अरावली में अवैध निर्माण गिराने के लिए पुलिस बल-दस्ता रहा तैयार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट नदारद

अरावली में अवैध निर्माण गिराने के लिए पुलिस बल-दस्ता रहा तैयार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट नदारद
June 13 16:42 2025

सत्ता के इशारों पर नाचने वाले भ्रष्ट अधिकारी ही अरावली को लुटवा रहे
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिल्ली-एनसीआर का फेफड़ा कही जाने वाली अरावली के पीएलपीए संरक्षित वन को अवैध निर्माण और अतिक्रमण से मुक्त करने का पाखंड आज कल जिला प्रशासन और वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। बीते शुक्रवार को अरावली में बड़ी तोडफ़ोड़ करने के लिए सुबह से ही भारी मात्रा में पुलिस बल और लंबा चौड़ा तोडफ़ोड़ दस्ता बुला लिया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नगर निगम ओल्ड फरीदाबाद के संयुक्त आयुक्त राजेश प्रजापति को बनाया गया। उन्हें तोड़ और उनकी जिम्मेदारी की जानकारी दो दिन पहले ही दे दी गई थी। संदर्भ वश पाठकों को बता दें कि ये वही राजेश प्रजापति हैं जिन्हें रिश्वत लेने के आरोप में विजिलेंस ने 2022 में गिरफ़्तार किया था। उस समय राजेश प्रजापति हिसार मंडलायुक्त के ओएसडी थे और बिना रिश्वत काम नहीं करते थे।

सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश का हवाला देकर अरावली में बेघर, गरीब-मज़दूर वर्ग की झुग्गियों को उजाडऩे वाले प्रशासनिक अधिकारी अरावली में सत्ता के दलाल, राजनेता और प्रशासनिक अधिकारियों के अवैध निर्माण गिराने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए। कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए शरीर रक्षा उपकरण पहने लाठी-डंडों, हथियार से लैस कई थानों का पुलिस बल सारे काम काज छोड़ कर भारी संख्या में अनखीर चौक पर पहुंच गया। नगर निगम, हूडा और डीटीपी के तोडफ़ोड़ दस्ते भी पहुंच गए। क्योंकि अभियान केवल दिखावे के लिए करना था तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रजापति महोदय नदारद हो गए, मोबाइल डू नॉट डिस्टर्ब पर लगा दिया और इंटरनेट डेटा भी बंद कर दिया कि कोई वाट्सएप संदेश करके न बुला ले, जाहिर है ये मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
खट्टर सरकार में भ्रष्ट अधिकारियों के सरगना पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर की मेहरबानी से बहाली और फरीदाबाद नगर निगम में संयुक्त आयुक्त पद हासिल करने वाला राजेश प्रजापति सत्ता की मंशा के खिलाफ कैसे जा सकते थे। दरअसल, अरावली में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के भू माफिया चेले चपाटों के फार्म हाउस मैरेज हॉल तो हैं हीं, कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, रिटायर्ड आईएएस प्रवीण कुमार के परिवारी सदस्य, चीफ टाउन प्लानर सतीश पाराशर की पत्नी सोनिया पाराशर सहित अनेक सीनियर-जूनियर आईएएस अधिकारियों की बेनामी संपत्तियां भी हैं।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार राजेश प्रजापति को सत्ता पक्ष से स्पष्ट संदेश दे दिया गया था कि अगर कार्रवाई की तो फिर तुम्हारे के खिलाफ विजिलेंस जांच तेज करा कर पद छीन लिया जाएगा। मोटा चढ़ावा चढ़ा कर और राजनेताओं से लेकर अनेक आला अधिकारियों की चरणवंदना करने के बाद बहाली पाए राजेश प्रजापति ने अपने कर्तव्य को किनारे रखते हुए नौकरी बचाने के लिए नेताओं के इशारे पर नाचना चुना। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के नहीं पहुंचने पर सैकड़ों पुलिस कर्मियों और कर्मचारियों का सैकड़ों घंटे का कार्य समय बर्बाद हुआ, यानी उस दिन उन कर्मचारियों के वेतन, आवागमन आदि पर सरकार का लाखों रुपये बेकार में खर्च हुआ और फोर्स तैनाती के कारण थानों व दफ़्तरों के काम बाधित हुए सो अलग।

एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट को दिखाने के लिए कागजों पर तो फोर्स बुला ली गई लेकिन बिना कार्रवाई रिपोर्ट कैसे दर्ज की जाएगी, यह सवाल भी अधिकारियों के सामने खड़ा था। मजबूर अधिकारियों ने गूजर-गोयल, नागर, अदलखा आदि राजनेताओं की मिन्नत कीं और दिखावे के लिए ही कहीं पंजा चलाने की अनुमति देने को कहा। काफी सोच विचार के बाद गूजर ने अपने पुराने दलबदलू चेले कैलाश बैंसला का फार्म हाउस ढहाने की अनुमति दी, नगर निेगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी बिंदे भड़ाना के खिलाफ खड़े होने से नाराज धनेश अदलखा ने भी कैलाश बैंसला को तबाह करने का आदेश दे दिया।
आ$काओं का आदेश मिलते ही दिन भर से गायब ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रजापति करीब पौने पांच बजे अनखीर चौक पर प्रकट हो गया और अवैध निर्माण पर धावा बोल दिया गया। संदर्भ वश सुधी पाठकों को बताते चलें कि मज़दूर मोर्चा कैलाश बैंसला के अवैध निर्माण के खिलाफ तब से लिखता आ रहा है जब से यह बनना शुरू हुआ था। तब कैलाश केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और सीमा त्रिखा की गोद में बैठा था इसलिए जानने बूझने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

लोकसभा चुनाव में कैलाश ने पलटी मारते हुए कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र प्रताप को खुला समर्थन दे दिया था। तब से ही माना जा रहा था कि गूजर कैलाश से बदला जरूर लेगा, शुक्रवार को प्रशासन के जरिए हिसाब बराबर कर दिया गया। समझने वाली बात यह है कि कैलाश बैंसला के फार्म हाउस से कुछ ही दूरी पर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का फार्म हाउस है, इसे अवैध बताते हुए 2021 में तोड़ा भी जा चुका है, सत्ता के चाटुकार ड्यूटी मजिस्ट्रेट प्रजापति को न तो वह नजर आया और न ही आसपास बने अधिकारियों, सत्ता के दलालों के मैरेज हॉल। तोडफ़ोड़ से बदला भी ले लिया गया और सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी में रिपोर्ट पेश करने का मसाला भी मिल गया। अब यदि सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी में कोई दम हो तो जिला उपायुक्त महोदय को बुला कर पूछ लें कि सारा दिन की प्रगति रिपोर्ट क्या है। इतना सारा अमला लेकर तुमने सारा दिन किया क्या? सत्ता पक्ष के फार्म हाउस, मैरेज हॉल पर कार्रवाई करने के लिए अब प्रशासन को न तो समय पर पुलिस बल उपलब्ध होगा, जिस दिन पुलिस बल होगा उस दिन तोडफ़ोड़ दस्ता नहीं मिलेगा।

हां, अगर यह कार्रवाई गरीब, मज़दूर और आम आदमी के खिलाफ होगी तो सब कुछ तुरंत ही उपलब्ध हो जाता है, जैसा कि बीते सोमवार को बडख़ल फ्लाईओवर के पास बनी अवैध बस्ती के लिए मिला। इस बस्ती के लिए आनन फानन नोटिस भी जारी किए गए और बिना मौका दिए तोडफ़ोड़ भी हो गई।

डबल इंजन सरकारों में खूब लूटी गई अरावली
राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि मोदी की भाजपा की यह खासियत है कि वे जिसे खत्म करना चाहते हैं उसके कल्याण और विकास की बातें करते हैं। मोदी-खट्टर के बीते ग्यारह साल के शासन में भाजपा सरकारें सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अरावली संरक्षण के ब्लू प्रिंट, शपथपत्र, कार्यवृत्त न जाने क्या-क्या प्रस्तुत कर चुकी है, इन दस्तावेजों को देख कर तो लगेगा कि आज तक अरावली का इससे बेहतर कोई कर ही नहीं सका है। इसके उलट बीते ग्यारह वर्षों में सत्ताधीश और उनके चहेते भू माफिया ने अरावली को बेरहमी से नष्ट कर वहां अपने फार्म हाउस, मैरेज लॉन आदि बना कर करोड़ों की कमाई कर डाली।

नेता लूट करें तो अधिकारी कहां पीछे रहने वाले थे, खट्टर-सैनी शासन में आला ओहदों पर रहे नौकरशाहों ने अपने परिवार के नाम यहां जमीनें खरीद कर आलीशान फार्म हाउस, रेस्ट हाउस बना रखे हैं। अखबारों में छपी सरकारी रिपोर्टों के अनुसार बीते ग्यारह साल में अरावली में सात हज़ार से अधिक कब्जे, अवैध निर्माण हुए। ताजा उदाहरण, पीएलपीए संरक्षित अनखीर में गोपाल गोशाला के पीछे 16 एकड़ घेर कर बनाई जा रही श्री राम गौशाला है। जानकारों के अनुसार संघ से जुड़े कोलकाता निवासी कोई गौरव बैनर्जी नामक व्यक्ति यह गौशाला बनवा रहा है। बताया जा रहा है कि विश्व हिंदू परिषद द्वारा पीएलपीए संरक्षित वन में चलाई जा रही गौशाला का प्रबंधन श्रीराम गौशाला के निर्माण में पूरा योगदान दे रहा है। यहां तक कि निर्माण कार्य में वही मज़दूर लगाए गए हैं जिन्होंने गोपाल गोशाला का निर्माण किया था।

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Mazdoor Morcha
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