फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 88 स्थित सैनिक विहार कॉलोनी के 702 फ्लैटों की कन्वेयंस डीड करवाने में भी धुन्ना एंड पार्टी खुलकर लूट कमाई में जुटी है। कन्वेयंस डीड कराने के लिए जिस वकील राजेंद्र सिंह पालीवाल को सहायक रजिस्ट्रार प्रवीण कादियान द्वारा अधिकृत किया गया है वो प्रत्येक मेंबर से कन्वेयंस डीड कराने के 25 से 30 हजार रुपये वसूलता है। इतनी मोटी रकम के बारे में मेंबरों से कहता कि इसमें और भी खर्च शामिल हैं जो कि तहसील, एआर कार्यालय और सोसायटी में बांटे जाते हैं। एक मात्र वकील होने की वजह से मेंबरों को न चाहते हुए भी वह राशि देनी पड़ती है। सैनिक विहार की कन्वेयंस डीड कराने के लिए एक ही वकील का एकाधिकार होने के कारण सदस्यों को काफी दिक्कतें हो रहीं थीं। संदर्भवश सुधी पाठक समझ लें कि यह कन्वेयंस डीड करीब दस पेज का बना बनाया एक प्रोफॉर्मा कंप्यूटर में फीड होता है जिसमें केवल मेंबर का नाम, अता पता आदि भरना होता है। इस काम में तीन मिनट से अधिक नहीं लगते। यदि कोई व्यक्ति यह काम किसी अन्य वकील से करा ले तो सोसायटी का कोई आदमी फोटो खिंचवाने व दस्तखत करने के लिए हाजिर नहीं होता। वह केवल तब ही आता है जब उनके अधिकृत वकील से यह काम कराया जाए। पालीवाल के एकाधिकार से परेशान सैनिक विहार के कुछ मेंबर सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय गए और उन्होंने अपनी समस्या रखी। इस पर 21 जनवरी 2025 को एआर महोदय ने तीन और वकीलों को कन्वेयंस डीड के दस्तावेज तैयार करवाने के लिए अधिकृत कर दिया था। इससे मेंबरों ने राहत महसूस की। इसी बीच कन्वेयंस डीड इसलिए बंद हो गई कि सर्किल रेट का मसला खड़ा हो गया था, और जब यह मसला हल हुआ तो 21 अगस्त 2025 को अचानक एआर ने तीनों वकीलों को हटा दिया।
सवाल यह है कि कौन से कारण थे कि एआर महोदय को इन तीनों अधिवक्ताओं को हटाना पड़ा, क्या उन तीनों अधिवक्ताओं की कोई शिकायत आई थी, या उनके काम में कोई कमी पाई गई थी जिसके कारण उन्हें हटाना पड़ा। बीते रविवार यानी 21 सितंबर को कुछ मेंबरों को पूर्व प्रधान राकेश धुन्ना और एडवोकेट पालीवाल ने टेलीफोन करके सेक्टर 88 सैनिक विहार में बैठक के नाम पर बुलाया। यहां मेंबरों केा बताया गया कि आज कुछ लोगों को कन्वेयंस डीड दी जाएंगी। जो कन्वेयंस डीड तहसील कार्यालय सेक्टर 12 से मेंबरों को लेनी थी वह अनैतिक रूप से राकेश धुन्ना ने मीडिया के सामने मेंबरों को दीं और सभी मेंबरों से अपील की कि राजेंद्रा पालीवाल से ही अपनी कन्वेयंस डीड कराएं। इससे लगता है कि राकेश धुन्ना को भी इस मोटी कमाई की अच्छी खासी हिस्सापत्ती मिल रही है, तभी तो वह यह अनैतिक कार्य कर रहा है।
लोगों का कहना है कि राकेश धुन्ना ने अपने वकील पालीवाल का प्रचार करने के लिए ही इस मीटिंग का आयोजन किया और मीडिया से कवरेज करवाई, हालांकि यह बात बाद में मेंबरों को समझ में आ गई। बैठक में मेंबरों को सर्किल रेट बढऩे का डर दिखा कर जल्दी से जल्दी कन्वेयंस डीड करवाने का दबाव डाला गया ताकि वे धुन्ना के चहेते अधिवक्ता से कन्वेयंस डीड कराने को मजबूर हों। 25 से 30 हजार की दर से यह रकम 702 फ्लैटों के मालिकों से वसूली जानी है। यह रकम 1 करोड़ 75 लाख से 2 करोड़ दस लाख के बीच बनती है। जाहिर है कि पालीवाल इतनी बड़ी रकम खुद नहीं डकार सकता। इस लूट का बटवारा जो खुद पालीवाल दबी जबान से लोगों को बताता है वह यह है, आठ हजार रुपये तहसील, पांच हजार रुपये धुन्ना और तीन से पांच हजार रुपये एआर कार्यालय में बंटते है। अब यह कितना सच है यह देने वाला पालीवाल जाने और लेने वाले लेकिन सात सौ से अधिक मेंबरों से डीड के नाम पर पच्चीस-तीस हजार रुपये वसूली का खेल जारी रहना शहर के नेताओं से छिपा हुआ नहीं रह सकता। यद्यपि इस बात का कोई खुलासा नहीं हो सका कि सत्तारूढ़ दल के किस किस नेता ने कितना कितना माल इस लूट में से मारा है क्योंकि उनकी मर्जी के खिलाफ लूट मचाने की औकात न तो एआर कादियान की है न धुन्ना की और न ही तहसील स्टाफ की।