कब तक जनता को बहकायेंगे डायरेक्टर डॉ. गोले

कब तक जनता को बहकायेंगे डायरेक्टर डॉ. गोले
July 29 18:32 2022

श्री अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज कथा

बल्लबगढ़ (म.मो.) ‘मज़दूर मोर्चा’ के गतांक में श्री अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज से सम्बन्धित समाचार में बताया गया था कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉ. एवं अन्य स्टाफ हैं और न ही आवश्यक साजो सामान। उसके बावजूद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डायरेक्टर गौतम गोले पूरे इलाके में ढिंढोरा पीट रहे हैं कि इलाज करा लो-इलाज करा लो।

उक्त समाचार के जवाब में डॉ. गोले का एक बयान मीडिया में आया है कि उनके पास 10 डॉक्टर हैं, एक्सरे मशीन भी है लेकिन उसे चलाने वाला कोई नहीं है, अल्ट्रासाऊंड मशीन भी जल्द चालू हो जायेगी, लैबोरेट्री टेस्टों के लिये मरीजों को बीके अस्पताल भेजा जाता है। यही सब बात तो ‘मजदूर मोर्चा’ भी कह रहा है, डॉ. गोले क्या नई बात बता रहे हैं? एक्सरे मशीन का क्या लाभ जब उसे कोई चलाने वाला ही नहीं? जब मरीजों को बीके अस्पताल ही जाना है तो आपके मेडिकल कॉलेज में क्यों आयेंगे?

जनता को बेवकूफ बनाने वाली सबसे बड़ी बात उन्होंने यह बताई थी कि जब एनएमसी से उन्हें स्वीकृति पत्र मिल जायेगा तब वे तमाम आवश्यक प्रबन्ध इस अस्पताल में कर देंगे। जनसाधारण को भले ही डॉ. गोले बहका लें लेकिन जानकारों को नहीं बहका सकते। एनएमसी के जिस स्वीकृति पत्र की बात डॉ. गोले कर रहे हैं उसके लिये उन्होंने बीते सितम्बर में आवेदन किया था, ऐसा ही आवेदन उन्होंने 2020 में भी किया था। इन आवेदनों के आधार पर दोनों बार एनएमसी ने उनके संस्थान का निरीक्षण किया था। दोनों बार ही एनएमसी ने संस्थान की कमियों की एक लम्बी-चौड़ी लिस्ट इन्हें थमा दी थीं।

एनएमसी के नियमानुसार इस अस्पताल में 300 बेड का 60 प्रतिशत यानी कि 180 मरीज़ अस्पताल में दाखिल रहने जरूरी हैं, इसी तरह 30 बेड का कैजुअल्टी वार्ड जिसमें 18 मरीजों का दाखिल रहना जरूरी है। इसके अलावा ओपीडी में प्रति दिन 500 मरीजों का आना भी जरूरी है। ये ऐसी न्यूनतम शर्तें हैं कि जिनके पूरा हुए बगैर एनएमसी मेडिकल कॉलेज में दाखिले का स्वीकृति पत्र जारी नहीं कर सकता। किसी भी अस्पताल में ये तमाम शर्तें केवल तभी पूरी हो सकती हैं जब वहां पर इलाज की समुचित व्यवस्था हो। विदित है कि इसी अस्पताल में, जब यह प्राईवेट था, सारी आवश्यकतायें पूरी हो चुकी थीं।

सरकारी संस्थान होने के नाते एनएमसी इस संस्थान को भी स्वीकृति पत्र जारी कर सकता है यदि भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय यह आश्वासन दे कि तमाम शर्तें, छात्रों के दाखिल होने से पूर्व पूरी कर ली जायेगी। यह मंत्रालय इस तरह का आश्वासन केवल तब देता है जब सम्बन्धित राज्य सरकार यानी कि खट्टर सरकार खुद जाकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इस बाबत आश्वस्त करे। अब देखना यह है कि खट्टर सरकार इस मेडिकल कॉलेज को चलाने में कितनी रुचि लेती है।

view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles