डॉ रामवीर
जब भी पढ़ता हूं अखबार लगता है सारा देश बीमार कहीं फैला है डेंगू बुखार तो कहीं मलेरिया की मार आखिर क्या करता है स्वास्थ्य विभाग क्या करती है सरकार
सरकार की मत पूछो सरकार के हैं कई प्रकार वह निराकार भी है और है साकार निराकार सरकार करती या करवाती है घोटाले और साकार सरकार धमकाती है जो कोई बोले बिठा देती है जांच इधर हो जाते हैं वर्ष पांच अब सरकार बदल जाती है जो चुप थे उनके बोलने की और जो मुखर थे उनके मौन होने की बारी आती है बाकी चीजें वैसे ही चलती रहती हैं लोकतन्त्र की नदी में धूर्ततन्त्र की गंदगी यूं ही बहती रहती है जनता भी हो गई है आदी अब उसे नहीं अखरती बरबादी राजनीति और नौकरशाही ने कर ली है ‘मैरिज ऑव कन्वीनियंस’ यानी समझौते वाली सुविधाजनक शादी क्या यही चाहते थे भगतसिंह सुभाष और गांधी।