फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों को लम्बी-लम्बी तारीखें दिए जाने की अनेकों शिकायतें मिलने पर इस संवाददाता ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर एके पांडे से इसका कारण जानने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी ऑपरेशन में तारीख तो क्या जरा भी समय व्यर्थ गंवाए बगैर तुरन्त ऑपरेशन किया जाता है। इसके लिए दो ऑपरेशन थियेटर (ओटी)भूतल पर इमरजेंसी वार्ड के साथ ही बनाए गए हैं। इसके अलावा एक ओटी गायनी (स्त्री रोग)विभाग में बनाया गया है। कुल मिलाकर ये तीनों ओटी 2437 चालू हालत में रहते हैं।
उक्त तीन ओटी के अलावा आठ अन्य ओटी द्वितीय अथवा तृतीय तल पर कार्यरत हैं। इन ओटी में योजनाबद्ध ऑपरेशन किए जाते हैं। कोई भी ऑपरेशन करने से पहले डॉक्टर की यह कोशिश रहती है कि चीर-फाड़ के बगैर ही, दवाओं से ही मरीज़ का काम चल जाए। अत्यंत जरूरी हालत में ही डॉक्टर ऑपरेशन की ओर जाता है। इसके लिए मरीज़ की हर तरह से पूरी जांच की जाती है, जैसे रक्तचाप, ईसीजी, मधुमेह आदि को जांचने के बाद एनिस्थीसिया (बेहोशी)वाले डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर के मरीज़ को ऑपरेशन की तारीख दी जाती है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि ऑपरेशन टेबल तक पहुंचते मरीज़ का रक्तचाप असंतुलन अथवा अन्य कोई ऐसी ही स्थिति बन जाती है तो ऑपरेशन टाल दिया जाता है और नई तारीख दे दी जाती है। सुपरस्पेशलिटी ऑपरेशनों में किसी प्रकार की जल्दबाज़ी आम तौर पर नहीं की जाती। इसके लिए भी पूरी योजना एवं सम्बन्धित जांच पड़ताल आदि मुकम्मल होने के बाद ही मरीज को तारीख दी जाती है। डॉक्टर पांडे ने ये स्वीकार किया कि यहां पर मरीज़ों की भीड़ भी कम नहीं है। 510 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में अब 900 के आस-पास मरीज़ दाखिल रहते हैं। इसी तरह ओपीडी में 1500 मरीजों की कल्पना के विरुद्ध चार से पांच हजार मरीज़ प्रति दिन ओपीडी में आते हैं। जाहिर है ऐसे में सेवाओं का कुछ हद तक बाधित होना अनिवार्य है। इससे निपटने के लिए अगले एक-डेढ़ महीने में दो और ओटी चालू हो जाएंगे। इसके साथ-साथ स्टा$फ की कमी को पूरा करने के लिए मुख्यालय से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है।
‘मज़दूर मोर्चा’ पहले भी कई बार लिख चुका है कि मौजूदा अस्पताल मरीज़ों की बढ़ती संख्या को झेल पाने में असमर्थ है। इसके लिए बीते तीन साल से 500 बेड की नई बिल्डिंग बनाने की मांग मज़दूरों की ओर से की जाती रही है। बीते अक्टूबर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसी परिसर में नई बिल्डिंग की आधारशिला के डिजिटल शिलान्यास का नाटक खेला गया था, लेकिन दुख की बात है कि छ: माह बीत जाने के बावजूद अभी तक एक ईंट भी नहीं लग पाई। इसके पीछे कॉर्पोरेशन मुख्यालय में बैठे वे जन विरोधी एवं हरामखोर अधिकारी हैं जो मंत्री के चाहते हुए भी काम में रोड़े अटकाना अपना परम कर्तव्य समझते हैं।
संदर्भवश यह जान लेना भी जरूरी है कि $फरीदाबाद का यह अस्पताल न केवल स्थानीय मज़दूरों को सेवाएं दे रहा है बल्कि मानेसर, गुडग़ांव, नोएडा व दिल्ली तक से आने वाले मरीजों की यहां भरमार रहती है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में तो पूरे हरियाणा, हिमाचल व अन्य राज्यों तक के मरीज़ भी यहां इलाज के लिए भेज दिए जाते हैं। इसका मूल कारण मुख्यालय में बैठे उन्हीं अधिकारियों की हरामखोरी है जो दिल्ली, नोएडा व गुडग़ांव जैसे अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रहे। विदित है कि दिल्ली के बसई दारापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल की क्षमता 600 बिस्तरों की होने के बावजूद मात्र 250-300 मरीजों को ही रखा जाता है, जाहिर है शेष मरीजों को $फरीदाबाद की ओर अथवा अन्यत्र कहीं खदेड़ दिया जाता है।
सेक्टर आठ स्थित ईएसआई अस्पताल तथा इससे जुड़ी 14 डिस्पेंसरियों को हरियाणा सरकार चलाने का दावा तो करती है, परन्तु न तो खुद चला पा रही है और न ही इसे छोड़ कर कॉर्पोरेशन के हवाले करती है। ऐसे में कॉर्पोरेशन को स्वत: ही इसे राज्य सरकार से छीन कर शीघ्रातिशीघ्र मेडिकल कॉलेज से जोड़ देना चाहिए। संदर्भवश सेक्टर आठ के अस्पताल में बीते करीब नौ माह से रेनोवेशन का काम चल रहा है। इसमें दो नए ओटी बन रहे हैं। बजट की सही जानकारी तो कोई दे नहीं रहा लेकिन समझा जा रहा है कि इस पर 23 करोड़ की बंदरबांट हो रही है।