फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ईमानदारी का ढोल पीटने की आड़ में भ्रष्टाचारी अधिकारियों को संरक्षण और उन्हें लूट कमाई की खुली छूट देने वाले खट्टर की राह पर सैनी सरकार भी चल पड़ी है। सरकार की अच्छी छवि बनाने के लिए चुनाव से पहले जिन भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने का दिखावा किया गया था, सत्ता में आने के बाद उन्हें फिर से लूट कमाई वाली उनकी मनपसंद जगहों पर भेजना शुरू कर दिया गया है। नगर निगम में भ्रष्टाचार के कीर्तिमान गढऩे वाले चीफ टाउन प्लानर सतीश पाराशर को फिर से यह पद परोस दिया गया है ताकि वह अपने पिछले कार्यकाल में किए गए काले कारनामों पर परदे डाल सके और सत्ता के प्रिय बिल्डर, भूमाफियाओं की मंशा के अनुरूप गड़बडिय़ां कर अपनी और राजनेताओं की जेबें भर सके।
सतीश पाराशर को नगर निगम के चीफ टाउन प्लानर का पद दोबारा नहीं मिला है। फरीदाबाद में वरिष्ठ नगर योजनाकार रहे पाराशर को सीएम खट्टर ने अप्रैल 2018 में भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर गुडग़ांव भेज दिया था। उसने बसेलवा कॉलोनी में डेयरी के लिए हितेंद्र नाम के युवक को अलॉट प्लाट फर्जी जीपीए लगाकर मातहत महिला कर्मचारी सुनीता डागर के नाम ट्रांसफर कर दिया था। इस मामले में ओल्ड थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इससे पहले जनवरी 2014 में एसटीपी रहते हुए बिना किसी दस्तावेज के ही हार्डवेयर कंपनी की जमीन के नौ सीएलयू किए थे। जांच में पाया गया था कि सीएलयू के लिए जरूरी दस्तावेज जैसे रजिस्ट्री की प्रति, प्लॉट का रकबा व चौहद्दी निर्धारण और सबसे प्रमुख सीएलयू के लिए तहसीलदार का अनुमोदन पत्र कुछ भी नहीं लगाया गया था। विजिलेंस जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ अगस्त 2019 में केस दर्ज कराया गया था।
सत्ता को साधने में माहिर पाराशर ने आला अधिकारियों को मलाई चटा कर सितंबर 2019 में चीफ टाउन प्लानर पद और फरीदाबाद में तैनाती भी हासिल कर ली थी। उसकी पदोन्नति विवादों से घिरी हुई थी, सीएम खट्टर पर आरोप लगा था कि चुनाव संहिता लागू होने के बावजूद बैक डेट में प्रमोशन दिया गया।
मोटा चढ़ावा चढ़ाकर चीफ टाउन प्लानर का पद पाने की भरपाई करने के लिए पाराशर ने जमकर भ्रष्टाचार किया। दस्तावेजों में हेरफेर कर कई राजनेताओं के चहेतों के लिए सूरजकुंड-अरावली के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में फार्म हाउस, बैंकट हॉल के लिए जमीन का बंदोबस्त किया था। यही नहीं कई बड़े बिल्डरों से मिलीभगत कर नगर निगम को करोड़ों रुपये राजस्व का चूना भी लगाया। न्यायालय के सख्त प्रतिबंध के बावजूद संरक्षित अरावली में फार्म हाउस बनाने के लिए सशर्त सीएलयू दे दी। यही नहीं नगर निगम के मालिकाना हक का केस हाईकोर्ट में पेंडिंग होने के बावजूद उसने विपक्षी को उसी जमीन की सीएलयू जारी कर दी। ज़ाहिर है कि इस सबके लिए उसने पार्टियों से बहुत मोटी उगाही की थी। यहां तक कि उसने खुद भी अरावली में एक फार्म हाउस बना डाला। अपनी इसी प्रतिभा के कारण सतीश डीलर राजनेताओं, बिल्डर, भूूमाफियाओं का चहेता था।
2023 में भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर उसे एक बार फिर गुडग़ांव भेज दिया गया था, लेकिन उसके जाने से शहर के भू माफिया नेताओं का काम फंसने लगा, तो खट्टर सरकार ने दिसंबर में उसे फिर से फरीदाबाद का अतिरिक्त चार्ज सौंप दिया था। नगर निगम के भ्रष्टाचार का मामला चुनाव में मुद्दा न बने इसलिए एक बार फिर उससे फरीदाबाद का चार्ज वापस ले लिया गया था।
चुनाव में भाजपा सत्ता में आई तो सतीश ने एक बार फिर आला अधिकारियों और सत्ता के नेता-मंत्रियों को साधना शुरू कर दिया। चढ़ावा और चरणवंदना कर उसने फिर से फरीदाबाद का पद हासिल कर लिया। मंगलवार को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अरुण गुप्ता ने पत्र जारी कर सतीश पाराशर को नगर निगम का चीफ टाउन प्लानर पद सौंप दिया। वह गुडग़ांव और फरीदाबाद दोनों जगह अपनी भ्रष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करेगा।