बदन पे जिस के शराफ़त का पैरहन देखा वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा खऱीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा