से मायूस होकर गांव वालों ने इसकी शिकायत स्थानीय शहरी निकाय मुख्यालय पंचकूला में की है। लोगों का कहना है कि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री होने के बावजूद नगर निगम अधिकारी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की नहीं सुनते, इसके विपरीत कृष्णपाल गूजर, मूलचंद शर्मा, धनेश अदलखा के जा बेजा आदेशों का पालन करने को तत्पर रहते हैं। इन लोगों को उम्मीद है कि पंचकूला मुख्यालय में बैठे आला अधिकारी न सिर्फ अवैध निर्माण तुड़वाने का आदेश जारी करेंगे बल्कि कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कदम उठाएंगे। गांव वाले जो भी उम्मीद लगाए बैठे हों, सत्ता की गोद में बैठा कन्हैया बेरोकटोक नाली पर दीवार बना रहा है, देखना है कि गांव वालों को इंसाफ मिलेगा या सत्ता की धौंस की जीत होगी।
किस हैसियत से निगम अधिकारियों की बैठक करता है टिपरचंद बीते दिनों टिपरचंद ने बल्लभगढ़ नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के बारे में दिशा निर्देश जारी किए। उनका चेला वार्ड नंबर तीन के पार्षद रवि भगत ने बड़े गर्व से इस बैठक की फोटो सोशल मीडिया पर जारी कर आक़ा टिपरचंद के कसीदे पढ़े। फोटो जारी होते ही सवाल उठ रहे हैं कि किस हैसियत से टिपरचंद शर्मा ने निगम अधिकारियों के साथ यह बैठक की। मूलचंद शर्मा विधायक है लेकिन टिपरचंद आम नागरिक ही है, चलो भाजपा कार्यकर्ता है तो बाकी कौन से कार्यकर्ता हैं जिन्हें अधिकारियों के साथ बैठक करने और सवाल करने का अधिकार है। भाजपा के ही एक कार्यकर्ता ने बताया कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में मंत्री लक्ष्मी नारायण के भतीजे नरदेव चौधरी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों की बैठक ली थी। इस मामले में इतना बवाल हुआ था लक्ष्मी नारायण के मंत्रीपद छोडऩे तक की नौबत आ गई थी, सोशल मीडिया पर आज भी यह प्रकरण छाया हुआ है। लोग सवाल कर रहे हैं कि नगर निगम के अधिकारी किस आधार पर निगम एक निजी आदमी को निगम के विकास कार्याे की जानकारी दे रहे हैं, वैसे तो ये अधिकारी आम आदमी से ठीक से बात तक नहीं करते। टिपरचंद के करीबी बताते हैं कि मूलचंद के विधायक बनने से पहले बेचारा कुछ नहीं था। मूलचंद पहली बार विधायक बना तो लोग इसके पास जुटने लगे। कोई काम लेकर आता तो उससे कहता काम तो करा दूंगा मेरे लिए दो जोड़ी कुर्ता पायजामा बनवा दो और एक टेलर का पता देकर कहता कि वहां जाकर बनवाना। टेलर बताता कि कुर्ता पायजामा का पैसा आ गया है तब टिपर छोटे भाई से कह कर उस व्यक्ति का काम करवा देता। इसी तरह वह नेता बन गया वरना उसे कोई पूछता तक नहीं था। भाजपा के जानकारों के अनुसार केवल रवि भगत ही मूलचंद और टिपरचंद के जूते उठा कर अपनी भगतई करने में जुटा है बाकी कोई पार्षद दो भाइयों को घास तक नहीं डाल रहा। दरअसल, भगत को मूलचंद ने नगर निगम में वरिष्ठ उप महापौर पद दिलाने का झुनझुना थमाया है, बस यही झुनझुना पकड़े भगत दोनों भाइयों का चरणचुंबन में लगा है।