फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा लाइसेंस प्राप्त किसी कॉलोनी में अगर आपको सीवर, पेयजल, सड़क, पार्किंग स्थल और पार्क जैसी आधारभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो आप विभाग में शिकायत नहीं कीजिएगा। आरटीआई में इस संबंध में पूछे गए सवाल पर विभाग का जवाब आया है कि उसका काम केवल लाइसेंस देना है, आधारभूत सुविधाएं दी जा रही हैं या नही इसका सर्वेक्षण करना नहीं। सैनिक कॉलोनी निवासी तरुण चोपड़ा के अनुसार कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवार सड़क, पानी, सीवर, पार्किंग आदि की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं, यहां बच्चों और बुजुर्गों के लिए पार्क की भी व्यवस्था नहीं है। कॉलोनी को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने अस्सी के दशक में लाइसेंस जारी किया था। आधारभूत सुविधाओं से महरूम तरुण चोपड़ा ने पिछले माह डीटीपी कार्यालय में आरटीआई डाल कर पूछा कि किसी कॉलोनी और उसमें बनने वाले फ्लैट्स के लिए लाइसेंस देने के क्या मानक हैं।
क्या विभाग लाइसेंस देने से पहले कॉलोनी का सर्वेक्षण कर वहां दी जाने वाली आधारभूत सुविधाएं सड़क, पानी, पार्क, सीवर आदि की व्यवस्था होना निश्चित करता है। पहले से ही असुविधाओं से ग्रस्त सैनिक कॉलोनी में लगातार धड़ल्ले से चार मंजिला फ्लैट बनाए जा रहे हैं, इस पर विभाग क्या कर रहा है? डीटीपी कार्यालय से जवाब मिला कि लाइसेंस देने से पहले उस कॉलोनी में आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना विभाग के दायरे में ही नहीं आता। बताया गया कि विभाग ने 1985 में लाइसेंस जारी किया था। वर्तमान में जो फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं उनके लिए पूर्व सीएम खट्टर ने 2 जुलाई 2024 को स्टिल्ट प्लस चार मंजिल की नोटिफिकेेशन जारी की थी। इस नोटिफिेकेशन के आधार पर सैनिक कॉलोनी ही नहीं अन्य कॉलोनियों में स्टिल्ट प्लस चार मंजिल बनाई जा रही हैं। कॉलोनी में पार्क, पार्किंग स्थल, सीवर, पेयजल आदि की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है।
आरटीआई का जवाब मिलने पर आश्चर्यचकित तरुण चोपड़ा कहते हैं कि यह एक बहुत बड़ी कमी है, डीटीपी लाइसेंस देकर छुट्टी पा लेगा और लाइसेंसी कॉलोनी में जीवन भर की कमाई खर्च कर फ्लैट लेने वाले जीवन भर सीवर, पानी, सड़क, पार्क के अभाव में जीने को मजबूर रहें। उनका कहना है कि विभाग में मोटी मोटी तनख्वाह लेने वाले अधिकारी इस कमी से सरकार को अवगत तो करा सकते हैं ताकि वह व्यापक जनहित में नियमों में आवश्यक संशोधन करे। उनका कहना है कि गैर जिम्मेदार अधिकारी केवल लकीर के फकीर की तरह काम कर रहे हैं विभाग की कमियां दूर करने की उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। तरुण अब खुद इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार से गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
बेशक आरटीआई कार्यकर्ता ने यह नहीं पूछा कि विभाग किसी को लाइसेंस देता है तो क्यों देता है और किसी को नहीं देता तो क्यों नहीं देता, यानी कि लाइसेंस देने की क्या शर्तें निश्चित की गई हैं। बिना पूछे और बिना कहे यह समझा जा सकता है कि शहर में जवाहर कॉलोनियों, डबुआ कॉलोनियों, पवर्तिया कॉलोनियों, संजय कॉलोनियों, राहुल कॉलोनियों जैसी कुकुरमुत्तों की तरह उगने वाली अनियोजित कालोनियों को रोकने के लिए सरकार ने लाइसेंस व्यवस्था बनाई है। जाहिर है इसका मकसद केवल और केवल इतना है कि जो भी कोई कॉलोनी बने उसका लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी यह सुनिश्चित करे कि उसमें तमाम तरह की नागरिक सुविधाएं, पर्याप्त चौड़ी सड़कें, पानी, सीवर, सामुदायिक भवन, पार्क, स्कूल आदि सुविधाएं सुनिश्चित करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाए। लेकिन चोरों के राज मेंं बिके हुए अधिकारियों ने इन शर्तों को लागू कराने के बजाय लाइसेंस बेच कर अपनी लूट कमाई का रास्ता प्रशस्त कर लिया।