क्रांतिकारी मजदूर मोर्चाँ देश में फासीवादी जकड़बंदी हर रोज़ कसती जा रही है। अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़, शासन समर्थित और संरक्षित, कट्टर हिंदुत्ववादियों द्वारा प्रायोजित हिंसा और दमन, भेदभाव भयानक होते जा रहे हैं। मज़दूर अधिकारों को बेरहमी से कुचला जा रहा है। महिलाओं के विरुद्ध हिंसा बर्बरता की सभी सीमाएं लांघ रही है। किसानों की आवाज़ को कुचला जा रहा है। निम्न मध्य वर्ग तबक़े के ज़हन में दबी मज़हबी नफऱत को कुरेद-कुरेद कर बाहर निकाला जा रहा है। उन्हें फासीवादी भट्टी में झोंका जा रहा है।
परिस्थितियां; मजदूरों, मेहनतकश किसानों, धर्मनिरपेक्ष, जनवादी, इंसाफ पसंद, अमन पसंद लोगों के इकट्ठे आंदोलनों के देशव्यापी ‘संयुक्त प्रतिरोध फ्रंट’ की मांग कर रही हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश, ठोस रूप में ऐसा होता अभी तक नजऱ नहीं आ रहा, हालांकि इस दिशा में बहुत गंभीर प्रयास ज़ारी हैं। ऐसे में 4 किसान जन संगठनों, अखिल भारतीय प्रगतिशील किसान सभा, सदौ असम खेतियोक संस्था, त्रिपुरा कृषक मुक्ति परिषद और अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा ने, ‘अखिल भारतीय संयुक्त किसान सभा’ नाम से इकट्ठे आने का फैसला किया है। क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा इस विलय का समर्थन और स्वागत करता है। साथ ही उम्मीद करता है कि क्रांतिकारी किसान और मज़दूर जन संगठनों के संयुक्त मोर्चों की प्रक्रिया तेज़ होगी, देशव्यापी फासीवाद विरोधी तहरीक मजबूत होगी, जिससे ना सिफऱ् फासीवादी शक्तियों को शिकस्त दी जा सकेगी, देश की गौरवशाली गंगा जमुनी तहज़ीब को बचाया जा सकेगा, बल्कि इसी प्रक्रिया के आगे बढऩे पर, देश स्तर पर एक सही क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी का उदय होगा, जिससे पूंजीवादी साम्राज्यवादी शोषण मूलक, पूंजी की गुलामी वाली, इस ज़ालिम व्यवस्था की जगह इंसानी श्रम और इंसाफ़ को सम्मान देने वाली समाजवादी व्यवस्था प्रस्थापित होगी।