वेद प्रिय यह शायद सन 1994 की बात रही हो। मैं और सतबीर चमत्कारों की वैज्ञानिक व्याख्या पर एक पांच दिवसीय कार्यशाला लेने बीकानेर गए थे। हमारी ठहरने की व्यवस्था