दो सौ करोड़ के एमसीएफ घोटाले को कब परवान चढ़ाएगी विजिलेंस

दो सौ करोड़ के एमसीएफ घोटाले को कब परवान चढ़ाएगी विजिलेंस
December 09 11:10 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीट कर दस साल से सत्ता का मजा लूट रही भाजपा सरकार में शुरू हुई कोई भी विजिलेंस जांच पूरी ही नहीं हो पाई, ऐसे में दोषी को सजा दिलाना तो दूर की बात है। फरीदाबाद में विजिलेंस द्वारा नगर निगम के 200 करोड़ के घोटाले का खुलासा तो किया गया लेकिन लगभग पौने तीन साल बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं कर सकी है। ऐसे ही अन्य छोटे मोटे सैकड़ों केस हैं जिनका विजिलेंस ने खुलासा तो किया लेकिन उसके बाद जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

राज्य चौकसी ब्यूरो ने नगर निगम में बिना काम किए दो सौ करोड़ रुपयों की बंदरबांट किए जाने का खुलासा फरवरी 2022 में किया था। तब सीएम खट्टर ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों को नहीं बख्शे जाने का जुमला दोहराया था। विजिलेंस टीम ने जांच की तो 388 विकास कार्यों में अनियमितता और रुपयों की लूट पाई गई थी। तत्कालीन चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर, ठेकेदार सतबीरा और लेखा अधिकारी विशाल कौशिक सहित दस अधिकारियों की पूरी संलिप्तता पाई गई थी। निगम सूत्रों के अनुसार जांच जैसे आगे बढ़ी मामले में मंत्री मूलचंद शर्मा, पार्षद धनेश अदलखा और यहां तक कि केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की भी संलिप्तता की बात सामने आने लगी। अप्रैल 2022 में इस घोटाले में चार एफआईआर दर्ज की गईं। जांच में आईएएस अफसर सोनल गोयल, एम शाईन और अनीता यादव भी घोटाले में शामिल पाए गए, इस पर 2023 में एक और एफआईआर दर्ज की गई।

सत्ता पक्ष के नेताओं के नाम आते ही सरकार बैक फुट पर आ गई और खुद को पाक साफ साबित करने के लिए सरकार ने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के खास चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर, मंत्री मूलचंद शर्मा को चालीस लाख का चार पहिया वाहन गिफ्ट करने वाले ठेकेदार सतबीरा और विशाल कौशिक जैसे प्यादों की बली पर चढ़ा दिया, तीनों को जेल भेज दिया गया। सूत्रों के अनुसार तीनों को जेल भेजने के साथ ही आईएएस सोनल गोयल, एम शाईन, अनीता यादव और राजनेताओं को बचाने के लिए सीएम खट्टर से लेकर उनके प्रिय तत्कालीन प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने जांच को ठंडे बस्ते में डालने के भी इंतजाम कर दिए। नए सीएम सैनी ने भी भ्रष्ट खुल्लर का दामन कस कर थामे रखा है। चोरों का मौसा राजेश खुल्लर जब तक सत्ता में मौजूद है इन लुटेरों का कुछ नहीं बिगड़ सकता।

विजिलेंस ने भी सरकार की मंशा के अनुरूप तफ्तीश में खूब ढील की। जांच में फंसे आईएएस अफसरों से ऐसी आपत्तियां लगवाई गईं कि यह आज तक पूरी नहीं हो सकी हैं। घोटाले के मुख्य आरोपियों में एक आईएएस सोनल गोयल ने जांच रुकवाने के लिए हाईकोर्ट में सिविल रिट पिटिशन डाल दी। सरकार के इशारे पर चलने वाली न्यायपालिका ने भी भ्रष्टाचार के गंभीर केस में आईएएस की याचिका कुबूल कर जांच पर ब्रेक लगा दी।

विजिलेंस आज तक उनसे पूछताछ नहीं कर सकी। आरोपी होने के बावजूद सरकार उन्हें प्रमुख पदों पर बैठाती रही जबकि अशोक खेमका जैसे ईमानदार अधिकारी को खुड्डेलाइन ही रखा गया। जांच पूरी नहीं होने का फायदा उठाते हुए आरोपी डीआर भास्कर आदि जमानत पर बाहर आ गए। चर्चा है कि आरोपियों की सत्तापक्ष से डील हुई है कि वे जांच में नेताओं के नाम नहीं लेंगे बदले में उन्हें जेल नहीं जाने दिया जाएगा और धीरे धीरे केस कमजोर कर उन्हें बरी करवा लिया जाएगा। इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई या झूठ है, ये तो नहीं पता लेकिन जिस तरह विजिलेंस मामले को लटकाती जा रही है, उससे शक तो पैदा होता ही है।

ऐसा नहीं है कि विजिलेंस सिर्फ 200 करोड़ के घोटाले में ही शांत बैठी है। हाल ही में बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर में भी शिकायत पर कार्रवाई की गई थी। यह मामला भी पूर्व सीएम खट्टर के करीबी मेडिट्रिना अस्पताल प्रबंधन से जुड़ा है इसलिए यहां भी जांच की रफ्तार धीमी हो गई है।

कार्रवाई के नाम पर पहले तो हार्ट सेंटर को बंद कर दिया गया, एक-डेढ़ सप्ताह बाद उसे फिर से खोलने की इजाजत दे दी गई। होना तो यह था कि सेंटर खोलने से पहले सारे रजिस्टर, रिकॉर्ड और दस्तावेज कब्जे में ले लिए जाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया, यानी सेंटर प्रबंधन को सारे दस्तावेज अपने हिसाब से तैयार करने, रजिस्टर में बदलाव करने का मौका दिया गया। हालांकि मंगलवार को विजिलेंस टीम ने हार्ट सेंटर में पुराने रजिस्टर आदि रिकॉर्ड कब्जे में लिए लेकिन इन्हें पहले ही बदला जा चुका होगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता। प्रदेश में भाजपा की तीसरी बार सरकार आने पर सीएम सैनी ने भी खट्टर की तरह भ्रष्टाचार और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का झुनझुना बजाना शुरू कर दिया है। जानकारों के अनुसार उन्होंने भ्रष्टाचार के पुराने मामलों में कार्रवाई करने का आदेश दिया है लेकिन उनमें जो भाजपा की सरकार के पहले के हों। यानी सीएम सैनी ने बीते दस साल की भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों के दोषियों को अप्रत्यक्ष रूप से अभयदान दे दिया है। ऐसे में विजिलेंस भी शिकायत आने पर कार्रवाई कर शिकायतकर्ता को संतुष्ट कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है।

संयुक्त सचिव की औपचारिकता
बताया जा रहा है कि सीएम द्वारा पेंडिंग पड़े केस जल्द निपटाने और जांच जल्द पूरा करने के आदेश पर प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव, चौकसी ने सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिख कर उचित कार्रवाई की इच्छा जताई है। पत्र के अनुसार अक्सर यह देखा गया है कि विजिलेंस की ओर से भेजी गई जांच, रिपोर्ट, शिकायत, गुप्त सूचनाओं पर संबंधित प्रशासनिक विभाग कोई जवाब नहीं देते, या मामला सुलटा लिया गया है जैसा संक्षिप्त जवाब भेजा जाता है। सरकारी नियमों के विरुद्ध होने के बावजूद अक्सर प्रशासनिक विभागों का यही रवैया है। ऐसे में जांच प्रभावित होती है। सरकार के संज्ञान में यह मुद्दा आया है इसलिए सभी प्रशासनिक विभाग और उनके सचिवों से आशा की जाती है कि नियमों का सख्ती से पालन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
यह पत्र भी औपचारिकता मात्र ही लगता है, यदि गंभीर होता तो नियम का पालन नहीं करने पर संबंधित के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी पत्र में होती। यानी सारे कुएं में ही भांग घुली है, तो किससे उम्मीद की जाए।

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Mazdoor Morcha
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