भाजपा का लूट विकास मॉडल : बनाओ, तोड़ो, बनाओ और कमाओ

भाजपा का लूट विकास मॉडल : बनाओ, तोड़ो, बनाओ और कमाओ
August 04 05:21 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी-खट्टर-सैनी की ट्रिपल इंजन सरकारों में नेता-नौकरशाहों ने अपनी जेबें भरने के लिए विकास का गुजराती मॉडल अपना लिया है। इस मॉडल में बहुत मोटा खर्च कर घटिया विकास कराया जाता है और चंद महीनों में ही इसे तोड़कर दोबारा उतना ही खर्च किया जाता है। यह काम शहर में भाजपा विधायक-पार्षद के इशारों पर नगर निगम-एफएमडीए के अधिकारी धड़ल्ले से कर रहे हैं। तीसरी बार भाजपा सरकार आते ही तोडऩे बनाने के नाम पर कमीशनखोरी का काम सबसे पहले भ्रष्टाचारी अदलखा ने शुरू किया। एनएच 2 पंचकुंइया रोड पर निर्माणाधीन पुलिया के बनते ही उसे दोबारा तुड़वा कर आठ दस लाख का अतिरिक्त खर्च बना कर पैसे की बंदरबांट हुई। अभी आठ महीने भी नहीं बीते हैं कि इसे दोबारा तुड़वा कर बनवाया गया। बताया जा रहा है कि इस बार भी दस लाख का बजट बनाया गया। विधायक अदलखा की देखादेखी वार्ड नंबर 13 के पार्षद हरि कृष्ण गिरोटी ने भी लूट कमाई के लिए एनआईटी दो ई ब्लॉक में ईएसआई डिस्पेंसरी से लेकर मुख्य सड़क तक अच्छी भली आरएमसी रोड खुदवा डाली। बिना वजह सड़क तुड़वा कर मलबा हजम किए जाने से स्थानीय नागरिकों में चाय की पियाली में तूफान की तरह गुस्सा तो आया लेकिन कथित देशभक्त पार्टी के पार्षद का विरोध करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा सका।

करीब एक महीने खुदी रहने के बाद बीते दिनों फिर से इसे आरएमसी से बनाया गया। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि अगर यही करना था तो सड़क तुड़वाई ही क्यों थी। अलबत्ता एक नुकसान यह हो गया कि मुख्य सड़क का नाला जाम होने के कारण पानी अब पुलिया के ऊपर से बह रहा है, सड़क टूटने और बनने से पहले कोई समस्या नहीं थी। इस सड़क के टूटने और बनने में करीब दस लाख रुपये का खर्चा बताया जा रहा है। इसी तरह डेढ़ महीने पहले ही बनाई गई सेक्टर 12-15ए की विभाजक सड़क पहली बारिश में ही उखडऩे लगी है। फायर ब्रिगेड स्टेशन से लेकर ट्रैक्टर कारखाने तक सड़क की रोडिय़ां उखड़ कर बाहर आ चुकी हैं। रोडिय़ां तब उखड़ रही हैं जब इसे मजबूत बनाने के लिए तारकोल की दोहरी परत डालने के दावे के आधार पर बिलिंग की गई है। डेढ़ महीने में ये हालात है कि सड़क की गिट्टियों के ढेर में फंस कर दो पहिया वाहन चालक चुटहिल हो रहे हैं। चार पहिया वाहन भी सहजता से नहीं निकल पाते।

एफएमडीए के निकम्मे अधिकारी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसी का बचाव करते नजर आते हैं, करें भी क्यों न माल जो खा रखा है। एक्सईएन केएस पठानिया का कहना है कि मार्ग के किनारे बारिश का पानी जमा होने के कारण सड़क टूट गई, इसे ठीक करवाया जा रहा है। सवाल यह है कि पानी निकासी का प्रबंध पहले क्यों नहीं करवाया। पानी रहेगा तो बार बार टूटेगी, टूटेगी तो हर बार बनाने का टेंडर जारी किया जाएगा। जितनी बार बनेगी उतनी बार कमीशन मिलेगा। इस सड़क की गुणवत्ता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पहली ही बारिश में तारकोल और गिट्टियां अलग हो गए तो यह कितना लंबा टिकेगी। हार्डवेयर चौक के गोलचक्कर की बीते साल ही 36 लाख रुपये खर्च कर रबड़ कारपेटिंग की गई थी, तब एफएमडीए ने बड़े बड़े दावे किए थे कि दस साल तक चौक की फुर्सत हो गई। मज़दूर मोर्चा ने निर्माण के दौरान ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की बात लिखते हुए बता दिया था कि 36 लाख की यह सड़क 36 महीने भी नहीं चल पाएगी। दूसरी बरसात में ही इसमें बड़े बड़े गहरे गड्ढे हो चुके हैं।

ये चंद उदाहरण हैं, शहर में जनता की गाढ़ी कमाई इसी तरह लूटने-बांटने के अनेक प्रोजेक्ट चल रहे हैं इनमें स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट्स का नाम सबसे ऊपर है। स्मार्ट शौचालय बनाने के लिए एक बार जनता के दो करोड़ बर्बाद किए जा चुके हैं अब फिर से स्मार्ट शौचालय बनाने का प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। दरअसल, इन नेताओं और उनके इशारों पर नाचने वाले अधिकारियों को यह अच्छी तरह पता चल गया है कि चाहे जो मर्जी करो अंधभक्ति के नशे में डूबी जनता सवाल नहीं करेगी। एनआईटी दो ई की अच्छी भली सड़क पार्षद के इशारे पर उखाड़ दी गई लेकिन किसी ने चू्ं तक नहीं की। इसी तरह एनएच दो की पंचकुईया रोड पुलिया विधायक अदलखा जब देखो तब उखड़वा कर फिर से बनवा कर जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर रहा है लेकिन सवाल पूछे जाने की हिम्मत किसी में भी नहीं है। एक ही थाली के चट्टे बट्टे की तर्ज पर कांग्रेस, इनेलो के नेता भी चुप्पी साधे हैं मानो कह रहे हों कि हमारी सत्ता आएगी तो हमें भी इसी तरह करके जेबें भरनी हैं।

दरअसल, लूट वाले विकास का यह मॉडल केंद्र की मोदी सरकार से निकल कर राज्यों तक पहुंचा है। गुजरात मॉडल का नमूना 9 जुलाई को वडोदरा में पुल टूटने के रूप में एक बार फिर सामने आया। इससे पहले अक्तूबर 2022 में मोरबी का पुल टूटा था जिसमें 141 लोगों की मौत हुई थी। राजस्थान में 1100 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुआ हाईवे उद्घाटन से पहले ही झुंझनू के उदयपुर बावली के पास पहली बारिश में बह गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 15 मई 2018 को नवनिर्मित पुल टूट कर गिरा, इसमें 18 लोगों की मौत हुई। बिहार में तो इस साल 18 जून से तीन जुलाई के बीच 18 पुल टूटे। इन सब घटनाओं में जांच तो बैठाई गई लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई करना तो दूर किसी को दोषी ठहराने तक की जरूरत महसूस नहीं की गई। हां, इतना जरूर हुआ कि प्रोजेक्ट को दोबारा बनाने के लिए फिर से करोड़ों का बजट पास कर दिया गया।

पुल या सड़क टूटने का बड़ा स्पष्ट कारण है कि हर विकास कार्य में नेता जी को हिस्सापत्ती चाहिए। अब, नेताजी की हिस्सापत्ती होगी तो अधिकारी भी कहां पीछे रहने वाले हैं, जानकारों की मानें तो अब कमीशन के शिष्टाचार में ही कम से कम चालीस प्रतिशत बजट खत्म हो जाता है, यदि नेताजी का मूड हुआ तो कमीशन साठ फीसदी तक पहुंच सकता है। इतना मोटा कमीशन देकर कौन ठेकेदार ईमानदारी से काम करेगा, तो ठेकेदार भी मोटी कमाई के लिए कॉस्ट कटिंग, घटिया सामग्री लगाकर कागजी निर्माण खड़ा कर देता है। इस घटिया निर्माण का खामियाजा भुगतती है आम जनता।
जनता तब तक यह सब भुगतती रहेगी जब तक वह इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाएगी। लेकिन उसके लिए यह आसान नहीं रह गया है क्योंकि सरकार, उसका आईटी सेल, गोदी मीडिया, पुलिस-प्रशासन और यहां तक कि न्यायपालिका भी भ्रष्टाचार के पोषकों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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