धीरेश सैनी हैरानी की बात यह है कि बराबरी का समाज बनाने का ख़्वाब देखने वालों के संघर्षों को जनता के बीच बेअसर करने में जिस तरह सांप्रदायिकता बल्कि मुसलमानों