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Tag "manglesh dabraal"

नए युग में शत्रु

मंगलेश डबराल अंतत: हमारा शत्रु भी एक नए युग में प्रवेश करता है अपने जूतों कपड़ों और मोबाइलों के साथ वह एक सदी का दरवाज़ा खटखटाता है और उसके तहख़ाने

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तानाशाह/ कविता

मंगलेश डबराल  तानाशाहों को अपने पूर्वजों के जीवन का अध्ययन नहीं करना पड़ता। वे उनकी पुरानी तस्वीरों को जेब में नहीं रखते या उनके दिल का एक्स-रे नहीं देखते। यह

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