समर अनार्य ये सारे पत्र 4 जनवरी को इसी एनवाईटी में लिडिया पोलग्रीन के लिखे संपादकीय लेख आई थॉट दिस वास हेवन ऑन अर्थ’ के जवाब में आए हैं- वह लेख अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के लिए बढ़ती नफरत और उनके ख़िलाफ बढ़ती हिंसा पर था। आश्चर्य भरा लेख था- क्योंकि अभी कुछ साल पहले तक भी अमेरिकी भारतीय आदर्श अल्पसंख्यक माने जाते थे- सभ्य, शालीन, पढ़े लिखे, मेहनती।फिर क्या बदल गया ये जानना है तो ये सारे ख़त पढ़ लें।
वैसे मैं भी बता देता हूँ- एक लाइन में भारत में मोदी पीएम बन गया और एनआरआई भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा उसके झाँसे में आ गया। वे शांति से अपना काम करने, अपने मंदिर संभालने, अपनी संस्कृति से बाकियों का परिचय कराने की जगह हिंसक और आक्रामक होने लगे। वे न्यू जर्सी में भारत के स्वतंत्रता दिवस की परेड में बुलडोजर निकालने लगे- मूर्खों ने किया तो भारत में अल्पसंख्यकों को डराने के लिए था लेकिन चौंक अमेरिकी बहुसंख्यक गए- ये ससुरे हमारा घर गिराने की फिराक में हैं! ये मूर्ख टेक्सस माने अमेरिका के सबसे कट्टर क्रिश्चियन इला$कों में से एक में हनुमान जी की 90 फीट की मूर्ति लगाने लगे। अमेरिकी बहुसंख्यकों का माथा ठनका- अब ये अपना धर्म हम पर लादने की साजि़श कर रहे हैं।
ये मूर्ख अमेरिका भर में हर हिंदू त्यौहार पर शोभा यात्रा निकालने लगे- इतना ही नहीं- सुपर मार्केट वगैरह भी राम जी हनुमान जी आदि बन कर जाने लगे। अब साल में एकाध बार हो तो बहुसंख्यक समुदाय को मजा आयेगा- लेकिन हिंदू धर्म में तो हर इलाके के अपने त्यौहार हैं- हफ़्ते में एक का मामला बन जाता है। सो अमेरिका में हर दस दिन में एक हिंदू रैली होने लगी- भले 10 लोगों की हो। अमेरिकी बहुसंख्यक ईसाई समुदाय चक्कर में आ गया- ये पक्का कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं। और अब जवाब में अमेरिका में आज तक के आदर्श अल्पसंख्यक रहे भारतीय (ज़्यादातर हिंदू) मूल के लोग हमले झेल रहे हैं- हथकड़ी बेड़ी में भारत भेजे रहे हैं, उनके मंदिर ख़तरे में हैं। और ये सब वहाँ के सबसे बड़े अख़बारों में चर्चा का विषय है!ये सब देशभक्त हिंदू कांग्रेस राज में बनी आईआईटी वगैरह में पढ़ के बिना मतलब अमेरिका गए ही थे। अब इन्हें अमृत काल में देश लौट देश के विकास यज्ञ में आहुति देने का अवसर मिलेगा। थैंक यू मोदी जी