फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम का दो सौ करोड़ का घोटाला ज़ीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले पूर्व सीएम खट्टर कार्य काल की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। जिस तरह खुलेआम लूट चल रही थी तो घोटाला खुलना ही था। क्योंकि केंद्र और प्रदेश दोनों में भाजपा का रामराज चल रहा है, ऐसे में घोटाले का ठीकरा प्यादों पर फोड़ कर बड़े योद्धाओं यानी आईएएस अफसरों को बचाने की कवायद की जा रही है। दो सौ करोड़ घोटाले में फंसे आईएएस अफसर सोनल गोयल, एम शाईन और अनीता यादव को क्लीनचिट् देने के लिए नगर निगम में एक बार फिर रिकॉर्ड तैयार किए जाने की सुगबुगाहट अधिकारियों और कर्मचारियों में है। चर्चा तो यहां तक है कि इस दाग को धोने के लिए ही सरकार ने आईएएस एम शाईन के खास चेले धीरेंद्र खडगटा को नगर निगम का जिम्मा सौंपा है। सुधी पाठकों को याद होगा कि मनोहर लाल खट्टर के पहले कार्यकाल में विकास कार्यों के नाम पर पूर्व मंत्री मूलचंद के खास ठेकेदार सतबीरा को नगर निगम ने बिना काम किए ही या एक ही काम के चार चार भुगतान दिखा कर दो सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया था। तत्कालीन पार्षद दीपक की शिकायत पर राज्य चौकसी ब्यूरो ने जांच की और दो सौ करोड़ का घोटाला पकड़ा। जांच के आधार पर 19 अप्रैल 2022 को स्थानीय विजिलेंस थाने में मुकदमा नंबर 13 दर्ज किया गया।
इस केस में नगर निगम के अकाउंट ब्रांच क्लर्क तसलीम पंकज ओर प्रदीप सहित संयुक्त आयुक्त दीपक थापर, जेई दीपक कुमार, एक्सईएन रमन शर्मा, चीफ इंजीनियर दौलत राम भास्कर को नामजद किया गया था। चार चार फर्मों को (जांच के अनुसार ये चारों सतबीरा की ही थीं) बिना काम किए ही करोड़-सवा करोड़ का भुगतान तब ही संभव है जब इस धन की बंदरबांट जेई से लेकर अकाउंट ब्रांच और निगमायुक्त के बीच हो। हुआ भी वही विस्तृत जांच हुई तो आईएएस सोनल गोयल से लेकर एम शाईन और अनीता यादव की मिलीभगत भी सामने आई और इन तीनों आईएएस अफसरों को भी शामिल तफ्तीश किया गया। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार जांच में ठेकेदार सतबीरा ने मंत्री मूलचंद शर्मा को करीब चालीस लाख रुपये कीमत वाली कार भेंट करना स्वीकार भी किया था। मामला क्योंकि भाजपा नेता का था तो जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, इसका फायदा न सिर्फ भाजपा नेता को मिला आईएएस अधिकारियों को भी मिला।
घोटाले का खुलासा हुए पांच साल से ज्यादा बीत चुके हैं, निगम सूत्रों के अनुसार सैनी सरकार खट्टर के कार्यकाल में लगे इस कलंक को मिटाने की कवायद में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार हालांकि विजिलेंस जांच में सब की भूमिका स्पष्ट हो चुकी है और चार्जशीट की जानी है लेकिन आईएएस अफसरों को बचाने के लिए रिपोर्ट में कुछ नए तथ्य और दस्तावेज लगाने का खेल किया जा रहा है। नगर निगम की एस्टेब्लिशमेंट ऑफिस मुखिया सृष्टि बब्बर को यह रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि सृष्टि उस समय के ऐसे दस्तावेजों का अध्ययन कर ऐसी रिपोर्ट तैयार करेंगी जिनके आधार पर एम शाईन, सोनल गोयल, अनीता यादव को शक के आधार पर बचाया जा सके। सूत्र बताते हैं कि वह दो सौ करोड़ घोटाले से जुड़ी फाइलों में ऐसे दस्तावेज तलाश रही हैं जिसमें तत्कालीन निगमायुक्त एम शाईन आदि के हस्ताक्षर न हों। इस संबंध में सृष्टि बब्बर ने बताया कि दो सौ करोड़ घोटाले में दर्ज एफआईआर के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है जो वह बना रही हैं।
आईएएस अधिकारियों को बचाने के लिए रिपोर्ट बनवाए जाने की चर्चा में सच्चाई इसलिए हो सकती है कि घोटाले में वित्तीय और तकनीकी खामियां पकड़ी गईं थीं, रिपोर्ट ईओ ब्रांच प्रधान सृष्टि बब्बर से बनवाई जा रही है जिन्हें घोटाले की तकनीकी और वित्तीय बारीकियों की जानकारी उतनी नहीं है जितनी इन विषयों के विशेषज्ञ की होती है। जाहिर है कि उनकी रिपोर्ट घोटाले की जांच में मदद करने से ज्यादा भटकाव पैदा करने वाली हो सकती है, यानी सरकार की मंशा के अनुरूप, बाकी तो सरकार के वकील अदालत में कर ही लेंगे।
संघ की शाखाओं में नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि यानी दिखावटी सदाचार का पाठ पढ़ कर सत्ता हथियाने वाले मोदी-खट्टर के बीते दस वर्ष के रामराज में बड़े-बड़े घोटाले हुए, नगर निगम का घोटाला तो बहुत छोटा है। जहां संघ, मोदी-शाह की मर्जी के मुताबिक जांच की दशा-दिशा तय करने वाली एजेंसियां हों, गोदी मीडिया, भ्रष्ट अधिकारी, यहां तक कि न्यायपालिका भी सत्तामुखी हो चुकी है, तो कैसा भी भ्रष्टाचारी हो भाजपा की वाशिंग मशीन से लकदक होकर ही निकलेगा। रही मोदी-शाह, खट्टर की बात तो जब तक गोमूत्र पीने और गोबर खाने वाले अपने नेताओं के दागदार दामन को अंधभक्ति की कीचड़ से धोकर साफ करते रहेंगे तब तक ये सत्ता में बने रह कर इसी तरह भ्रष्टाचार पर सदाचार का पर्दा डालते रहेंगे।