फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) इन्दौर नगर निगम द्वारा वहां की जनता को जहरीला पानी पिलाए जाने से हुई 18 मौतों तथा हजारों के बीमार होने से स्थानीय नगर निगम कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिखता। नगर निगम की लचर कार्यशैली को इसी बात से समझा जा सकता है कि छ: जनवरी को पर्वतीया कॉलोनी को पानी सप्लाई करने वाले बूस्टर के खुले होल में कुत्ते के तीन पिल्ले गिर कर मर गए। यह तो इत्तेफाक ही था कि कुछ स्थानीय लोगों के उन्हें गिरते देख लिया था और उन्हें निकालने का प्रयास असफल होने पर निगम को सूचित किया गया। जब निगमकर्मियों के प्रयास भी सफल न हो पाए तो जेसीबी मशीन द्वारा बूस्टर के कुछ भाग को तोड़ कर मरे हुए पिल्लों को बाहर निकाला गया। बेशक इस कार्रवाई में पानी सप्लाई की एक पाइप लाइन टूट गई जिसे बाद में ठीक कर दिया गया। प्रश्न यह पैदा होता है कि वह होल खुला हुआ ही क्यों था जिसमें ये पिल्ले गिर कर मर गए। यदि स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना निगम को देकर मरे हुए पिल्लों को निकलवाया न होता तो जाहिर है वे बूस्टर में ही सड़ते-गलते रहते और वही पानी जनता को सप्लाई होता रहता। इस प्रकार दूषित होने वाले पेय जल से जनता पर क्या-क्या दुष्प्रभाव पड़ते, इसकी किसी को कोई चिन्ता नहीं। लोग बीमार होते या मर जाते तो अफसरों व नेताओं की सेहत पर कोई फर्क पडऩे वाला नहीं था। ज्यादा हल्ला-गुल्ला होता तो पीडि़तों को कुछ मुआवला आदि देकर शांत कर दिया जाता।