मंगलेश डबराल अंतत: हमारा शत्रु भी एक नए युग में प्रवेश करता है अपने जूतों कपड़ों और मोबाइलों के साथ वह एक सदी का दरवाज़ा खटखटाता है और उसके तहख़ाने
मंगलेश डबराल तानाशाहों को अपने पूर्वजों के जीवन का अध्ययन नहीं करना पड़ता। वे उनकी पुरानी तस्वीरों को जेब में नहीं रखते या उनके दिल का एक्स-रे नहीं देखते। यह