डॉ. रामवीर
जो बोओगे वो काटोगे उक्ति है बहुत पुरानी अचरज होता बूढ़ों को भी पड़ती है समझानी।
जान बूझ कर जो समाज में फैलाते हैं घृणा घृणा की खेती करने से उगनी ही है घृणा।
खेल रहे हैं लोग शौक से आज घृणा का खेल प्यार की बातें करने वाले होते जा रहे फेल।
दुनिया में हथियारों का है बहुत बड़ा व्यापार किसको बेचें कहां खपाएं खोज रहे बाजार।
अगर विश्व में करने लगेंगे लोग परस्पर प्यार तो संकट में पड़ सकता है हथियारों का व्यापार।
घातक अस्त्रों के निर्माता रचते ऐसा खेल जिससे निरन्तर बढ़ती जाए हथियारों की सेल।
वे चिन्तित रहते हैं कदाचित् घट न जाए मांग इसी लिए रहते हैं पिलाते घोल घृणा की भांग।
भिन्न भिन्न देशों के पुराने सारे सीमा विवाद अस्त्र शस्त्र विक्रेता इनको देते रहते खाद।
अगर विश्व में शान्ति रही तो