हरप्रीत कौर मुझे मोक्ष नहीं मिला बाबा मैं अपनी आत्मा पर तुम्हारे शब्दों की लताड़ महसूस कर रहा हूँ लतड़ते हुए तुम्हारे शब्द मेरी कंठ नली को चीरते हुए आर-