कोरोना के नाम पर मॉक ड्रिल की नौटंकी डीसी ने किया ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निरीक्षण

कोरोना के नाम पर मॉक ड्रिल की नौटंकी डीसी ने किया ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निरीक्षण
January 01 15:17 2023

फरीदाबाद (म.मो.) कोरोना की एक बड़ी लहर आने की आशंका के प्रति सरकारी संवेदनशीलता का प्रदर्शन करने के लिये देश भर के अस्पतालों की जांच-पड़ताल की जा रही है। इस सम्भावित बीमारी से निपटने के लिये मोदी सरकार तरह-तरह के कार्डों एवं बीमों के साथ अस्पतालों की क्षमता परखने का नाटक करवा रही है।

इसी नीति के तहत उपायुक्त विक्रम ने दिनांक 27 दिसम्बर को उस ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निरीक्षण किया जिसकी दक्षता एवं कार्यकुशलता भली-भांति परखी हुई है। बीती दो कोरोना लहरों का सबसे बेहतरीन मुकाबला किसी ने किया था तो वह यही अस्पताल है। जांच-पड़ताल करने की कहीं कोई आवश्यकता है तो वे हैं राज्य सरकार द्वारा संचालित अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल छांयसा, बीके अस्पताल तथा ईएसआई अस्पताल सेक्टर आठ। इन अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। बीती दोनों भयंकर लहरों के बावजूद इनकी स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।

एनएच तीन स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 800 बेड ऑक्सीजन पाइपलाइन से जुड़े हुए हैं। इनको ऑक्सीजन सप्लाई करने के लिये 10 हजार लीटर तरल ऑक्सीजन के भंडार के साथ-साथ 200 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का प्लांट भी बेहतरीन हालत में है। संदर्भवश सुधी पाठक जान लें कि प्लांट द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन की अपेक्षा भंडारण की गई तरल ऑक्सीजन कहीं ज्यादा बेहतरीन एवं उत्तम क्वालिटी की होती है। प्लांट द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन का इस्तेमाल केवल तभी किया जाता है जब तरल उपलब्ध न हो रही हो। कोरोना मरीजों के मामले में सबसे अधिक आवश्यकता इसी ऑक्सीजन की पड़ती है।

समझा जाता है कि इस अस्पताल का निरीक्षण करके डीसी विक्रम पूरी तरह से संतुष्ट एवं प्रसन्न हो गये। लेकिन लगे हाथ उन्हें यह भी समझ लेना चाहिये कि यह सरकारी अस्पताल नहीं है। इसमें न तो राज्य सरकार का और न ही केन्द्र सरकार का कोई पैसा लगा हुआ है। यह पूर्णतया मज़दूरों से वसूल गये पैसे से बना है और चलाया जा रहा है। इसके लिये उनके वेतन से प्रति माह चार प्रतिशत काट लिया जाता है। इस लिये डीसी साहब को इस मुगालते में कतई नहीं रहना चाहिये कि कोरोना महामारी के समय वे इसे अपने नियंत्रण में ठीक वैसे ही ले लेंगे जैसे कि बीती दो लहरों में ले लिया गया था। उस वक्त उन गरीब मज़दूरों के लिये इसे पूर्णतया बंद करके जिला प्रशासन ने कब्जा लिया था, जिनके पैसे से यह चल रहा है।

फिलहाल यहां साढे चार हजार मरीज ओपीडी में आते हैं और 800 से अधिक मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहते हैं। उस वक्त इनके लिये ओपीडी पूर्णतया बंद कर दी गई थी और भर्ती मरीजों को भगा दिया गया था। लेकिन इस बार तमाम मज़दूर संगठनों ने कड़ा निर्णय ले लिया है कि वे इस प्रशासनिक गुंडागर्दी को सहन करने वाले नहीं हैं। जिस दिन शासन-प्रशासन ने गत वर्षों वाली गुंडागर्दी दोहराने के लिये मजदूरों को अस्पताल से खदेडऩे का प्रयास किया तो वे इसे सहन नहीं करेंगे और जमकर प्रशासन को इसका जवाब देंगे।

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Mazdoor Morcha
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