फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में बयान दिया था कि अवैध रूप से सार्वजनिक भवनों पर बैनर पोस्टर फ्लैक्स चिपकाना हरियाणा संपत्ति विरूपण कानून और हरियाणा नगर पालिका अधिनियम के तहत गैर कानूनी है।
उन्होंने ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ मेगा अभियान चलाने का एलान किया था। विपुल गोयल ने ऐलान तो कर दिया लेकिन उनके अपने ही शहर और विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर सबसे ज्यादा उनकी ही पार्टी भाजपा के बैनर-पोस्टर लगे हैं। बिजली के खंभों पर पोस्टर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है लेकिन भाजपा के छुटभैये नेताओं के पोस्टर लगभग हर खंभे पर टंगे हुए हैं। मंत्री के आदेश पर नगर निगम ने अवैध बैनर पोस्टर तो फाडऩे शुरू कर दिए हैं लेकिन सत्तापक्ष के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।
एक्सईएन सुशील ठाकरान ने बताया कि तीनों जोन में रोजाना एक हज़ार से अधिक बैनर पोस्टर फाड़े जा रहे हैं। छुटभैये भाजपाइयों के बैनर पोस्टर लगे होने के सवाल पर वह चुप्पी साध गए। निगम के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नौकरी कर लेने दो जी, सड़कछाप टाइप के अराजकतत्व भी कृष्णपाल गूजर, विपुल गोयल, धनेश अदलखा, राजेश नागर आदि की फोटो के साथ अपने पोस्टर लगवा रहे हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जा पा रही क्योंकि ये किसी न किसी नेता के यहां जाकर खड़े हो जाते हैं। यहां तक कि मंत्री के कार्यालय से से भी फलाने का बैनर-पोस्टर न हटाए जाने के फोन आ जाते हैं।
एक अन्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपाई बैनर पोस्टर को किसी धार्मिक कार्यक्रम या पर्व से जोड़ कर बनवाते हैं, इन्हें उतारने पर जनता की भावनाएं आहत होने और माहौल खराब होने का भय दिखाया जाता है। गुंंडई इतनी है कि विज्ञापन की फीस चुकाने वाली पार्टी के यूनीपोल, गैंट्री पर कब्जा कर भाजपाई जबरन अपना विज्ञापन लगवा रहे हैं। कार्रवाई करने पर सत्ता की धौंस दिखाते हैं, ऐसे भाजपाई विज्ञापन दाताओं का तो नुकसान कर ही रहे हैं नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं।
नगर निगम के सूत्र कहते हैं कि मंत्री के बयान से लूट कमाई करने वाले कर्मचारियों की सहालग आ गई है। ये कर्मचारी चुन चुन कर विज्ञापन हटाने की कार्रवाई कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार शहर में अवैध विज्ञापनों में से 70 से 80 प्रतिशत विज्ञापन शाखा के अधिकारियों की जेब गर्म करने के कारण उनकी मूक सहमति से लगे हुए हैं, रोजाना जो हजार- आठ सौ विज्ञापन फाड़े जा रहे हैं ये वही हैं जिनका खर्चा पानी विज्ञापन शाखा को नहीं पहुंचा। एक्सईएन दावा कर रहे हैं कि रोजाना लगभग एक हज़ार बैनर पोस्टर फाड़े जा रहे हैं लेकिन लगाने वालों को न तो नोटिस दिया जा रहा है और न ही जुर्माना लगाया जा रहा है, वजह बहुत साफ है, लेन-देन कर मामला सुलटाया जा रहा है। जिन जोन में अधिकतर अवैध विज्ञापन ही हैं उनमें अधिकारी मंत्री के आदेश का हवाला देकर कुछ दिन के लिए विज्ञापन उतरवा रहे हैं, मामला ठंडा पडऩे के बाद फिर काम चालू हो जाएगा। जानकार लोग मंत्री के बयान को संघ-भाजपा की उस नीति से जोड़ कर देख रहे हैं जिसके तहत विपक्षी दलों के नेताओं को प्रचार-प्रसार से वंचित कर जनता के जहन से उनकी छवि धूमिल की जाती है। उनका तर्क है कि विधानसभा चुनाव में जब आचार संहिता लागू हुई तो प्रशासन ने कांग्रेस, इनेलो, जजपा आदि पार्टियों के नेताओं के बैनर पोस्टर आनन फानन फाड़ डाले लेकिन भाजपा नेताओं के बैनर तब तक नहीं फाड़े गए जब तक उनके खिलाफ शिकायत न की गई।
सी विजिल एप पर सबसे ज्यादा शिकायतें भाजपा नेताओं के बैनर पोस्टर की ही आई थीं। यह केवल फरीदाबाद में नहीं पूरे हरियाणा में हुआ था। सत्ता में आने के बाद भाजपाई इस नीति को मजबूती से लागू कर रहे हैं, यही कारण है कि मेगा अभियान के बावजूद पूरा शहर भाजपा नेताओं के बैनर पोस्टरों से पटा पड़ा है। मंत्री विपुल गोयल यदि सच में अवैध विज्ञापनों के खिलाफ हैं तो सबसे पहले अपने गृह जनपद में भाजपाइयों के अवैध विज्ञापनों को उतरवाने का आदेश जारी करें।