फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर गौरव अंतिल की कार और उनके ड्राइवर निरंजन को तार चोरी के मामले में गुडग़ांव सुशांत लोक थाने की पुलिस गिरफ़्तार कर मंगलवार को ले गई। इसके बाद एडिशनल कमिश्नर की प्रतिक्रिया आई कि उन्होंने नौ महीने पहले यह कार रेंट पर ली थी, सुबह इससे ऑफिस आते हैं और शाम को घर। इसके बाद कार कहां जाती है उन्हें नहीं मालूम। सुशांत लोक थाना प्रभारी मनोज के अनुसार सेक्टर 44 में एक हॉस्पिटल की इमारत निर्माणाधीन है। 6 जुलाई की रात यहां से तारों का एक बंडल चोरी हो गया। हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से मिली शिकायत के बाद जांच शुरू की गई तो सीसीटीवी में सियाज कार एचआर 26 सीयू 0257 निर्माण स्थल में जाती और कुछ देर बाद बाहर निकलते हुए दिखी।
कार की छत पर पुलिस जैसी नीली-लाल फ्लैशर लाइट और बोनट पर गवर्नमेंट ऑफ हरियाणा लिखा था। पहले तो यकीन नहीं हुआ कि इस कार से चोरी की गई लेकिन अन्य सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर सामने आया कि तार का बंडल इसी में लाद कर ले जाया गया था। पकड़ा गया ड्राइवर खट्टर की ठेका व्यवस्था यानी एचकेआरएन के तहत 2024 में नौकरी लगा था। उसकी तैनाती फरीदाबाद नगर निगम में थी, पकड़ी गई कार भी उसने अपनी पत्नी के नाम पर फाइनेंस कराई हुई है और नगर निगम में लीज पर लगाई हुई थी। इस कार का इस्तेमाल एडिशनल कमिश्नर गौरव अंतिल करते थे। अंतिल रोजाना इसी सरकारी गाड़ी से गुडग़ांव से आना जाना करते हैं। संदर्भवश, स्टाफ कार घर से दफ्तर के लिए नहीं होती खास कर एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए बिल्कुल नहीं होती, यह सरासर दुरुपयोग है सरकारी पैसे का। सरकार को जांच कराकर वसूली करनी चाहिए। सवाल यह है कि एडिशनल कमिश्नर गौरव अंतिल ने क्या कार निजी तौर पर किराए पर ली है या नगर निगम के खर्चे पर इस्तेमाल कर रहे थे। यदि निजी तौर पर किराए पर ली है तो उस कार में हरियाणा सरकार क्यों लिखवाया, छत पर पुलिस-प्रशासन द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली लाल नीली फ्लैशर लाइट और हूटर किस अधिकार से लगवाई। यदि नगर निगम के खर्चे पर यह कार ली गई है तो फिर ऊपरोक्त सवालों के साथ कई अन्य सवाल भी खड़े होते हैं।
पहला यह कि नगर निगम ने निजी नंबर वाली कार लीज पर क्यों ली। किराए पर कॉमर्शियल नंबर वाली कार ही जानी चाहिए थी। ऐसा कर नगर निगम अधिकारियों ने सरकार को कॉमर्शियल वाहन के टैक्स की क्षति पहुंचाई है। दूसरे, लीज अवधि के दौरान कार मुख्यालय में ही क्यों पार्क नहीं की जा रही थी। नियमानुसार लीज की कार केवल सरकारी काम में ही इस्तेमाल की जा सकती है, बाकी समय महकमे के परिसर में पार्क रहनी चाहिए। अतिरिक्त निगमायुक्त यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उन्हें लेने और छोडऩे के बाद कार कहां जाती थी इसकी उन्हें जानकारी नहीं। नियमानुसार हर सरकारी वाहन की एक लॉग बुक होती है जिसमें यात्रा शुरू करने का समय, दूरी, लौटने का समय और कितने किलोमीटर वाहन चला इसकी जानकारी दर्ज की जाती है, इसका सत्यापन उस अधिकारी के हस्ताक्षर से होता है जो वाहन का इस्तेमाल कर रहा होता है। इसका अर्थ यह है कि अंतिल महोदय कार की लॉग बुक भी नहीं रखते।
जिस कार पर हरियाणा सरकार लिखा हो, निजी नंबर प्लेट हो और टॉप पर नीली-लाल फ्लैशर लाइट लगी हो तो वह किसी भी इलाके में बिना जांच परख के बेरोक-टोक घुस जाएगी। पुलिस ऐसे वाहनों की चेकिंग तो दूर, रोकने की भी हिम्मत नहीं करती। सुधी पाठक समझ लें कि किसी भी निजी या कॉमर्शियल वाहन पर इस तरह के चिह्न आदि लगाना अपराध है । दूसराी समझने वाली बात यह है कि किसी भी ड्राइवर की इतनी औकात नहीं होती कि वह यह सब अपनी मर्जी से कर ले, ये सारे काम साहब के आदेश पर ही किए जाते हैं, जो जनता पर अपना रौब गालिब करने केे लिए यह आपराधिक कार्रवाई करते हैं। ड्राइवर निरंजन ने चोरी में इस कार का इस्तेमाल करके जितना बड़ा अपराध किया है खुद अंतिल का अपराध भी इससे किसी तरह कम नहीं है। यदि अंतिल में अपने पद की गरिमा का जरा भी अहसास होता तो वे इस तरह के कांड न होने देते।
भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो निगम में निजी नंबर प्लेट की यही कार किराए पर नहीं लगी है, अनेक एक्सईएन, एसडीओ, यहां तक कि जेई भी ऐसे ही वाहनों का आनंद ले रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस घटना के बाद निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा किराए पर लगाए गए निजी वाहनों को हटा कर कॉमशिर्यल वाहन लगाएंगे और ऐसे वाहनों पर हूटर, फ्लैशर उतरवाने के साथ हरियाणा सरकार भी मिटवाएंगे या नहीं। यदि ऐसा नहीं होता है तो समझा जा सकता है कि सारा खेल निगमायुक्त की अनुमति से ही होता है।