सड़क निर्माण में अक्षम एफएमडीए अब एनएचपीसी अंडरपास का जलभराव रोकेगा

सड़क निर्माण में अक्षम एफएमडीए अब एनएचपीसी अंडरपास का जलभराव रोकेगा
October 13 15:57 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास और एनएचपीसी अंडरपास में जलभराव रोकने में नगर निगम के नाकाम होने पर डीसी विक्रम सिंह ने यह काम फरीदाबाद मेट्रोपोलिटन डेवलपमेट अथॉरिटी (एफएमडीए) को सौंपने का निर्णय लिया है। जिस एफएमडीए ने महज डेढ़ किलोमीटर की वीआईपी सड़क डीसी से आए दिन डांट खाने डेढ़ साल में रो पीट कर बनाई, वह भी तीन-चार महीनों में ही उखडऩे लगी, वही एफएमडीए एनएचपीसी अंडरपास के नाम पर फिर करोड़ों रुपयों की बंदरबांट करेगा, यह उसकी ‘दक्षता’ देख कर ही समझा जा सकता है।

मॉनसून शहर से विदा हो चुका है लेकिन एनएचपीसी अंडरपास में आज भी पानी भरा हुआ है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह पानी बरसात का नहीं बल्कि सीवर ओवरफ्लो का गंदा पानी है। नगर निगम के निकम्मे अधिकारी एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद यहां जलभराव खत्म नहीं कर सके। अब डीसी विक्रम सिंह ने यह काम एफएमडीए को सौंपने का निर्णय लिया है। एफएमडीए इस समस्या का जड़ से समाधान करने के लिए अपने उन भ्रष्ट और निकम्मे इंजीनियरों से अध्ययन करवाएगा जो हूडा, नगर निगम, स्मार्ट सिटी आदि से लूट कमाई करने के बाद फ़ारिग होकर आए हैं।

बताया जा रहा है कि एफएमडीए के इन अयोग्य इंजीनियरों की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है। ये टीम पहले ये पता लगाएगी कि अंडरपास में जो पानी भर रहा है वह किस डिस्पोजल से आ रहा है, उस डिस्पोजल की लाइन चोक तो नहीं हैं। यह जानकारी एमसीएफ के अधिकारी तो दूर कोई भी स्थानीय निवासी दे सकता है। इस काम के लिए टीम गठित करना बताता है कि एफएमडीए अधिकारी भी मोदी-खट्टर-सैनी की तर्ज पर काम नहीं काम का ढिंढोरा पीट कर लूट कमाई में कितना विश्वास करते हैं।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि ग्रीन फील्ड कॉलोनी निजी डेवलपर की होने के कारण यह नगर निगम को हैंडओवर नहीं की गई है, यहां की सीवर-पानी और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। यानी इस इलाके का अधिकतर सीवेज, आदि निकासी व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहता है। यह समस्या एफएमडीए ही नहीं विकास से संबंधित प्रत्येक अधिकारी की जानकारी में है, यही कारण है कि एनएचपीसी अंडरपास में जलभराव की समस्या बनी रहती है। अब एफएमडीए के खाऊ अधिकारी सर्वे कर करोड़ों रुपये का बजट बनाएंगे।

ग्रीन फील्ड और आसपास के सेक्टर ऊंचे होने के कारण वहां से पानी बहकर तो एनएचपीसी अंडरपास में ही जमा होता है। यहां सामान्य दिनों में सीवर का पानी इक_ा रहता है तो समझा जा सकता है कि बारिश के मौसम में इस अंडरपास से गुजरना कितना खतरनाक हो सकता है।

यदि प्रशासनिक अधिकारियों के दिमाग में गोबर न भरा हो तो इस अंडरपास को बमुश्किल सौ मीटर के फासले पर स्थित बुढिय़ा नाले से जोड़ा जा सकता है, जिस पर न करोड़ों न लाखों खर्च होंगे बल्कि चंद हज़ारों में ही इसे कनेक्ट किया जा सकता है, लेकिन अगर इतना सरल उपाय कर देंगे तो लूट कमाई कहां से होगी।

हालांकि रेलवे ने ओल्ड और एनएचपीसी अंडरपास को कवर करने का फैसला लिया है। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय के अनुसार दोनों अंडरपास को बारिश के पानी से होने वाले जलभराव से बचाने के लिए कवर किया जाएगा, इसके लिए रेलवे ने पांच करोड़ का बजट भी जारी किया है। कवर होने से बारिश का पानी तो रुक जाएगा लेकिन आसपास स्थित ऊंची जगहों से बहकर और रिसकर आने वाला पानी तो यहां इकट्ठा होता रहेगा। ओल्ड अंडरपास में सेक्टर 21, फतेहपुर चंदीला, ओल्ड चौक और रेलवे रोड से बहकर आने वाला पानी ही इकट्ठा होता है। कवर करने से अंडरपास की सड़क को आसमान से बरसने वाले पानी से बचाया जा सकता है लेकिन बहकर आने वाले पानी से नहीं।

इस अंडरपास में होने वाले जलभराव को रोकने के लिए पर्याप्त क्षमता वाला पंपिंग सिस्टम लगाने और वहां के पानी को दूर किसी नाले, एसटीपी या डिस्पोजल में डालने की फूलप्रूफ व्यवस्था किए जाने से समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। लेकिन ये आसान उपाय करने से अधिकारियों की जेबें गर्म नहीं होंगी इसलिए सर्वे का नाटक कर बड़ा प्रोजेक्ट बनाया जाएगा और फिर लूट बांट का खेल खेला जाएगा।

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Mazdoor Morcha
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