यह फर्जी डिग्री वाले इंजीनियरों को बचाने की कवायद तो नहीं

यह फर्जी डिग्री वाले इंजीनियरों को बचाने की कवायद तो नहीं
September 01 12:12 2024

फरीदाबाद नगर निगम के नये चीफ इंजीनियर बने विवेक सिंह

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
शहरी स्थानीय निकाय में फर्जी डिग्री के जरिए इंजीनियर बनने वालों के लिए मुसीबत बने अधीक्षण अभियंता विवेक सिंह को हाल ही में मुख्य अभियंता पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति से पहले पंचकूला मुख्यालय में बैठे विवेक सिंह को फरीदाबाद नगर निगम भेजा गया है, यहां वह चीफ इंजीनियर के खाली पड़े पद पर बैठेंगे। विवेक सिंह को चीफ इंजीनियर बनाए जाने के पीछे शहरी स्थानीय निकाय में बैठे और रिटायर हो चुके अनेकों फर्जी डिग्री धारक इंजीनियरों को राहत पहुंचाने की कवायद बताई जा रही है। चर्चा है कि विवेक सिंह को पदोन्नति देकर इस बात पर राजी कर लिया गया है कि वह फर्जी इंजीनियरों के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहा अपना केस वापस ले लेंगे।

बताते चलें कि विवेक सिंह ने वर्ष 2016 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका डाल कर शहरी स्थानीय निकाय में फर्जी डिग्री पर इंजीनियर बनने वालों को दी जाने वाली सभी सुविधाएं, पदोन्नति आदि वापस लिए जाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उड़ीसा लिफ़्ट इरिगेशन कॉर्पाेरेशन लिमिटेड बनाम रवि शंकर पात्रा व अन्य केस में सुनाए गए फैसले का हवाला दिया था। इस केस के फैसले मे सर्वाेच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों की दूरस्थ शिक्षा से हासिल की गई इंजीनियरिंग डिग्री को ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा अनुमोदित नहीं होने के कारण फर्जी करार दिया था। इस तरह की डिग्री से नौकरी पाने वालों को दिए जाने वाले सभी लाभ तुरंत वापस लेने, इस डिग्री के आधार पर सेवा लाभ जैसे पदोन्नति आदि को तुरंत वापस लेने का आदेश दिया था। विवेक सिंह ने यह केस उनका तबादला स्टेट काडर से म्यूनिसिपल काडर में किए जाने के कारण दायर किया था। तब से हाई कोर्ट में विचाराधीन यह केस यूएलबी निदेशालय के अधिकारियों के गले की फांस बना हुआ है। पूरे प्रदेश में फर्जी डिग्री वाले अनेक इंजीनियरों की यूएलबी में भर्ती की गई थी। फरीदाबाद नगर निगम में तत्कालीन एसडीओ दीपक किंगर, धर्म सिंह, आर एस शर्मा और आनंद स्वरूप की इंजीनियरिंग की डिग्रियां एआईसीटीई से मान्य प्राप्त नहीं थीं। इन सबको हटाने का अर्थ है कि भर्ती प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी किया जाना साबित होना। इसलिए इस केस को लगातार टालने के प्रयास किए जा रहे थे।

इसी दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2024 में सभी स्थानीय निकायों में तैनात इंजीनियरों की डिग्रियों के सत्यापन का फरमान जारी किया। फरीदाबाद में भी सभी इंजीनियरों को अपने मूल शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने थे, लेकिन न केवल फरीदाबाद प्रदेश कई अन्य नगर निकायों के अधिकारी तय समय सीमा में ये दस्तावेज जमा नहीं करवा सके थे। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार यूएलबी के आला अधिकारी खुद इस कवायद से बचना चाह रहे थे क्योंकि फर्जी डिग्री वाले अधिकतर इंजीनियर उनके लिए मोटी कमाई का बड़ा साधन हैं। अपने इन कमाऊ पूतों को बचाने के लिए ही विवेक सिंह को पदोन्नत कर उन्हें संतुष्ट करने का रास्ता निकाला गया है। चर्चा है कि उन्हें इस बात पर मना लिया गया है कि पदोन्नति मिलने के बाद वे अपना केस वापस ले लेंगे। यदि ऐसा होता है तो पूरे प्रदेश में कई फर्जी डिग्री वाले इंजीनियरों की नौकरी बच जाएगी, और जो रिटायर हो चुके हैं उनको भी पेंशन आदि का लाभ मिलता रहेगा।

इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि फर्जी डिग्री के बल पर बने इंजीनियरों के खिलाफ जो कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए थी वो एक कर्मचारी कर रहा है। क्या सरकार को विकास सिंह द्वारा दिए गए तर्क समझ में नहीं आ रहे, इस मामले में सरकार को किसी न्यायालय के आदेश का इंतजार क्यों है? दूसरा दुर्भाग्य ये है कि प्रदेश भर में फर्जी डिग्री के सहारे जो बवाल काटा जा रहा है उसे पिछले आठ वर्षों से हाईकोर्ट भी तमाशा बनाए बैठी है। दिन के उजाले की तरह इस स्पष्ट दिखाई दे रहे इस केस का फैसला तो बरसों की बजाय मिनटों में किया जा सकता है लेकिन हाईकोर्ट भी इसे निपटाने के बजाय लटकाए रखकर वकीलों की दुकानदारी चमका रही है।

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Mazdoor Morcha
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