उद्घाटन पर उद्घाटन की होड़, मंत्रियों के पास काम नहीं कुछ और

उद्घाटन पर उद्घाटन की होड़, मंत्रियों के पास काम नहीं कुछ और
February 12 13:09 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 12 स्थित टाउनपार्क के एक कोने में बनी छोटी सी लाइब्रेरी को लेकर हरियाणा सरकार के मंत्री विपुल गोयल तथा भारत सरकार के मंत्री कृष्णपाल गूजर ने अपनी-अपनी औकात दिखा दी। जुगाड़बाजी करके कृष्णपाल गूजर ने इसका उद्घाटन करने का समय रविवार दोपहर दो बजे का रखवाया था। लेकिन विपुल गोयल ने अपने समर्थकों सहित दो घंटे पूर्व ही, दोपहर 12 बजे इसका फीता काट कर उद्घाटन कर डाला। इसके बावजूद, कृष्णपाल भला कहां चुकने वाले थे, वे भी अपने लगवे-भगूओं सहित दो बजे उद्घाटन करने पहुंच गए। ‘हूडा’ अधिकारियों ने पुन: उद्घाटन के लिए एक फीता और बांध कर केन्द्रीय मंत्री से कटवा लिया।

इस नौटंकी के पीछे दोनों मंत्रियों के अपने-अपने तर्क हैं। विपुल का मानना है कि वे इलाके के विधायक तथा हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री होने के नाते, अपने क्षेत्र में तमाम तरह के उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के हकदार बनते हैं। दूसरी ओर कृष्णपाल होडल से लेकर फरीदाबाद तक की जनता द्वारा चुने गए सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री होने के नाते, इस पूरे क्षेत्र में तमाम तरह के उद्घाटन आदि करने पर अपना एकाधिकार समझते हैं। ऐसे में फिर इसी क्षेत्र में, हरियाणा सरकार के तीन मंत्री, नौ विधायक व अनेकों पार्षद कहां जाएंगे? वैसे भी कृष्णपाल गूजर का स्तर तो अब शहर की गलियों, नालियों व चौपालों आदि की मरम्मत के उद्घाटनों व शिलान्यासों तक आ पहुंचा है।

लाइब्रेरी के उक्त, जूठन छोड़े समान उद्घाटन के अलावा कृष्णपाल ने उसी दिन गांव झाड़सैंतली में गलियों, सीवर लाइन, पेयजल, चौपाल, बारात घर व स्टेडियम का शिलान्यास करके अपने अहम को संतुष्ट करना चाहा। इस तरह की नौटंकी करने से पहले कृष्णपाल यह पता कर लेते कि नगर निगम कहां और क्या काम करने जा रहा है, उसका कितना बजट है और काम कब तक शुरू होने वाला है? इसके बाद ही गूजर शिलान्यास करने पहुंचते। संदर्भवश सुधी पाठक जान लें कि यह सारा काम नगर निगम द्वारा कराया जाना है जो कि सीधे विपुल गोयल के आधीन आता है। जाहिर है कि उक्त सारे काम कब शुरू होंगे या नहीं होंगे, का फैसला तो विपुल गोयल के हाथ में रहेगा। गोयल की मर्जी के बगैर वहां एक ईंट भी लगने वाली नहीं है।

इस तरह के उद्घाटनों व शिलान्यासों के जरिए ये राजनेता जनता को बताना चाहते हैं कि उन्होंने समाज के लिए कितने बड़े-बड़े काम कर दिए हैं, वे नहीं होते तो ये सब नहीं हुए होते। लेकिन जनता इतनी भी मूर्ख नहीं है, वह सब जानती है कि उनसे वसूले गए भारी-भरकम टैक्स से ये सब काम तो होने ही होते हैं। हां, इनकी आड़ में राजनेता जो मलाई काटते हैं, अपने-अपने चहेतों को ठेके दिलाते हैं वह जनता से छिपा नहीं है। राजनेताओं के लिए उक्त नौटंकियां, मीडिया में सुर्खियां बन कर जनता में छाए रहने के लिए बहुत जरूरी समझी जाती हैं क्योंकि ये लोग वे मौलिक काम करने में पूर्णतया असमर्थ हैं जिनके द्वारा बेरोजगारी, गरीबी समाप्त करके जनता को बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें।

भाजपा की भीतरी कलह जिस तरह से इस मौके पर देखी गई है, कोई नई बात नहीं है। इससे पहले जब कृष्णपाल अपने 40 पार्षदों को हांक कर निगम के वरिष्ठ उपमेयर तथा उपमेयर के चुनाव के लिए गए थे तो अपना सा मुंह लेकर लौट गए क्योंकि विपुल गोयल इस चुनाव को नहीं चाहते थे। इतना ही नहीं विपुल गोयल के मंत्री बनने से पहले नगर निगम में कृष्णपाल की जो दादागिरी चलती थी वह लगभग बंद हो चुकी है। इस दोनों मंत्रियों के बीच की लागबाजी अब अंदरूनी न होकर खुले घमासान में बदल चुकी है। मजे की बात यह है कि डीपीआरओ द्वारा जारी किये गये प्रैस नोट में इस उद्घाटन को केवल कृष्णपाल द्वारा किया बताया गया है। इसमें विपुल गोयल के उद्घाटन का कोई जिक्र नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ कि हरियाणा सरकार इसे कृष्णपाल द्वारा उद्घाटित ही मानती है और उन्हीं के नाम का पत्थर भी लगा हुआ है।

जहां तक सवाल है लाइब्रेरी का यह एक बहुत बड़ा घोटाला है। इसमें अभी तक न तो कोई किताबें आई हैं और न ही ‘ईलाइब्रेरी’ वाली स्थिति यहां नजर आती है। इसके निर्माण पर हुए घोटाले की पूरी कहानी ‘मज़दूर मोर्चा’ के 30 जून 2024 को प्रकाशित की गई थी जिसे साथ के बॉक्स में दिया गया है।

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Mazdoor Morcha
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