फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्याली चौक पर नियमों को ताक पर रखकर खुले में बम-पटाखे बेचे गए, वहीं पुलिस ने भी दो-चार मामले दर्ज कर खानापूर्ति कर दी।
सुधी पाठक जान लें कि वर्ष 1991 में दीपावली से दो दिन पहले एनएच-1 की अति व्यस्त मार्केट में भयानक हादसा हुआ था। जिसमें 13 लोगों सहित 100 से ज्यादा दुकानें आग की लपटों में समा गईं थी। इस हादसे तक पटाखों की बिक्री पर किसी प्रकार का न तो कोई प्रतिबंध था और न ही कोई नियम लागू होता था। इस घटना से सबक लेते हुए जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री के लिए नियम तय किए जिनके अनुसार आबादी क्षेत्र से दूर आतिशबाजी बेचने का प्रावधान किया गया था।
नियमों की अनदेखी फिर बना था एक और बड़े हादसे की वजह 21 अक्टूबर 2014 को दशहरा मैदान में बनाए गये स्थायी पटाखा बाजार में इतनी भयंकर आग लगी और छोटे बड़े सैकड़ों स्टॉल जलकर राख हो गए। आग इतनी भयंकर थी कि लोग अपना वाहन भी नहीं उठा सके लिहाजा अनेकों कारें, स्कूटर, साइकिलें आदि सब आग में स्वाहा हो गए। शुक्र यह हुआ कि कोई जनहानि नहीं हुई क्योंकि वहां से भाग निकलने का पर्याप्त खुला स्थान था। इस मौके पर फायर ब्रिगेड की 22 गाडिय़ों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। उक्त हादसों से सबक न लेते हुए, इस बार दशहरा मैदान में लगे पटाखा बाजार में न कोई पुलिसकर्मी नजर आ रहा था और न ही कोई दमकल गाड़ी ।
बीते शनिवार व रविवार को प्याली चौक से एनएच -2 को जाने वाली सड़क जिसे फर्नीचर मार्केट भी कहते हैं पर, हजारों की भीड़ में हर तरह के पटाखे खुलेआम बिक रहे थे। यहां न तो पुलिस दिख रही थी और न ही अग्निशमन की कोई व्यवस्था। इससे सिद्ध होता है कि प्रशासन हादसा होने से पहले मुंह ढ़क कर सोता है और हादसा हो जाने पर लकीर पीटता है।