ईएसआईसी प्रबंधन के खिलाफ नर्सिंग स्टाफ का गुस्सा फूटा, होगा विरोध प्रदर्शन

ईएसआईसी प्रबंधन के खिलाफ नर्सिंग स्टाफ का गुस्सा फूटा, होगा विरोध प्रदर्शन
February 16 17:34 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ईएसआईसी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ की स्थानांतरण संबंधी मांगों को दरकिनार कर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा बनाई गई नई इंटर रीजन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध शुरू हो गया है। ऑल इंडिया ईएसआईसी नर्सिंग ऑफिसर्स फेडरेशन ने कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर जनरल को चार सूत्री मांग पत्र भेजा है। मांगें नहीं माने जाने पर 21 फरवरी पर काला दिवस मनाया जाएगा और 26 फरवरी से सभी ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों में, डिस्पेंसरी कम ब्रांच ऑफिस (डीसीओबी) में मांगे मानी जाने तक अनिश्चतकालीन हड़ताल की जाएगी।

पत्र के अनुसार नर्सिंग स्टाफ की मांगों के संबंध में फेडरेशन और ईएसआईसी हेडक्वार्टर के बीच दिसंबर 2021 से लेकर अक्तूबर 2024 के बीच पांच बार आधिकारिक बैठकें हो चुकी हैं। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हुआ जिससे फेडरेशन के सदस्यों में भारी असंतोष व्याप्त है। इसके मद्देनजर 21 सिंतबर 2024 को हुई फेडरेशन की केंद्रीय कार्यकारी कमेटी की वार्षिक बैठक में चिंतन हुआ। बैठक में बताया गया कि कार्पोरेशन हेडक्वार्टर के साथ बैठक के लिए नवंबर 2024 को पत्र लिखा गया, इसके बाद दिसंबर 23 दिसंबर 2024 तक पांच रिमाइंडर भी भेजे गए लेकिन न कोई कार्रवाई हुई और न ही बैठक का समय दिया गया। हेडक्वार्टर द्वारा नजरअंदाज किए जाने से पूरे नर्सिंग स्टाफ में आक्रोश व्याप्त हो गया। लगातार बेरुखी और अनदेखी किए जाने से क्षुब्ध फेडरेशन ने ट्रेड यूनियन कार्यशैली के जरिए अपनी मांगे रखने की रणनीति बनाई है। इसके तहत पूरे देश में 21 फरवरी को काला दिवस मनाया जाएगा, 21 से 23 फरवरी तक काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। 24 फरवरी यानी ईएसआईसी दिवस पर ईएसआईसी हेडक्वार्टर नई दिल्ली सहित सभी मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और डिस्पेंसरी के सामने दो घंटे का प्रदर्शन किया जाएगा।
इसी दिन 2 बजे ईएसआई हेडक्वार्टर से श्रम शक्ति भवन, (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय) तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। 25 फरवरी को सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश और 26 फरवरी से मांगे माने जाने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार इंटर रीजन ट्रांसफर पॉलिसी 2025 में नर्सिंग स्टाफ की वाजिब परेशानियों को मद्देनजर रखते हुए बदलाव किए जाने की मांग की जा रही है। इस संबंध में चार बिंदुओं का पत्र भी डायरेक्टर जनरल ईएसआईसी से लेकर श्रम मंत्री मनसुख मांडविया तक सबको भेजा गया है। फेडरेशन अपनी जायज मांगे मनवा कर ही रहेगा।

पत्र में इंटर रीजन ट्रांसफर पॉलिसी के नए उपबंध और उनमें किए जाने वाले बदलाव की मांगों की विस्तार से जानकारी दी गई है। शेष पेज दो पर पत्र के बिंदु एक के अनुसार नर्सिंग काडर के किसी भी कर्मचारी का इंटर रीजन ट्रांसफर तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उसका कार्यकाल पूरा न हो गया हो। तबादला केवल इस आधार पर ही किया जा सकता है जब कर्मचारी अपनी इच्छा से इसके लिए आवेदन करे। ऐसा इसलिए रखा गया है कि नर्सिंग पेशा सीधे मरीज की सेवा से जुड़ा हुआ काम है। कर्मचारी को अनिवार्य रूप से ऐसी जगह ट्रांसफर करना सही नहीं होगा जहां उसे भाषा की दिक्कत हो, अलग भाषा होने के कारण वह मरीज की परेशानी ठीक से समझ नहीं पाएगा, यानी मरीज को गुणवत्तापूर्ण सेवा नहीं मिलेगी। महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि नर्सिंग स्टाफ में 90 फीसदी महिलाकर्मी ही हैं, ऐसे में नर्सिंग काडर पर कार्यकाल पूरा होने पर ट्रांसफर की अनिवार्यता भी नहीं थोपी जा सकती।

18 दिसंबर 2023 और 30 अक्तूबर 2024 को हुई द्विपक्षीय वार्ता में और 17 नवंबर 2024 को डायरेक्टर जनरल ने आश्वस्त किया था कि किसी भी नर्सिंग स्टाफ का उनके क्षेत्र के बाहर ट्रांसफर तब तक नहीं किया जाएगा जब तक वह खुद इसकी इच्छा न प्रकट करे। इंटर रीजन ट्रांसफर करने के दौरान यह वादा निभाया जाए। दूसरे बिंदु के अनुसार ईएसआईसी हेडक्वार्टर द्वारा 22 जनवरी 2025 को जारी की गई ग्रुप ए और ग्रुप बी के खाली पदों की रिपोर्ट की पुनर्समीक्षा की जाए और पदवार रिक्तियां जारी की जाएं, विशेष रूप से ग्रुप बी नर्सिंग काडर की। कारण, नर्सिंग काडर के ग्रुप ए में एएनएस शामिल हैं जबकि ग्रुप बी में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग ऑफिसर। हेडक्वार्टर द्वारा जो आंकड़े अपलोड किए गए हैं वे ग्रुप बी के खाली पदों के बारे स्पष्ट नहीं हैं। खास यह कि ग्रुुप ए और बी की जो रिक्तियां दी गई हैं वो त्रुटिपूर्ण हैं और हकीकत से मेल नहीं खातीं। यह समझना जरूरी है कि ईएसआईसी के अधिकतर अस्पतालों का प्रबंधन अनुबंध पर लगाए गए लोगों के हाथ में है, इसके मद्देनजर जो रिक्तियां दर्शाई गई हैं अपर्याप्त हैं और वास्तविक रिक्तियों को नहीं दर्शातीं।

तीसरे बिंदु के अनुसार इंट्रा रीजन ट्रांसफर पाने वाले स्टाफ को भी एक क्षेत्र में कार्यकाल पूर्ण करने के मानक में शामिल किया जाए। इसके अनुसार पहले की व्यवस्था में इंटर रीजन ट्रांसफर के मामले में नर्सिंग स्टाफ को संबंधित रीजन में ही माना जाता था और इंट्रा रीजन पॉलिसी भी थी। इसके चलते बीते वर्षों में ईएसआईसी ने अनेक इंट्रा रीजन ट्रांसफर भी किए। अब नई इंटर रीजन पॉलिसी के तहत ऐसे कर्मचारी जो इंट्रा रीजन पॉलिसी के तहत स्थानांतरित किए गए थे, वे अब इंटर रीजन ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे क्योंकि नई व्यवस्था के तहत उनका कार्यकाल पूर्ण होना नहीं माना जाएगा। मांग की गई है कि ऐसे लोग जो इंटर रीजन ट्रांसफर के लिए आवेदन कर रहे हैं उनका कार्यकाल एक ही रीजन मेंं बिताए गए समय के आधार पर गिना जाए।

चौथे बिंदु के अनुसार अनेक प्रतिष्ठान, इकाइयों में पहले से ही सीमा से अधिक पद रिक्त हैं। इस संदर्भ में स्थानांतरण आवेदन केवल 10 प्रतिशत तक ही लिए जाने के फैसले की पुनर्समीक्षा की जाए ताकि लंबे समय से पेंडिंग पड़े केसों, खासकर पदोन्नत काडर के आवेदन पर निष्पक्ष और न्यायसंगत ढंग से विचार हो सके। दरअसल, बीते दस साल से पदोन्नत काडर वालों और बीते सात वर्षो से सीधी भरती काडर वालों के इंटर रीजन ट्रांसफर आवेदन स्वीकार नहीं किए गए हैं। नर्सिंग स्टाफ कई साल से ट्रांसफर किए जाने इंतजार कर रहा है।

पांचवें बिंदु के अनुसार सीधी भरती काडर की 100 प्रतिशत रिक्तियों को इंटर रीजन ट्रांसफर के जरिए भरा जाए, बची सीटों के लिए नई भर्तियां की जाएं। हालांकि मरीजों की निरंतर देखभाल और सेवा के मद्देनजर, इंटर रीजन ट्रांसफर वाले अभ्यर्थियों को चरणबद्ध तरीके से यानी नए स्टाफ के पदभार संभालने के बाद ही कार्यमुक्त किए जाने की व्यवस्था की जा सकती है। जैसा कि बताया जा चुका है कि पदोन्नत काडर को दस साल और नई भरती काडर को सात साल से इंटर रीजन ट्रांसफर नहीं दिया गया है। ऐसे में 100 रिक्तियों की पुनर्समीक्षा की जाए और इन्हें इंटर रीजन ट्रांसफर के जरिए भरा जाए, इसके बाद नई भरती के जरिए न कि ठेकाकर्मी लगाए जाएं।

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Mazdoor Morcha
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