पंकज पराशर सदियों से दिल ने सितम सहे हैं और सदियों से मोहब्बत ने हिज्र को भोगा है, मगर ऐसे अहमद फऱाज़ कम ही हुए हैं, जिन्होंने जब मोहब्बत को