फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मज़दूर मोर्चा के 26-31 जनवरी 2025 अंक में ‘चुनाव में जब्त शराब बेचने वाले एसएचओ को जेल भेजने के बजाय पुलिस लाइन भेजा गया शीर्षक से प्रकाशित खबर को लेकर अपराधी एसएचओ के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने के बजाय अधिकारी यह ढूंढने का प्रयास करते रहे कि खबर थाने से बाहर निकली कैसे? अधिकारियों का अंधेरे में चलाया गया तीर सीधा कच्ची नौकरी वाले सिपाही (एसपीओ) खान को जा लगा। सिपाही खान का दोष केवल इतना है कि वह उस रात पहरे पर था और शराब चोरी की वारदात उसकी आंखों के सामने हुई थी।
कच्ची नौकरी वाला खान अपने सीनियर यानी एसएचओ के ड्राइवर राजीव से सवाल जवाब क्या करता, लेकिन उसने इसकी जानकारी थाने के मोहर्रर को दी थी। उसकी बातें एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दी गईं और जब मामला खुला तो उसे ही बर्खास्त कर मामले पर पर्दा डाल दिया गया। पुलिस विभाग के जानकारों को आशंका है कि एसपीओ को बर्खास्त कर मास्टर माइंड एसएचओ अनिल कुमार को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका मानना है कि आला अफसरों को खुश करने के बेहतरीन गुर जानने वाला अनिल कुमार शराब की बिक्री से हड़पे गए लाखों रुपयों में से कुछ हिस्सा फेक कर जांच अपने पक्ष में करा लेगा। उनकी आशंका सही है या गलत यह तो विभागीय जांच के परिणाम आने पर ही पता चलेगा।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार एसएचओ अनिल कुमार ने यह शराब अपने चालक राजीव और एसीपी के रीडर सुरेंद्र के जरिए निकलवाई थी। राजीव तो खरीदार राहुल को साथ लेकर आता और माल लोड कर उसे थाने से बाहर छोडऩे भी जाता। सूत्र बताते हैं कि एक रात डेढ़ बजे के बाद राजीव एक अन्य व्यक्ति के साथ थाने पहुंचा, उस समय पहरेदारी पर एसपीओ खान तैनात था। उसके सामने ही राजीव उस व्यक्ति को लेकर शराब की खेप तक गया और माल लाद कर निकल गया था। एसएचओ का चालक होने के कारण संतरी खान ने राजीव से कोई सवाल जवाब नहीं किए थे। कुछ पुलिसकर्मियों का यह भी कहना है कि वारदात के समय एसएचओ अनिल कुमार भी वहीं मौजूद था।
हालांकि, उस रात राजीव सारी शराब नहीं ले गया था और यह सिलसिला कई रातों तक चलता रहा था। मामले की जानकारी डीसीपी एनआईटी को होने से पहले ही एसएचओ अनिल कुमार ने पेशबंदी करते हुए थाने में चोरी का केस दर्ज कराया और राहुल को भी गिरफ़्तार कर लिया। इसका फायदा भी हुआ, आला अधिकारियों ने अनिल को निलंबित नहीं किया बल्कि उसका तबादला कर दिया गया। मामले के सबसे कमजोर मोहरे ठेका पुलिसकर्मी एसपीओ खान पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के कारण चोरी होने और खबर लीक करने का ठीकरा फोड़ते हुए उसे बर्खास्त कर दिया गया।
बेचारा खान आला अधिकारियों के सामने एसएचओ के ड्राइवर के दोषी होने और खुद के निर्दोष होने की दलीलें देता रहा लेकिन उसकी एक न सुनी गई। उसकी तो बर्खास्तगी कर दी गई, बाकी संदिग्ध पक्के पुलिस कर्मियों को लाइन भेज कर जांच का नाटक शुरू किया गया। विभाग में चर्चा है कि अनिल ने जांच में खुद को निर्दाेष साबित करने के लिए आला अधिकारियों को मनाना-बहलाना शुरू कर दिया है, सूत्रों की मानें तो निर्दाेष होने की कीमत भी पचास से साठ हजार रुपये लगाई गई है। यदि इस तरह जांच होगी तो अनिल कुमार का बच निकलना तय है, लेकिन अगर आला अधिकारी उसके प्रलोभन में नहीं फंसे तो शराब चोरी कर बेचने का दोष तो उस पर साबित होगा ही, उसके खिलाफ सरकारी पद का दुरुपयोग करने, चोरी, अनुशासनहीनता आदि का केस भी दर्ज होगा।