यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने का वीडियो वायरल हुआ, मजबूरी में पुलिस ने काटा ऑनलाइन चालान फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्कॉर्पियो में अवैध रूप से पुलिस फ्लैशर लगाकर, साइरन बजा कर छत खोल कर जनता के बीच बेवजह का टोरा बनाने वाले वार्ड नंबर तीन के पार्षद रवि भगत का यातायात पुलिस ने 6500 रुपये का चालान काट दिया। चालान पुलिस ने अपनी मर्जी से नहीं काटा है बल्कि उसे मजबूरी में तब ऐसा करना पड़ा जब सोशल मीडिया पर उसकी साइरन बजाते, नीली लाल बत्ती जलाते वीडियो वायरल हुआ। कोई और होता तो यातयात पुलिस कई धाराएं लगा कर तगड़ा चालान बनाती लेकिन पूर्व मंत्री मूलचंद का पालतू कहे जाने वाले रवि भगत के खिलाफ चालान की औपचारिकताएं ही पूरी की गईं, ताकि सोशल मीडिया यूजर शांत हो जाएं और रवि की भगतई बनी रहे।
दरअसल, रवि कश्यप भगत यह सब ड्रामे इसलिए कर रहा है कि पहली बार पार्षद बनने के बावजूद उसका नाम डिप्टी मेयर प्रत्याशियों में शामिल है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक उसे डिप्टी मेयर नहीं बनाया गया है लेकिन जनता में खास कर जनता कॉलोनी में वह खुद को मेयर के रूप में पेश करने के लिए इस तरह की छिछोरी और गैर कानूनी हरकतें कर रहा है। डिप्टी मेयर सीट के लिए उसका नाम बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा के कारण आ रहा है। वह मूलचंद के उन चंद खास पालतुओं में है जो आका के लिए कुछ भी कर सकते हैं। बताया जाता है कि मूलचंद का वरद्हस्त होने के कारण वह नगर निगम ही नहीं पूरे प्रशासन पर अपनी धौंस जमाता रहता रहा है। आका के लिए वसूली, जमीन कब्जाने, अतिक्रमण करवाने-हटवाने, जुलूस में भीड़ जुटाने, सांप्रदायिक दंगों के माहौल में संघ-भाजपा के एजेंडे को लागू करने में हमेशा आगे रहता। इन सबसे ऊपर मूलचंद शर्मा के चरण चुंबन और स्वामिभक्ति का ईनाम देने के लिए उसका नाम आगे चल रहा है। इस बात को लेकर वरिष्ठ भाजपाइयों में नाराजगी भी है। इन लोगों का कहना है कि इसी रवि भगत ने 2015 के नगर निगम चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर भाजपा का खुल कर विरोध किया था, यहां तक कि भाजपा प्रत्याशी को हराने की गरज से अपनी बहन को चुनाव लड़वाया था। ऐसे गद्दार और सत्ता लोलुप व्यक्ति के लिए मूलचंद शर्मा पार्टी के प्रति वफादार और कई बार पार्षद रहे लोगों को दरकिनार कर रहे हैं, यह पार्टी की नीतियों के भी खिलाफ है। वरिष्ठ भाजपाई ने नाम न छापने की शर्त पर अपना गुस्सा बयान किया कि चंद दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुए रवि कश्यप को मूलचंद ने पार्षद बनवाया फिर ग्रीवांस कमेटी का सदस्य भी बनवा दिया। अब डिप्टी मेयर बनवाना चाह रहे हैं। पार्टी मेें अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि हैं जिन्हें कोई पद नहीं और बाहरी को तीन-तीन पदों से नवाजा जा रहा है। यह पार्टी के एक व्यक्ति एक पद और कार्यकर्ता प्रथम की नीतियों का खुला उल्लंघन है।
हालांकि भाजपा के बड़े नेताओं में तगड़ी गुटबाजी के कारण एक बैठक के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के नाम तय नहीं हो पाए हैंं लेकिन मूलचंद जैसे अदना से आका के आश्वासन पर प्यादा भगत खुद को डिप्टी मेयर मान कर बाकायदा जुलूस की शक्ल में चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इसे अभी कोई पद नहीं मिला है तब तो ये इतने नाटक-नौटंकियां कर रहा है, अगर डिप्टी मेयर बन गया तो ये खुद को सीएम से कम नहीं समझेगा। सोमवार को डिप्टी मेयर चुनाव की बैठक होनी थी लेकिन रवि भगत तो खुशी में दो तीन दिन पहले से ही स्कॉर्पियों में लाल-नीला फ्लैशर लगाकर, पुलिस सायरन बजाते हुए घूमने लगा था। रविवार को भी इलाके में अपना टोरा बनाने के लिए सारे तामझाम के साथ निकला।
खास बात यह है कि इस दौरान उसके साथ एक गनमैन भी था। सवाल यह उठता है कि किसी का सुरक्षाकर्मी बनने के बाद क्या किसी पुलिसकर्मी की कानून का पालन कराने की ड्यूटी खत्म हो जाती है। कोई उसके सामने कानून तोड़े और वह मना करने या आला अधिकारियों को सूचना देने के बजाय इस काम में उसके साथ रहे। दरअसल, पुलिस विभाग से वेतन लेने वाले इन सुरक्षाकर्मियों को नेताजी के साथ चलने पर खूब, चाय-बिस्कुट, काजू कतली, मिठाई आदि खाने को मिल जाती हैं और से इसी में मस्त हो जाते हैं। होना तो यह चाहिए था कि गनमैन को भगत की स्कॉर्पियों में अवैध रूप से लगाए गए फ्लैशर व सायरन को खुद ही हटवा देना चाहिए था। यदि वह नहीं हटवा पा रहा था तो आला अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए थी। संदर्भवश, सुधी पाठकों को बताते चलें कि अपना रुतबा बढ़ाने के लिए इसने पुलिस सुरक्षा प्राप्त करने के इरादे से सितंबर 2023 में एक मनगढ़ंत कहानी रची और अपने आका मूलचंद के आशीर्वाद से एक गनमैन हथिया लिया। 45 पार्षदों को तो कोई खतरा नहीं, इस अकेले पार्षद को क्यों खतरा हो रहा है। यह भी सच्चाई है कि यदि गनमैन सूचना दे भी देता तो मंत्री-विधायकों की जीहुजूरी करने वाले पुलिस के आला अधिकारी शायद ही कोई कार्रवाई कर पाते, जैसे कि अभी तक नहीं की जा रही थी। वो तो इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उसमें जनता ने यातायात पुलिस पर उंगलियां उठानी शुरू कीं तो मजबूरी में ऑनलाइन चालान काट कर भेज दिया गया। चालान भेज तो दिया गया लेकिन पुलिस राशि वसूल पाएगी यह कहना मुश्किल है।