फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भूमाफिया, राजनेता और प्रॉपर्टी डीलरों से मिलीभगत कर लूट कमाई के लिए शहर को बर्बाद करने वाला नगर निगम का भ्रष्टाचारी चीफ टाउन प्लानर सतीश पाराशर तीस जून को सेवानिवृत्त होने वाला है। लगता है भ्रष्टाचार और लूट कमाई की उसकी भूख अभी शांत नहीं हुई है इसीलिए एक्सटेंशन पाने के लिए राजनेताओं से लेकर पंचकूला मुख्यालय तक चक्कर लगा रहा है। वह मोटा पैसा भी खर्च करने को तैयार है, बस सरकार किसी कीमत पर उसकी एक्सेंटशन कर दे।
नगर निगम के हरामखोर और भ्रष्टतम अधिकारियों में से एक सतीश पाराशर ने प्लानिंग ब्रांच में रहते हुए भूमाफिया और प्रॉपर्टी डीलर से मिलीभगत कर अरावली को बर्बाद कर दिया। आज अरावली में जो अवैध निर्माण, मैरेज हॉल, फार्म हाउस, बैंकट हॉल तोड़े जा रहे हैं उन्हें अनुमति देने वाला यही सतीश पाराशर है। पीएलपीए संरक्षित अरावली जिसमें गैर वानिकी गतिविधि किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती, वहां फार्म हाउस, आदि बनाने के लिए सशर्त अनुमति यानी लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) देने का खेल सतीश पाराशर ने ही शुरू किया था, बेशकीमती जमीन कौडिय़ों के दाम दिलाने के एवज में पाराशर ने भूमाफिया-प्रापर्टी डीलरों से करोड़ों रुपये कमाए। कमाई की भूख इतनी कि उसने खुद भी अरावली में अवैध कब्जा कर अपना फार्म हाउस बना डाला था, हालांकि वर्तमान में चल रही कार्रवाई में इसे भी गिरा दिया गया है।
अरावली ही नहीं रिहाशयी प्लॉटों को व्यावसायिक में तब्दील करने का खेल भी पाराशर ने खूब खेला, पूरे एनआईटी के रिहाशयी इलाकों में जमकर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान उसकी ही कृपा से बन पाए। मोटा पैसा लेकर अधूरे निर्माण का ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने से लेकर लैंड कन्वर्जन कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहता है। 2013 में ओल्ड नगर निगम में संयुक्त आयुक्त पद पर रहने के दौरान उसने बसेलवा कॉलोनी में हितेंद्र नाम के युवक को डेयरी के लिए अलॉट प्लाट का फर्जी जीपीए लगाकर मातहत महिला कर्मचारी सुनीता डागर के नाम ट्रांसफर कर दिया था। इस मामले में ओल्ड थाने में सतीश पराराशर के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
जनवरी 2014 में बतौर सीनियर टाउन प्लानर उसने बिना किसी दस्तावेज के ही हार्डवेयर कंपनी की जमीन के नौ सीएलयू किए थे। जांच में पाया गया था कि सीएलयू के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे रजिस्ट्री की प्रति, प्लॉट का रकबा व चौहद्दी निर्धारण और सबसे प्रमुख सीएलयू के लिए तहसीलदार का अनुमोदन पत्र कुछ भी नहीं लगाया गया था। विजिलेंस जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ अगस्त 2019 में केस दर्ज कराया गया था। इस मामले की जांच जारी है।
भ्रष्टाचार का भेद खुलने पर खट्टर सरकार ने उसे 2018 में निलंबित कर चंडीगढ़ मुख्यालय अटैच कर दिया था लेकिन अकूत लूट कमाई के कुछ टुकड़े ऊपर वालों के सामने फेक कर उसने गुडग़ांव नगर निगम में सीनियर टाउन प्लानर का पद हासिल कर लिया था। यही नहीं उसने आला अधिकारियों को खुश कर सितंबर 2019 में चीफ टाउन प्लानर पद और फरीदाबाद में तैनाती भी हासिल कर ली थी। उसकी पदोन्नति विवादों से घिरी हुई थी, सीएम खट्टर पर आरोप लगा था कि चुनाव संहिता लागू होने के बावजूद बैक डेट में प्रमोशन दिया गया। भ्रष्ट नेताओं ने दिसंबर 2023 को उसे फिर से फरीदाबाद निगम में चीफ टाउन प्लानर का अतिरिक्त प्रभार दिला दिया था।
पद संभालने के बाद सतीश ने प्लानिंग ब्रांच में एचकेआरएन यानी ठेके पर लगे कर्मचारी बिंटू को लूट कमाई का मोहरा बनाया। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि बिंटू भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा का मुंहलगा और खास था। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक सतीश पाराशर की देखरेख में बिंटू शहर में अवैध निर्माण करने वालों से मोटी मोटी डील करता रहा है। एनआईटी एक, दो, तीन के रिहायशी इलाकों में खाली पड़े प्लॉटों को मोटी रकम लेकर लैंड कन्वर्जन कराने की कवायद आज भी जारी है।
इतनी मोटी कमाई वाली सीट से विदा होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन सतीश इसका मोह त्याग नहीं पा रहा है। एक्सटेंशन पाने के लिए भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा से लेकर अन्य मंत्री नेताओं के चक्कर काट रहा है, बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ मुख्यालय में मोटा नजराना लेकर एक्सटेंशन देने वाले अधिकारियों को भी साधने की कोशिश कर रहा है। समझने वाली बात है पद पर रहते हुए जिस पाराशर ने शहर के नगर विन्यास को तबाह कर डाला, एक्सटेंशन के बाद तो उसकी जिम्मेदारी भी खत्म हो जाएगी, यानी राजनेता, भूमाफिया, प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिल कर शहर की जमीनों का मनचाहा इस्तेमाल करने का नंगा नाच करने को वह स्वतंत्र होगा।