फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते दिनों जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) ने शहर भर में अवैध निर्माण के नाम पर घरों के आगे बनाए गए रैंप, निजी पार्क और उनकी बाउंड्री आदि के खिलाफ अभियान का पाखंड किया। यह दिखावा उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर के संबंध में दिए गए आदेश के पालन में करना पड़ा। दिखावा इसलिए कि हाईकोर्ट ने चौथे फ्लोर को तोडऩे का आदेश दिया लेकिन तोडफ़ोड़ रैंप, बाउंड्री आदि की ही की गई।
जानकारी के मुताबिक पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका सुनील सिंह बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले में 2 जुलाई 2024 को हरियाणा सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को आदेश जारी कर स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर पॉलिसी लागू करने से रोक लगाई थी। आदेश के आधार पर सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को आदेश जारी किया है कि सारे अतिक्रमण हटाए जाएं। राइट ऑफ वे यानी रास्ते के अधिकार के तहत सड़कों पर बनाए गए ग्रीन एरिया, लॉन, लैंडस्केप एरिया, बाउंड्री वाल आदि गिराएं। अतिक्रमण, अवैध कब्जा करने वालों के साथ ही स्टिल्ट फ्लोर में रेजिडेंशियल प्लॉट बनाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का भी आदेश जारी किया गया। इसके साथ ही कॉलोनाइजर्स, डेवलपर्स, प्लॉट या फ्लोर के मालिक, कब्जेदार और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन आदि को भी राइट ऑफ वे के मद्देनजर बिना देर किए अपना अतिक्रमण, अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया।
हाईकोर्ट ने आदेश तो दिया था चौथी मंजिल और स्टिल्ट फ्लोर का रेजिडेंशियल इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का लेकिन डीटीपी ने रास्ते साफ करने का कथित अभियान चलाया। बीते सोमवार को डीटीपी ने ग्रीन फील्ड एरिया में अभियान चलाने की तैयारी की। सुरक्षा के लिए पुलिस तो सुबह आठ बजे ही डट गई, डीटीपी की टीम तोडफ़ोड़ करने 11 बजे पहुंची। यहां सड़क किनारे ग्रीन बेल्ट पर लोगों द्वारा लगाए गए पेड़ पौधे और उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गईं एक-दो फुट ऊंची बाउंड्री तोड़ दी गईं। यह सब काम राइट ऑफ वे के नाम पर किया गया लेकिन आवागमन में सही बाधा उत्पन्न करने वाले घरों के आगे आठ से दस फुट तक निकले रैंप नहीं तोड़े गए।
बताया गया कि रैंप तोडऩे से घर में प्रवेश करने का रास्ता टूट जाएगा। जानकारों के अनुसार किसी भी घर के बाहर रैंप नहीं बनाया जा सकता, ग्रीन बेल्ट में या सड़क के किनारे तक रैंप पूरी तरह अवैध हैं। ग्रीन बेल्ट को हरा भरा करने के नाम पर हूडा हो या नगर निगम हर साल मोटे मोटे बिल तो बनाते हैं लेकिन पार्क या कुछ खास जगहों को छोड़कर शायद ही कहीं पौधे लगाए जाते हैं। लोगों ने अपने घरों के सामने ग्रीन बेल्ट में जो हरियाली की और गऊ माता आदि जानवरों से रक्षा करने के लिए छोटी मोटी बाउंड्री बनाई वह डीटीपी महोदय को अतिक्रमण नजर आया। डीटीपी ने कार्रवाई के नाम पर सोसायटी में भी ग्रीन बेल्ट उजाड़ी, सोसायटी वालों का कहना था कि जिस जगह को राइट ऑफ वे के नाम पर उजाड़ा गया है वह तो प्रोजेक्ट और नक्शे में पहले ही दर्शाई गई है और इसे डीटीपी द्वारा ही पास किया गया है। डीटीपी ने बीपीटीपी, आरपीएस, इरोज में तोडफ़ोड़ की खानापूर्ति की लेकिन केंद्रीयमंत्री कृष्णपाल गूजर की अमोलिक की तरफ देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। चर्चा है कि गूजर ने सीएम सैनी को फोन कर डीटीपी की कार्रवाई रुकवा दी है, यही कारण है कि अगले दिन से डीटीपी महोदय ढीले पड़ गए और कहीं तोडफ़ोड़ करने नहीं गए।
लोगों का कहना था कि हाईकोर्ट ने चौथी मंजिल पर कार्रवाई करने का स्पष्ट आदेश दिया है, कार्रवाई तो दूर डीटीपी के अधिकार क्षेत्र वाले इलाके में चौथा फ्लोर, स्टिल्ट पार्किंग में चूहा फ्लैट यहां तक कि एफएआर के तहत खुले रखे जाने वाले एरिया को कवर कर बच्चा फ्लैट बनाए जा रहे हैं। केवल ग्रीन फील्ड एरिया में सैकड़ों कॉलोनियां हैं जिनमें बच्चा फ्लैट, चूहा फ्लैट बने हुए हैं। सैनिक कॉलोनी सोसायटी के पड़ोस में चार और पांच फ्लोर वाली इमारतें अब भी धड़ल्ले से बनाई जा रही हैं, इन पर डीटीपी महोदय ने कोई कार्रवाई नहीं की, बस हरियाली रौंद कर लोगों के आने जाने का रास्ता साफ करने का नाटक किया गया, इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार पूरे प्रदेश में अतिक्रमण, अवैध कब्जे और फोर्थ फ्लोर पर अंकुश लगाने के सुहावने दावे करेगी।
ढोंग में नगर निगम क्यों पीछे रहता डीटीपी ने अतिक्रमण हटाने का पाखंड किया तो नगर निगम कहां पीछे रहता तो निगम की ओर से भी सभी आरडब्ल्यूए एवं हाउसिंग सोसायटीज को मकानों के आगे सरकारी जमीन पर लोहे की ग्रिल लगाकर या अन्य किसी प्रकार का अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया है। सूप बोले तो बोले छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद वाली कहावत चरितार्थ करते हुए नगर निगम ने भी डीटीपी की तरह आदेश तो जारी कर दिया लेकिन अतिक्रमण पर किस मुंह से कार्रवाई की जाएगी जब खुद निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा का आवासीय कार्यालय ही ग्रीन बेल्ट पर है। निगमायुक्त महोदय को चाहिए कि लोगों के घरों के सामने ग्रीन बेल्ट खाली करवाने से पहले अपने आवासीय कार्यालय को तुड़वा कर ग्रीन बेल्ट मुक्त कराएं। यही नहीं निगमायुक्त आवास के पास ही रिहायशी इलाके में बिना नक्शा, सीएलयू अवैध इमारत बना डाली गई। बिट्टू टिक्की वाला की अवैध इमारत तोडऩे के बाद अब बताया जा रहा है कि एक ज्वैलर्स ग्रुप की बड़ी इमारत बनाने की तैयारी है। तनिश्क ज्वैलर्स ने अपना रास्ता साफ करने के लिए निगम की ग्रीन बेल्ट में पचासों साल से खड़े दस-पंद्रह पेड़ काट डाले थे, इन सब पर भी कार्रवाई की जाए। ग्रीन बेल्ट और अतिक्रमण पर कार्रवाई का पाखंड समाप्त हो जाए तो हाईकोर्ट के आदेश पर गौर करते हुए चौथे फ्लोर और चूहा फ्लैटों पर भी कार्रवाई कर लो।
नगर निगम के सभी 46 वार्डों में नियम-कानून ताक पर रख कर धड़ल्ले से चार फ्लोर फ्लैट और स्टिल्ट पार्किंग फ्लैट बन रहे हैं। ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है एनआईटी एक, दो, तीन और पांच में आज भी इस तरह के निर्माण जारी हैं। सैनिक कॉलोनी में तो एफएआर की धज्जियां उड़ाकर बच्चा फ्लैट बनाए गए हैं। यहीं पद्मभूषण नासवा की महिला रिश्तेदार स्वाति नासवा की चार नहीं पांच मंजिला इमारत है जिसमें एफएआर के लिए खुली जगह छोड़ी ही नहीं गई है, स्टिल्ट पार्किंग तक का ‘सदुपयोग’ किया जा रहा है। पार्षद रवि भगत जैसे तो अवैध निर्माण करवाने का ठेका लेते हैं और निर्माणकर्ता को आश्वासन देते हैं कि तुम बनाओ नगर निगम से कोई आया तो उसकी खैर नहीं। निगमायुक्त महोदय निरीह आम जनता के खिलाफ अभियान चलाने से पहले नगर निगम के गिरेबान में झांक कर पहले अपनों के अतिक्रमण पर कार्रवाई कीजिए तब ही दूसरों को नसीहत दीजिएगा।