विष्णु नागर बहुत लोगों को शायद याद हो कि जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार आई थी तो कहा गया था कि ‘दूसरी आजादी’ आ गई है, हालांकि यह
विष्णु नागर एक थे चड्डीश्वर। चड्डी जहां पहनना चाहिए, वहां तो पहनते ही थे मगर जहां नहीं पहनना चाहिए, वहां भी पहनते थे। उदाहरण के लिए उसे कमीज की तरह
विष्णु नागर इस आदमी ने इस देश के हिंदुओं के बड़े हिस्से को पागल बना रखा है। लोग रोजी-रोटी की चिंता छोड़, अब हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूंढने में
महामानव जी, देश की और हम सब की, आपसे जितनी तरह से और भी जितनी बार ऐसी-तैसी हो सके, करना ; बस एक काम करना, ‘विकसित भारत’ बनाने का संकल्प
विष्णु नागर यह किस्सा मेरी ससुराल देवास का है। रिटायरमेंट के बाद पति ने मकान, पेंशन सबकुछ पत्नी के नाम करवा दी।पेंशन मिलने के दो साल बाद पति ने पत्नी
विष्णु नागर कहते हैं प्रभु के नाम और रूप अनेक हैं मगर है वह एक। ईश्वर कहो तो वही,अल्लाह कहो तो वही, गॉड कहो तो वही, कुछ और कहो तो
विष्णु नागर ये तो उसके बड़े से बड़े विरोधी भी मानते हैं कि अपना सबसे बड़ा सेल्समैन वह खुद है। वह कुछ भी बेच सकता है!।जो है,वह भी और जो