सत्यवीर सिंह अडानी लूट साम्राज्य तेज़ी से फैलता जा रहा है, परिणामस्वरूप उसे ढकने वाला पर्दा छोटा पड़ता जा रहा है. फासिस्ट मोदी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद, अंदर का मवाद बाहर रिसने से रुक नहीं पा रहा. मंहगाई, बेरोजग़ारी और अपर्याप्त आय से कराहते, 130 करोड़ लोगों की नफऱत और गुस्सा, लगातार सड़ते पूंजीवाद और उसके आज के सबसे भरोसेमंद ताबेदार, फासिस्ट मोदी निज़ाम पर उबल पडऩा चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. अग्निशमन की यह कार्यवाही मुख्य रूप से दो तरह से हो रही है.
बिना कोई वक़्त गंवाए, अग्निशमन की पहली गाड़ी लेकर, सबसे पहले राहुल गांधी कूद पड़ता है. लगता है, मानो वह अडानी और मोदी दोनों को जेल पहुंचाकर ही मानेगा. लेकिन जैसे ही तफ्शील सामने आती है, उसकी कांग्रेस में मौजूद, अडानी-भक्तों के नाम सामने आ जाते हैं. कांग्रेस की एक भी राज्य सरकार ने ऐसा एक भी संकेत नहीं दिया कि वे अडानी-लूट पर किसी भी कि़स्म की पाबंदी लगाएंगे. छत्तीसगढ़ और राजस्थान की राज्य सरकारें, अडानी की सबसे प्रिय सरकारें रही हैं, और भूपेश बघेल और अशोक गहलोत, राहुल गांधी के सबसे प्रिय कांग्रेसी नेता हैं. अडानी लूट साम्राज्य से पूंजीवादी मवाद रिसने के एक हफ्ते बाद ही लोगों का आधा गुस्सा और नफऱत रफू चक्कर हो जाते हैं.
इसके साथ ही अग्निशमन की अनेक गाडिय़ाँ,अख़बारों के दफ़्तरों से निकल पड़ती हैं. उनकी जि़म्मेदारी होती है; अडानी लूट तंत्र को, जो कि आज के सड़ते, फफूंदी लगे,बदबू मारते पूंजीवाद की एक बानगी मात्र है, ‘क्रोनि कैपिटलिज्म’ बताकर, लोगों के गुस्से से पूंजीवाद की जान बचाना. बुर्जुआ अख़बार अपने आक़ाओं की सेवा करते हैं, कोई हैरानी की बात नहीं, लेकिन क्रांतिकारी कम्युनिस्ट आंदोलन के भी अनेक संगठन, ‘क्रोनि कैपिटलिज्म’ और ‘हेल्दी कैपिटलिज्म’ में भेद कर, अंजाने में, लोगों के मौजूदा व्यवस्था के खि़लाफ़ उठ रहे जन-आक्रोश के उफ़ान को पंक्चर करने का काम कर रहे हैं.
सारे का सारा पूंजीवाद ही सड़ चुका है, सारे का सारा ही ‘क्रोनि’ हो चुका है. राहुल गाँधी आएगा और पूंजीवाद से सारे ‘क्रोनि’ हट जाएँगे और शुद्ध ‘वाइब्रेंट’ पूंजीवादी अवतरित हो जाएंगे, ऐसे मुन्गेरीलाली ख़्वाबों से आज़ाद हो जाने की ज़रूरत है. सब जगह के उद्योगपति अडानियों का ही छोटा स्वरूप ही हैं. कई तो उससे भी ख़तरनाक हैं. फऱीदाबाद के चोपड़ा, गुलाटी, लखानी, वमानी; अडानी से किसी रूप में भिन्न नहीं हैं.
मरीज़ में अब शल्य चिकित्सा की कोई गुंजाईश ही नहीं बची, जितनी जल्दी संभव हो उसे दफऩाकर कष्टों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए.