फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 88 की सैनिक विहार सोसायटी में अवैध समिति ने गैर कानूनी ढंग से टीडीआई फेंटाबुलस डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड कंपनी को 23.35 एकड़ जमीन सौंप दी। समिति और डेवलपर के बीच जमीन के हुए इस लेनदेन को अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता विभाग चंडीगढ़ ने गैर कानूनी घोषित कर विवादित जमीन पर बनाए गए फ्लैट बेचने पर रोक लगा दी। आरोप है कि इसके बावजूद अवैध समिति के पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बिल्डर इन फ्लैटों के वारे न्यारे करने में जुटा है। बताया जा रहा है कि अवैध समिति और बिल्डर ने करीब चार सौ करोड़ का घोटाला किया है।
दि फरीदाबाद एक्स सैनिक एंड कर्मचारी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी सेक्टर 49 की सेक्टर 88 में 45.35 एकड़ जमीन है। उस समय की समिति जिसके सर्वे सर्वा राकेश कुमार धुन्ना थे ने इस जमीन को विकसित करने के लिए गैर कानूनी ढंग से टीडीआई फैंटाबुलस से 31 जुलाई 2014 को समझौता किया था। सोसायटी के अधिकतर मेंबरों को गुमराह कर किए गए इस समझौते की जानकारी होते ही तगड़ा विरोध शुरू हो गया था, क्योंकि समझौते की शर्तें ही पूरी नहीं की गई थीं। इनमें प्रमुख शर्त यह थी कि यह समझौता तब ही लागू होगा जब रजिस्ट्रार सहकारी समिति पंचकूला से अनुमति मिल जाए। शिकायत होने पर तत्कालीन रजिस्ट्रार ने 31 अक्तूबर 2014 को आदेश क्रमांक 8351 जारी कर तत्कालीन समिति का चुनाव ही रद्द कर दिया यानी इसके पदाधिकारी अवैध हो गए। बावजूद इसके अवैध समिति ने 21 नवंबर 2014 को टीडीआई से 23.35 एकड़ जमीन का गैर कानूनी एग्रीमेंट कर डाला।
समझौते के अनुसार सोसायटी में 702 फ्लैट, एसटीपी, बिजली घर, सड़कें, आदि आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के एवज में बिल्डर को 23.35 एकड़ जमीन और 82 करोड़ रुपये दिए जाने थे। आरोप है कि इधर सोसायटी मेंबर विरोध कर रहे थे उधर अवैध समिति वाली धुन्ना एंड कंपनी ने 23.35 एकड़ जमीन गबन करने के लिए 21 अक्तूबर 2016 व 19 अक्तूबर 2020 को टीडीआई डेवलपर को जमीन ट्रांसफर करने संबंधी एसपीए (स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी) कर दीं। इसका नतीजा यह हुआ कि बिल्डर ने न बिजली का सबस्टेशन बनाया, न ही सीवर तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की। एसटीपी बना तो दिया लेकिन सारी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण यह आज तक चलाया नहीं जा सका