जिन्होंने नफऱत फैलाई, क़त्ल किए और ख़ुद ख़त्म हो गए, नफऱत से याद किए जाते हैं।
जिन्होंने मुहब्बत का सबक़ दिया और क़दम बढ़ाए वे जिन्दा हैं, मुहब्बत से याद किए जाते हैं।
जिन्होंने सही वक़्त का इंतिज़ार किया और शक करते रहे, वे अख़ीर तक हाथ पर हाथ धरे बैठे थे, शक के कमज़ोर किलों में क़ातिलों का इंतिज़ार उनकी किस्मत बन गया।
रास्ते अलग-अलग और साफ़ हैं तुम्हें चुनना होगा नफऱत, शक और मुहब्बत के बीच। तुम्हारी आवाज़ बुलन्द और साफ़ होनी चाहिए और क़दम सही दिशा में।