धार्मिक कट्टरताओं का कहर सबसे ज़्यादा स्त्रियों पर टूटता है. लगभग सभी धर्म घोर पितृसत्तात्मक हैं, पुरुषों के लिये, पुरुषों द्वारा, पुरुषों की दृष्टि से लिखे गए हैं, इसमें संशय