दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) 10 नवम्बर शाम के 6.50 बजे लाल किले के सामने हुए एक कार विस्फोट में 12 बेकसूर लोग मारे गए व अनेकों बुरी तरह से घायल हो गए। इसके चलते शहर में बुरी तरह अफरा-तफरी मच गई। जिस आई 20 कार में धमाका हुआ था, वह $फरीदाबाद की रॉयल कार जोन नामक दुकान से खरीदी गई थी जो पुरानी कारों की खरीद-बेच का धंधा करती है। सन 2013-2014 मॉडल की ये कार इससे पहले करीब 10 हाथों में बिक चुकी थी। इसे आमिर और राशिद ने पुलवामा जम्मू-कश्मीर का आधार कार्ड देकर खरीदा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस अपनी सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पिछले कई महीनों से इस गिरोह पर काम कर रही थी। काम करते-करते धौज-गांव के निकट स्थित अल्फला मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गई थी। उसने उन कश्मीरी डॉक्टरों को भी चिन्हित कर लिया था जो किसी बड़ी आतंकी घटना को सरअंजाम देने वाले थे। इससे पहले कि वहां की पुलिस पूरे गिरोह को दबोच लेती, यह धमाका हो गया।
गौरतलब बात तो यह है कि दिल्ली व फरीदाबाद पुलिस को इस गिरोह की कानों-कान कोई खबर न थी। खबर हो भी कैसे सकती थी, जब उनके पास राजनेताओं की चाकरी करने से ही फुर्सत न हो तो। बीते करीब दो-तीन सप्ताह से दोनों पुलिस बल पाखंडी बाबा बागेश्वर की चाकरी में जुटे हुए थे। इसके अलावा उक्त दोनों ही पुलिस, पुलिसिंग न करके मोदी-अमित के बताए एजेंडों पर ही काम करने में जुटे रहे हैं। आजकल इनके एजेंडे से जनसुरक्षा पूरी तरह से गायब हो चुकी है। आपराधिक पृष्ठभूमि से आने वाले उक्त दोनों नेताओं का एक मात्र एजेंडा सत्ता पर कब्जा जमाए रख कर लूट-कमाई करना तथा देश में धार्मिक उन्माद भड़का कर जहर बोना रह गया है। इसके लिए ये लोग तमाम प्रशासनिक दायित्वों को ताक पर रख कर सदैव ही चुनावी मैदान में तैनात रहते हैं। बीते करीब दो माह से इन्हें बिहार चुनाव के अलावा कुछ भी नहीं दिख रहा था।
फरीदाबाद पुलिस के बयान में बताया गया है कि गांव फतहपुरतगा स्थित डॉक्टर मुलजिम के कमरे से 29 क्यूंटल अमोनिया नाइट्रेट तथा कुछ हथियार बरामद किए गए हैं। यहां के पुलिस उपायुक्त ने स्पष्ट कहा है कि पकड़ी गई विस्फोटक सामग्री आरडीएक्स नहीं है। रही बात अमोनिया नाइट्रेट की तो इसका इस्तेमाल खनन कार्यों में पिछले कई वर्षों से होता आ रहा है। पहले जब खनन कार्य सरकारी मंजूरी से होता था तो यहां बाकायदा ठेकेदारों ने लाइसेंसी मैगजीने स्थापित कर रखी थीं। इनका बाकायदा पुलिस द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता था, विस्फोटक सामग्री का पूरा ब्योरा रजिस्टरों में दर्ज हुआ करता था। अब क्योंकि सरकार द्वारा खनन बंद करा दिया गया है इसलिए यह कार्य चोरी से होता है। इसके लिए विस्फोटक सामग्री भी चोरी व पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम इस्तेमाल हो रही है। ऐसे में 29 क्यूंटल अमोनिया पकड़ा जाना कोई बड़ी बात नहीं है। सरकार एवं पुलिस की विश्वसनीयता पाताल में इतनी नीचे उतर चुकी है कि जन साधारण अब इनकी बातों को न तो गम्भीरता से लेता है और न ही विश्वास करता है। आये दिन पुलिस द्वारा बनाए गए झूठे मुकदमे का पर्दाफाश होते देखकर कौन भला इन पर विश्वास करेगा? यह बात तो ठीक है कि उक्त दिल्ली विस्फोट हुआ और उसमें अनेकों मौतें हुई लेकिन यह सब किसने किया और क्यों किया इस बारे सरकारी बयानों को बहुत अधिक विश्वसनीय नहीं माना जा रहा। पुलवामा घटना के बाद तो लोग यहां तक भी मानने लगे कि कहीं चुनावी लाभ के लिए खुद सरकार ने ही तो यह काण्ड नहीं करा दिया था? छ: साल में आज तक भी उस काण्ड का कोई खुलासा सरकार नहीं कर सकी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के जिस डीएसपी देवेन्द्र सिंह को हथियार बंद आतंकियों के साथ पकड़ा था, उसका क्या हुआ, वह डीएसपी आज कहाँ है? जिस एनआईए के अधिकारी शुकला को पुलवामा तफ्तीश का काम सौंपा गया था, उसकी ‘महारत’ को देखते हुए दिल्ली विस्फोट की तफ्तीश भी उसी को सौंपी गई है। मोदी अपनी आदत के मुताबिक कहने से बाज नहीं आ रहे कि वे एक-एक आतंकी को पकड़ कर उसे सजा दिलाएंगे। पहलगाम के आतंकियों को पकड़ कर उन्होंने जैसी सजा दिलाई है वह सारा देश जानता है। जिस प्रधानमंत्री को चुनावी प्रचार व जुमलेबाजी से ही फुर्सत न हो तो वह कैसे दोषी पकड़ेगा व कैसी सजा दिलाएगा, यह सभी जानते हैं।
दिल्ली बम ब्लास्ट के बीच मोदी जी भूटान में अदानी पावर भूटान में 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना पर काम कर रहा है। अदानी ने भूटान की ड्रक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (DGPC) के साथ एक संयुक्त उद्यम (JV) बनाया है। इस परियोजना में रूपए 6,000 करोड़ का निवेश होगा और इसके निर्माण का लक्ष्य 2026 की पहली छमाही में शुरू होकर पांच साल में पूरा करना है। यह परियोजना भूटान को सर्दियों की बिजली की मांग को पूरा करेगी और गर्मियों में अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात की जाएगी। भारत भले धुआं-धुआं हो जाए। नौकर को अपने मालिक के लिए भूटान जाना ही था। आपने अदानी के एजेंट को सत्ता सौंपी है। कांग्रेस यह बात बोल नहीं पा रही है और न ही कांग्रेस की फंडिंग खा रहे यूट्यूबर्स। कांग्रेसी ट्रॉल्स तो राहुल-प्रियंका के मनरेगा मज़दूर हैं। आज मोदी को भी भूटान में कांग्रेसियों की इस ज़हालत पर भारी मन से हंसना पड़ रहा है।