मोटे कमीशन की टोह में रुका है ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का काम

मोटे कमीशन की टोह में रुका है ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का काम
October 26 16:00 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिनांक 27 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी चिर-परिचित नौटंकीबाज शैली में देश भर के कई स्थानों पर शिलान्यासों व उद्घाटनों की झड़ी लगाई थी। उनकी इस नौटंकी में डिजिटल क्रांति का बड़ा योगदान रहा। इसके चलते उन्होंने दिल्ली में बैठे-बैठे ही टकाटक, टकाटक बटन दबाए और सारे काम हो गए।

इन्हीं में से एक काम $फरीदाबाद के एनएच तीन स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के परिसर में 500 बिस्तरों का एक सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल की बिल्डिंग का शिलान्यास था। इसके लिए दो बेसमेंट सहित दस मंजिला भवन के लिए करीब 700 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट रखा गया था। इसी में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को ठहराने के लिए भी एक उचित व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया था। बीते इस एक वर्ष के प्रारम्भिक दिनों में मीटिंगों के कई दौर चले। भवन निर्माण करने वाली एक कम्पनी एचएससीसी तथा एक ओर वास्तुकार कम्पनी से भी वार्ताएं हुईं। कभी कमरों की लम्बाई-चौड़ाई तो कभी वार्डों के गुणा-भाग पर बहसें होती रहीं। पूछताछ करने पर यही बताया जाता कि बस अब काम शुरू होने वाला ही है।

कॉर्पोरेशन की भीतरी जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार निर्माण-कार्य का ठेका कमीशन की मात्रा को लेकर अटका हुआ है। केन्द्रीय श्रममंत्री मनसुख मांडविया द्वारा निर्माण कम्पनी से 20 प्रतिशत कमीशन की मांग बताई जाती है। जब एचएससीसी ने इसमें असमर्थता जताई तो मंत्री ने यूपी निर्माण निगम तथा ऐसी ही अन्य दो-चार कम्पनियों से बात की तो उनका भी यही जवाब था। दरअसल इतना बड़ा काम किसी निजी कम्पनी को दे पाना मंत्री के अधिकार में नहीं है। नियमानुसार इस तरह के ठेके सरकारी कम्पनियों को ही दिए जा सकते हैं और ऐसी कोई भी कम्पनी 10 प्रतिशत से अधिक कमीशन देने की स्थिति में होती नहीं है।

प्रचलित परम्परा के अनुसार एक हजार करोड़ रुपये के ठेके में जब 100 करोड़ का अग्रिम भुगतान ठेकेदार को किया जाता है तो वही सारे-का-सारा मंत्री-संत्री इत्यादि यूं का यूं हड़प कर ठेकेदार को काम शुरू करने को इस वायदे के साथ कहा जाता है कि वह ज्यों-ज्यों काम करता जाएगा उसे तुर्त-फुर्त पेमेंट होती जाएगी। अब न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। यानी 20 प्रतिशत देने वाली कोई कम्पनी मंत्री मांडविया को मिलने वाली नहीं और बिल्डिंग बनेगी नहीं। वैसे भी जिस रफ्तार से इस संस्थान को बर्बाद किया जा रहा है, सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट बंद किया जा रहा है, उसे देखते हुए कुछ दिनों बाद मौजूदा अस्पताल के बेड ही खाली रहने लगेंगे। जैसे कि बसई दारापुर के 600 में से 300 बेड खाली ही रहते हैं। जाहिर है कि ऐसे में नई बिल्डिंग बनाने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी।
अस्पताल के अलावा छात्रों के लिए बने हॉस्टल भी अब कम पडऩे लगे हैं। मौजूदा हॉस्टल एमबीबीएस की 100 सीटों के लिए बनाया गया था जो अब बढ़ कर 150 हो चुकी हैं तथा 400 के करीब पीजी छात्र भी यहां अध्ययन व कार्यरत हैं। इस हिसाब से यहां कम से कम 600 छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी है। इसके लिए संस्थान को दूर-दराज किराए पर बिल्डिंग लेनी पड़ती है और वहां से छात्रों को लाने व ले जाने के लिए बसों का इंतजाम भी करना पड़ता है। इस सब पर कॉर्पोरेशन जितना खर्च कर चुका है उतने में तो नए हॉस्टलों का निर्माण किया जा सकता है। मजे की बात तो यह है कि कॉर्पोरेशन के पास न तो जगह की कोई कमी है और न ही पैसे की। कमी है तो केवल उस निर्माण कम्पनी की जो मंत्री व अन्य अधिकारियों को 20 प्रतिशत कमीशन दे सके।

वैसे रिश्वत और कमीशन के लेेनदेन में कोई रसीद तो चलती नहीं है, न देने वाला कभी बताता है और न लेने वाला बताता है कि क्या लेनदेन हुआ। इस मामले में भी यद्यपि कोई ऐसे सबूत सामने नहीं है फिर भी हालात यही बता रहे हैं कि मामला कहां अटका हुआ है। वैसे आज के जमाने में जब कमीशन के रेट चालीस परसेंट तक पहुंच गए हों तो बेचारा मांडविया अगर बीस परसेंट की मांग कर रहा है तो क्या गुनाह है।

कॉर्पोरेशन के डीजी के पास मज़दूरों के लिए समय नहीं
कॉमरेड बेचू गिरि ने $फरीदाबाद ट्रेड यूनियन काऊंसिल की ओर से डीजी एके सिंह को ईमेल करके मुलाकात का समय मांगा था। इसके लिए उन्होंने डीजी के पीए से फोन पर भी बात करके समय लेने का प्रयास किया। पीए ने कहा कि उसने तो उनका ईमेल साहब के सामने प्रस्तुत कर दिया था। अब उनकी जब मर्जी होगी वे बुलाएंगे या नहीं, इस बाबत वह कुछ नहीं कह सकते। डीजी को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह कोई बादशाह नहीं है, वह मज़दूरों के पैसे पर पलने वाला एक जनसेवक मात्र है। उससे मिलने के अनेकों तरीके मज़दूरों को आते हैं। उसके विरुद्ध न केवल फरीदाबाद में बल्कि मुख्यालय के बाहर भारी प्रदर्शन करके उसका पुतला भी फूूका जा सकता है। यदि इससे भी काम न चला तो केन्द्रीय श्रम मंत्री मांडविया के विरुद्ध भी प्रदर्शन किया जा सकता है।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles