फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियों के चलते ईएसआई कॉर्पोरेशन स्टाफ की भारी कमी के बावजूद हरियाणा की खट्टर सरकार ने एनएच तीन स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल से 22 सीनियर रेजिडेंट (डॉक्टरों) को तीन महीने के लिए झपट लिया है।
विदित है कि हरियाणा के सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल के चलते बीके अस्पताल सहित, जि़ले भर की तमाम डिस्पेंसरियों आदि के डॉक्टर काम पर नहीं आ रहे हैं। समस्या का उचित समाधान करने की अपेक्षा खट्टर सरकार ने ईएसआई कॉर्पोरेशन के डॉक्टरों को अपनी अस्थाई सेवा में 27 दिसम्बर से ले लिया है। ये डॉक्टर पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ-साथ मरीज़ों को भी देखते हैं। इनके चलते ईएसआई अस्पताल में आने वाले मरीज़ों को मिलने वाली सेवा में काफी सुविधा रहती है। कॉर्पोरेशन इन डॉक्टरों को करीब सवा लाख वेतन भी देता है।
जहां तक सवाल है मानवीय आधार का तो उन गरीब मज़दूरों के मानवीय अधिकार का क्या होगा जिनके खून-पसीने की कमाई से ईएसआई अस्पतालों का निर्माण व संचालन होता है। यदि खट्टर को जनता के मानवीय आधार की इतनी ही चिन्ता है तो अपने सरकारी डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने से पहले ही क्यों नहीं उनके साथ समझौता किया? दरअसल समय पर समझौता न करके सरकार यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि उसे हड़ताल की कोई परवाह नहीं है, मरीज़ मरते हैं तो मरें उनकी बला से। वैसे भी ईएसआई से झपटे गये ये डॉक्टर कोई बहुत अधिक कारगर साबित होने वाले नहीं हैं क्योंकि वे जिस माहौल से लाये गये हैं, बीके अस्पताल में कामयाब नहीं हो पायेंगे।