आगामी विधानसभा चुनावों में घोर मज़दूर विरोधी किसान विरोधी भाजपा का सूपड़ा साफ़ करो !!

आगामी विधानसभा चुनावों में घोर मज़दूर विरोधी किसान विरोधी भाजपा का सूपड़ा साफ़ करो !!
September 23 17:34 2024

क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा
“अगर कोई सरकार लोगों को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखती है तब यह लोगों का अधिकार ही नहीं चल्कि आवश्वक कर्तव्य बन जाता है कि ऐसी सरकार को उखाड़ फेंके. शहीद-ए-आजम भगतसिंह”

साथियो हरियाणा विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है. बेतहाशा मंहगाई में पिस रहे भयानक बेरोजगारी की मार झेल रहे हरियाणा के मेहनतकश लोग। अक्टूबर को मतदान करेंगे. पिछले 10 सालों से हरियाणा राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा संघ की सरकारें हैं. नंबर। हरियाणा नौन स्टीप हरियाणा नाम के विज्ञापनों से चुनाव घोषणा से एक महिना पहले से हर रोज ढोल-उमाकों के साथ बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणाएँ हो रही थी मानो पूरे 10 सालों में डबल इंजन वाली सरकार को जन-कल्याण के लिए अवसर हो ना मिला हो।

हर बार की तरह मजहब की डुगडुगी बजाकर हिंदुत्व को खतरे में बताया जाने लगा है. लोगों को आपस में बांटने में माहिर कॉर्पोरेट पन्ना सेठों के सबसे पसंदीदा ताबेदार दोंगी और भ्रए भाजपाई एक बार फिर हरियाणा के किसानों मजदूरों युवाओं खिलाडिय़ों को उगने के लिए निकल पड़े हैं. क्या हम ऐसा होने देंगे। हरगिज नहीं। हर तरह की बेईमानियाँ हेराफेरियां करने पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी हरियाणा का जागरुक अवाम लोकसभा चुनावों में स्पष्ट ऐलान कर चुका है हिन्दू-मुस्लिम वाली नफरती राजनीति हमें मंजूर नहीं आप लोगों की असलियत हम जान चुके आपके झूठ और पाखंडपूर्ण राष्ट्रवाद की कलई खुल चुकी आपकी पोर मजदूर-बिरोधी किसान-विरोधी महिला-विरोधी और खेल-बिरोधी सियासत हमें मंजूर नहीं उससे भी कड़ा संदेश हरियाणा का मेहनतकश अवाम भाजपा को 1 अक्टूबर को देने जा रहा है.

भाजपा की हकीकत यूँ तो पूरा देश ही जान चुका है लेकिन मजदूरों किसानों खिलाडियों का अपमान करने वाली भाजपा को हरियाणा के लोगों से बेहतर कोई नहीं जानता. यूँ तो मौजूदा पूंजीवादी निजाम में पांच सालों में मिलने वाले मतदान के अवसर से हमें बस यह चुनने का ही अवसर मिलता है कि आगामी 5 सालों में पूंजीपतियों की ताबेदारी कौन करेगा उनका मुंशी कौन चनेगा लेकिन पिछले 10 सालों के दौरान भाजपा की ‘डबल इंबन’ की सरकारों ने अपने कुक्रमों से यह साबित कर दिया है कि मजदूर किसान सैनिक तथा खिलाडियों का उनसे बड़ा दुश्मन कोई नहीं. लुटेरे कॉर्पोरेट की ताबेदारी करने में उनका मुकाबला कोई पार्टी नहीं कर सकती. इसमें कोई शक नहीं कि इस बार भी यदि भाजपा सरकार बनती है तो संविधान और नागरिक अधिकार गंभीर खतरे में हैं. अगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को हरियाणा की सत्ता से क्यों खींचकर बाहर किया जाना साहिए? इसके ठोस कारण मौजूद है. भाजपा-संघ देश की सभी पार्टियों में सबसे ज्यादा मज़दर-विरोधी हैं

1. आज तक आई सभी सरकारें मालिक-परस्त और मजदूर विरोधी ही रही हैं लेकिन मजदूरों का इतना बुरा वक्त कभी नहीं रहा कोई श्रम कानून लागू नही; मजदूरों के वेतन से हुई भविष्यानिधि और ईएसआईसी की कटौती भी मालिक उकार रहे हैं. सबसे दुखद श्रम विभाग स्पष्ट कहता है उन्हें हरियाणा सरकार का लिखित आदेश है मालिक कुछ भी बरें आप बीच में मत आइये. कारखानों में जीवनावश्यक सुरक्षा के इंतेजाम नहीं; श्रम कानूनों का अनुपालन नहीं; लेकिन कोई सरकारी अधिकारी जांच नहीं करेगा दिल्ली के तीन ओर हरियाणा है मंहगाई दिल्ली से भी ज्यादा है लेकिन न्यूनतम वेतन दिल्ली से 42 प्रतिशत कम !! यहीं है उद्योगपतियों को भाजपा द्वारा अर्पित व्यवसाय की सुगमता!

दुर्घटनाओं में हर रोज मजदूर मर रहे हैं उनके हाथ-पैर-टांग कट रहे हैं जर्जर बायलर फट रहे हैं लेकिन कहीं कोई जांच नहीं. काम के घंटे मतलब जब तक मालिक कहे नीचे मुंडी कर काम करते जाओ. बलिदानों कुर्बानियों से हांसिल मजदूरों के 44 अधिकार एक झटके में छीनकर लेबर कोड थमा दिए यह हे भाजपाई विकास का असली चेहरा. यूनियन बनाने वालों को गद्दारी कह कर मालिक पुलिस से पिटवाते हैं. बिना चक्रह चलाए उन्हें काम से निकाल दिया जाता है. यूनियन रजिस्ट्रेशन छोडि़ए रजिस्टर्ड यूनियनों का रजिस्ट्रेशन रह किया जा रहा है. हक की आवाज उठाने वाले मजदूरों को बौन्सरों से पिटवाया जाता है मालिकों को छंटनी न्यूनतम वेतन ओवरटाइम और बोनस भी ना देने की छूट है. हर जगह ठेका मजदूरों को निचोड़ा जा रहा है. किस मुह से मजदूरों से चोट मांग रही है. भाजपा? अमानवीय नारकीय जीने को मजबूर मांजदर मजहब के आधार पर बंटने से इंकार कर भाजपा को करारा सबक सिखाने का मन बना चुके हैं.

ऐसी बेरोजग़ारी हरियाणा में पहले कभी नहीं रही
“नंबर 1 हरियाणा” और “नॉन-स्टॉप हरियाणा” जैसी लफ्फाजियों से अब कोई भी गुमराह नहीं होता किसी को नशा नहीं चढ़ता ये दोनों नारे दरअसल हरियाणा के उद्योगपतियों के लिए हैं जिनके मुनाफ़े बेतहाशा बढ़ रहे हैं जिनकी पूंजी की चीं अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है जो भाजपा के लिए अपनी तिजोरियां खोल दे रहे हैं “अमृत काल” तो उन्हीं का आया है. भाजपा आंकड़ों के फर्जिवाड़ों के लिए कुख्यात है. फिर भी सरकारी संस्था एनएसएसओ के अनुसार हरियाणा में 15 से 29 वर्ष की आयु के 17.5 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं भाजपा ने जितने युक्कों को रोजगार दिया है उनसे कही ज्यादा का छीन लिया है. 2014-15 में जब भाजपा सत्ता में काबिज हुई थी हरियाणा में बेरोजगारी दर 3.3 प्रतिशत थी हर साल मज़दूरों की हर झोंपड़ी अवैध है; उनका जीवन ही अवैध है. रेलवे पटरियों गटर गंदे नालों के किनारे जहाँ भी मज़दूर किसी तरह जिंदा हैं उन्हें भी उजाड़ा जा रहा है. ‘सुई से जहाज तक और अनाज से ताज़ तक’ अपनी मेहनत से हर उत्पादन और निर्माण करने वाले मज़दूरों के जीवन को ही अवैध बना दिया गया है. खोरी बस्ती जमाई बस्ती संजय नगर और ना जाने कितनी झुग्गी बस्तियां उजाड़ दी गईं लेकिन सरकारी बुलडोजऱ अरावली पर छाए असंख्य फार्म हाउस बैंक्वेट हाल कॉलेज युनिवेर्सिटी की ओर एक क़दम नहीं बढ़ा यही है भाजपा का राष्ट्रवाद !!

भाजपा सरकार घोर किसान-विरोधी और सैनिक विरोधी है
2022 तक किसानों की आय डबल करने वाली नवंबर 2021 में किसानों की मांगों मान लेने वाली अपमानजनक ‘अग्निवीर’ योजना पर पुनर्विचार करने वाली भाजपा के लिए वादे करके पलट जाना कोई बात नहीं. जुमले फेंककर लोगों को ठगना ही उनकी फि़तरत है. वह चाहती है चुनाव के बाद उनके वादों को लोग भी भूल जाएँ!! हरियाणा के किसान ऐतिहासिक किसान आंदोलन की अगली कतार में रहे हैं. वे सड़कों पर आकर लडऩा जानते हैं. भाजपा की फि़तरत को उनसे अच्छा कोई नहीं जानता. प्रदेश से भाजपा का सूपड़ा साफ़ करने का फैसला ले चुके हरियाणा के किसान । अक्टूबर का इंतेज़ार कर रहे हैं.

भाजपा देश की सबसे ज्यादा महिला-विरोधी पार्टी है.
पिछले स्वतंत्रता दिवस पर जब मोदी जी लाल किले की प्राचीर से हाथ लहराते हुए महिला सम्मान का ज्ञान बांट रहे थे तब गुजरात के उनके सिपहसलार गर्भवती बिलकिस बानो के बलात्कारियों नृशंस हत्यारों को जेल से छुड़ा रहे थे. इस साल 15 अगस्त को महिला गौरव की लफ्फाज़ी के वक़्त निर्भीक जन-पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के हत्यारे बलात्कारी रामरहीम तथा महाठग बलात्कारी आसाराम को जेल से छोड़े जाने की तैयारियां चल रही थीं. क्या लोग इनकी असलियत नहीं जानते? कथुवा से हाथरस: गुजरात टेक्निकल युनिवेर्सिटी से बनारस तक हर जगह भाजपा बलात्कारियों के साथ ही खड़ी नजऱ आती है. इनका असली संविधान मनुस्मृति दरअसल महिलाओं और दलितों को बहुत हीन तुच्छ मानता है.

दुनिया में देश का परचम लहराने वाली लाड़ली बेटियों खिलाडिय़ों का अपमान नहीं सहेंगे अपने दम-खम और ज़िद से हरियाणा के गावों से निकलीं बेटियों ने दुनियाभर में अपने देश का गौरव बढ़ाया है परचम लहराया है. उनका यौन शोषण जुल्म-ओ-जबर करने वाले लंपट ठग बृज भूषण को संरक्षण देना बेशर्मी की इन्तेहा है. उसे बचाने के लिए विनेश फोगाट और साक्षी मलिक को जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा घसीटे जाने वाले दृश्य को कौन भूल सकता है? भाजपा बहादुर महिला खिलाडिय़ों पर जुल्म करने वालों को संरक्षण देने की गुनहगार है. पेरिस में विवादस्पद तरीक्ते से गोल्ड मैडल से महरूम हो चुकी विनेश के सम्मान में उमड़ा जन-सैलाब दरअसल हरियाणा के लोगों की भावनाओं का सैलाब है जो आगामी चुनावों में मत पेटियों से बाहर निकलने वाला है.

शिक्षा और स्वास्थ्य माफिय़ाओं के हवाले है.
शिक्षा गरीबों के बच्चों से दूर जा चुकी है. हरियाणा की भाजपा सरकार को गरीबों के बच्चों की शिक्षा की इतनी चिंता है कि 3500 सरकारी स्कूल बंद कर डाले हैं. इंजीनियरिंग मेडिकल की पढाई और निजी चमचमाते अस्पतालों में इलाज तो अब मध्यवर्ग की हैसियत से भी बाहर हैं मेहनतकशों मज़लूमों के बच्चे जिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों में अक्षर ज्ञान हांसिल कर लिया करते थे ‘अंगूठा छाप’ की ज़िल्लत से बच जाते थे उन्हें भी बंद किया जा रहा है. शिक्षा-पाठ्यक्रमों में वैज्ञानिक सोच-समझ तर्क-विवेक विकसित करने वाले पाठ्यक्रमों को विकृत कर उनमें बेहूदा वाह्यात धार्मिक गपोड़े घुसेड़े जा रहे हैं. शिक्षा-स्वास्थ्य माफिय़ा को लूट की ऐसी छूट कभी नहीं रही.
हर चौराहे पर शराब के ठेके; भाजपा आखिर चाहती क्या है?

हर चौराहे पर शराब की चमचमाती दुकानें और नशे के सारे पदार्थों की भरमार; समाज को नशाखोरी में डुबोने की साज़िश है. आकर्षक जगमगाहट उत्सव जैसे माहौल में स्कूल-कॉलेज के नजदीक हाईवे जंगल हर जगह शराब ही शराब बच्चे क्या सीखेंगे? सरकारी जमीनों पर शराब के मॉल शराब की होम डिलीवरी दफ्तरों में भी शराब; भाजपा सरकार की शराब नीति ने घर-घर में शराबी नशेड़ी पैदा कर डाले हैं बेरोजग़ार दिशाहीन हताश युवाओं को शराबी-नशेड़ी बनाने की साज़िश को नाकाम ना किया गया तो आने वाली पीढ़ी की मुकम्मल बर्बादी निश्चित है नशे और फूहड़ बुर्जुआ संस्कृति का अपराध से खासतौर पर महिलाओं पर हो रही बेइंतेहा हैवानियत से बिलकुल सीधा संबंध है.

सामाजिक भाई-चारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब पर हमले को नाकाम करो और हमारी गौरवशाली गंगा-जमुनी तहजीब को भाजपा से गंभीर खतरा है. बेरोजग़ारी कंगाली बहन-बेटियों पर भूखे भेडिय़ों की तरह टूट पडऩे वाली वारदातों पर हिंदुत्व के स्वयंभू

सामाजिक भाई-चारे ठेकेदारों को गुस्सा क्यों नहीं आता? इनमें भी तो अधिकांश हिन्दू ही हैं. इससे इनकी भावनाएं क्यों आहत नहीं होतीं? यह गिरोह हर वक़्त हिन्दू-मुस्लिम ही क्यों करता रहता है? यह दरअसल समाज को दो-फाड़ कर जीवन-मरण के मुद्दों से ध्यान भटकाकर देश को इनके आक़ा अडानी-अंबानी को लूट के लिए अर्पित करने की साज़िश है. अब भी अगर नहीं समझे तो शायद आगे मौक़ा मिले ही ना. इतिहास गवाह है; नागरिक-संवैधानिक अधिकार छीनकर फ़ासीवादी दुर्दात खूनी शासन बिलकुल इसी तरह क़ायम हुए हैं. भाजपा-संघ किसी भी राज्य को मणिपुर बना सकते हैं.

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Mazdoor Morcha
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