किसी की नजरों में चढऩे को….

किसी की नजरों में चढऩे को….
February 14 07:23 2026

डॉ रामवीर 
किसी की नजरों में चढऩे को
गिर जाते हैं लोग
चमचागिरी का उन्हें भयावह
लग जाता है रोग।

चमचागिरी में निरे झूठ का
ही होता है प्रयोग
धीरे धीरे सही समझ का
हो जाता है लोप।

निशिकान्त दुबे, हेमन्ता
मोदीजी के नौकर
राजनीति के सर्कस में ये
बने हुए हैं जोकर।

जोकर जो करता है उस पर
हंसना है स्वाभाविक
दयापात्र हैं जो जोकर को
मानें देश का नाविक।

बहुत दिनों से देख रही है
जनता देश में सर्कस
उकताए दर्शक चिल्ला रहे
अब तो माफ करो बस।

कवि सर्कस स्वामी को करना
चाहता है आगाह
और तमाशा बन्द करने की
दे रहा उचित सलाह।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles