ओल्ड फरीदाबाद चौक से बाइपास को जोडऩे वाली करीब दो किलोमीटर लम्बी सड़क, जिसके एक ओर सेक्टर 17 व दूसरी ओर सेक्टर 18 है, बनते-बनते टूटने लगी है। इस अच्छी-भली सड़क को स्मार्ट बनाने के नाम पर स्मार्ट सिटी कम्पनी लिमिटेड ने करीब ढाई साल पहले अपने हाथ में लिया था। आवागमन करने वालों की मुसीबत बढ़ाते हुए इसे खोद कर छोड़ दिया गया। पानी की निकासी के लिये इसके दोनों तरफ गहरी नालियां भी बनाई गई हैं जिनसे एक बूंद भी बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पाई।
सीमेंट कंक्रीट की बनी इस सड़क का अभी निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हो पाया कि इसमें खड्डे पडऩे शुरू हो चुके हैं। सेक्टर 17 की ओर से ओल्ड चौक तक जाने वाली सड़क, चौक से करीब 200 मीटर पहले इस कदर टूट चुकी है व खड्डे पड़ चुके हैं कि उस हिस्से को बैरीकेड लगाकर रोक दिया गया है। बीते चार दिनों से इसकी मरम्मत के नाम पर नौटंकी की जा रही है। बैरीकेड लगने से आवागमन तो दुभर होना ही था, लेकिन ट्रेफीक पुलिस की काहिली ने इसे और भी बड़ी मुसीबत बनने को छोड़ दिया।
सोमवार दिनांक 27 की शाम साढे छ: बजे इस संवाददाता ने अग्रसेन चौक से ओल्ड चौक तक के पौना किलोमीटर लम्बे रास्ते को तय करने में करीब 40 मिनट लगाये। स्थिति यह थी कि अग्रसेन चौक से भी वाहन रेंग-रेंग कर चल रहे थे। ऐसे भी चलते रहते तो भी 15 मिनट में यह सफर तय हो जाता। लेकिन बीच-बीच में यातायात रेंगना भी रुक जाता था क्योंकि बैरीकेड के पास पहुंचने पर उसे दूसरी सड़क पर डायवर्ट होना पड़ता था। वहां इसे नियंत्रित करने के लिये किसी पुलिस वाले के न होने से यातायात फंस कर खड़ा हो जाता था।
अभी तक यह सड़क 18 व 17 सेक्टर तक ही पहुंच पाई है। इसके दोनों ओर जिस बेहूदा ढंग से नाले खोद कर छोड़ दिये गये हैं, वे राहगीरों के लिये मुसीबत बने हुए हैं। सेक्टर 18 में एक मैकेनिक की दुकान के सामने भी इस नव-निर्मित सड़क का एक हिस्सा बुरी तरह से टूट चुका है। समझने वाली बात यह है कि जो सड़क बनते-बनते ही टूट कर बिखरी जा रही है, उसका आगामी साल दो साल में क्या हाल होगा? आज तो बनाने वाला ठेकेदार यहां मौजूद है लेकिन जब वह पेमेंट लेकर चला जायेगा तब इसे कौन सम्भालेगा? कोई दिक्कत नहीं, फिर से नये टेंडर जारी होंगे, बिल बनेंगे व पास होंगे, फिर से मोटा कमीशन मिलेगा। जाहिर है कि सड़कें बनती रहें, टूटती रहें बिल बनते रहें और कमीशनखोरी का धंधा चलता रहेगा।