सरोजिनी बिष्ट रनिया मऊ (लखनऊ)। वह एक 18 साल का बेहद गरीब दलित युवक था, नाम था शिवम। वह पढ़ लिख कर अपना और अपने परिवार का भविष्य सँवारना चाहता